बिहार चुनाव 2020:LJP ने NDA का छोड़ा साथ तो VIP को मिल सकता है मौका, यूं हुआ सीटों का बंटवारा
नई दिल्ली- बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए के घटक दलों में आखिरकार आज सीटों का बंटवारा कर दिया गया है। इसमें पहले से मिल रही जानकारी के मुताबिक ही विधानसभा की 243 सीटों में से 122 सीटें जेडीयू को दी गई हैं और 121 सीटें बीजेपी के खाते में आई हैं। अब ये दोनों पार्टियां अपनी-अपनी सीटों में से जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और मुंबई के कारोबारी और 'सन ऑफ मल्लाह' मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए सीटें देंगी। इसके तहत मांझी की पार्टी को जेडीयू कोटे से सीट दी जाएगी और वीआईपी को भाजपा के खाते से सीटें दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि, वीआईपी के साथ बातचीत अभी भी चल ही रही है।

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बिहार में एनडीए के घटक दलों में हुए सीटों के बंटवारे के तहत जेडीयू अपनी 122 सीटों में से 7 सीटें 'हम' को देगी। इस तरह से नीतीश कुमार की पार्टी सिर्फ 115 सीटों पर ही लड़ेगी। जबकि, भारतीय जनता पार्टी को जो 121 सीटें मिली हैं, उनमें से भी 7 सीटों पर विकासशील इंसान पार्टी को एडजस्ट किए जाने की बात है। यानि बीजेपी भी अकेले 114 सीटों पर लड़ेगी। इस तरह से चुनाव के पूर्व गठबंधन में बिहार में जेडीयू भारतीय जनता पार्टी के बड़े भाई की भूमिका निभाएगी।
इसकी घोषणा करते हुए खुद जेडीयू अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि 'जदयू को 122 सीट दी गई हैं और इसके अंतर्गत "हम पार्टी" को 7 सीट दी गई हैं। बीजेपी को 121 सीट दी गई हैं और वीआईपी को इसी के अंतर्गत सीट दी जाएंगी।' गौरतलब है कि वीआईपी पहले महागठबंधन का हिस्सा थी, लेकिन सीटों को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव से खटपट होने के चलते वह उससे बाहर निकल आई थी। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने वीआईपी से जारी बातचीत को लेकर आश्वस्त होते हुए कहा है कि, 'भाजपा और जदयू का गठबंधन अटूट है। साथ ही वीआईपी से सकारात्मक बातचीत चल रही है। बिहार में नीतीश कुमार एनडीए का चेहरा हैं। उनकी बिना अनुमति के एनडीए में न कोई आ सकता है न जा सकता है।'
वैसे गौरतलब है कि मुकेश सहनी महागठबंधन में सीटों के ऐलान पर ही नाराज होकर चले गए थे, क्योंकि उसमें उनको मिली सीटें नहीं बताई गई थीं। वैसे बीजेपी की पूरी कोशिश है कि वह सहनी को राजी कर ले। क्योंकि, वह मल्लाह समाज से आते हैं और उन्होंने बीते कुछ वर्षों में अपने पीछे मल्लाह और निषाद समुदाय को एकजुट किया है। यह बिहार में अति-पिछड़ा वर्ग में आता है और गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक और दूसरी नदियों के किनारे इनकी अच्छी खासी तादाद है। एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश में मल्लाहों की आबादी 5 फीसदी से ज्यादा है।












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