Exclusive Interview: तेलंगाना सांसद एटाला राजेंद्र का दावा -'कांग्रेस अफवाह नहीं फैलाती तो हम सत्ता में होते'
Exclusive Interview: तेलंगाना विधानसभा चुनाव के बाद 2024 लोकसभा चुनावों में भाजपा को राहत मिली है। देश के प्रमुख राज्यों में नुकसान के बावजूद पार्टी ने 2019 से अपने वोट शेयर में 15.43 प्रतिशत का इजाफा किया है। पार्टी ने लोकसभा चुनाव में 8 सांसदों को जिताकर संख्या बल बढ़ा लिया है। इससे पार्टी तेलंगाना में मजबूत स्थिति में आ गई है। पार्टी की इस सफलता का श्रेय सात बार के विधायक वित्त और स्वास्थ्य मंत्री और वर्तमान में प्रतिष्ठित मलकाजगिरी निर्वाचन क्षेत्र से सांसद एताला राजेंदर को दिया जाता है।
एताला ने वन इंडिया के साथ खास बातचीत में कई मुद्दों पर खुलकर बात की है। हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों और 2023 विधानसभा चुनावों के परिणामों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब विधानसभा चुनावों की बात आती है तो मैं इसे रेवंत या कांग्रेस की जीत के रूप में नहीं देखता। यह बीआरएस और केसीआर की हार थी। राज्य के लोगों ने केसीआर के खिलाफ मतदान किया। लेकिन रेवंत के पक्ष में नहीं। भाजपा और बीआरएस को जोड़ने वाले कांग्रेस की गलत अफवाहों और अभियान ने हमें काफी नुकसान पहुंचाया है। अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो हम सत्ता में होते।

उन्होंने आगे कहा तेलंगाना के लोगों ने नेताओं को दिखाया है कि अगर घमंड आ जाता है तो उन्हें कैसे निपटाया जा सकता है। बीआरएस और इसके नेताओं के अवसरवादिता उनकी विफलता का कारण बनी।
राजनीति में सब कुछ संभव
सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और पूर्व मंत्री हरीश राव के भाजपा में शामिल होने चर्चाओं ने प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद ने कहा वर्तमान में राजनीतिक स्थिति गठबंधनों के अनुकूल नहीं है। यदि ऐसा अवसर कभी आता है तो हमारे पास ऐसे प्रस्ताव के लिए अपने मापदंड हैं। हरीश राव के भाजपा में शामिल होने के विचार हो सकते हैं। रेवंत रेड्डी भी कांग्रेस छोड़ने के बारे में सोच सकते हैं। लेकिन मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं है। मेरे लिए इस पर टिप्पणी पर टिप्पणी करना संभव नहीं है। हाल के घटनाक्रम ने हमें यह सिखाया है कि राजनीति में कुछ भी संभव हो सकता है।
पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करना चाहता
जब एताला राजेंदर से पूछा गया कि उन्होंने भाजपा को ही पार्टी के रूप में क्यों चुना। इस पर एताला ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में काम करना चाहता था। 2014 से उन्होंने देश के लिए जो कुछ भी किया है। वह लोगों के लिए देखने योग्य है। कांग्रेस ने दशकों तक देश पर राज किया। लेकिन कुछ नहीं किया। इंदिरा गांधी के दशकों बाद राहुल गांधी द्वारा गरीबी उन्मूलन के नारे लगाने से यह साबित होता है। पीएम मोदी ने भारत को विश्व शक्ति के मानचित्र पर रखा है और मैं इस यात्रा का हिस्सा बनना चाहता हूं।
केसीआर ने तेलंगाना के गठन के बाद प्रमुख नेताओं को दरकिनार किया
केसीआर ने 2014 में सत्ता में आने के बाद उस्मानिया विश्वविद्यालय में प्रवेश से इंकार करने और तेलंगाना आंदोलन में योगदान देने वाले प्रमुख नेताओं को दरकिनार कर पिछले 11 वर्षों में अनगिनत बार सुर्खियां बटोरी है। इस अवधि के अधिकांश समय में केसीआर के साथ चलने वाले एताला ने कहा कि जैसे ही टीआरएस सत्ता में आई। केसीआर स्वार्थी हो गए। उन्होंने उन लोगों पर भी भरोसा नहीं किया। जो 14 वर्षों तक उनके साथ चले। उनका मानना था कि यह सब उन्होंने ही किया है। प्रमुख नेताओं के साथ इंसानों जैसा व्यवहार भी नहीं किया जाता था। उनमें अहंकार आ गया और उन्होंने मान लिया कि वह कुछ भी कर सकते हैं। वह ऐसे व्यक्ति हैं। जो लोगों का तब तक उपयोग करते हैं। जब तक उन्हें उनकी आवश्यकता होती है। समय आने पर उन्हें धोखा देते हैं। हम हमेशा लोगों के बीच रहते हैं। इसलिए तेलंगाना के गठन के बाद वह कभी उस्मानिया विश्वविद्यालय में प्रवेश नहीं कर सके। लेकिन हम कर सकते थे।
2028 में सत्ता में आने का पूरा भरोसा
कांग्रेस के शासन के पहले 7 महीनों और 2028 में सत्ता में आने के भाजपा के अवसरों पर बात करते हुए सांसद एताला ने कहा कि हमें 2028 में सत्ता में आने का पूरा भरोसा है। लोगों ने थोड़े ही समय में अपने फैसले पर पछताना शुरू कर दिया है। रेवंत रेड्डी ने अभी तक एक भी वादा पूरा नहीं किया है। पार्टी के 6 प्रमुख वादे झूठे निकले। भाजपा को निश्चित रूप से मौका मिलेगा।
कांग्रेस के भीतर गुटबाजी
पिछले 7 महीनों में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के रेवंत रेड्डी को अपना नेता मानने से इंकार करने की जानकारी सामने आई है। इस पर एताला ने कहा कि वास्तव में कांग्रेस पार्टी में ऐसे लोग हैं। जिन्होंने अपना जीवन पार्टी के लिए समर्पित कर दिया है। पार्टी के लिए उन्होंने अपनी पीढ़िया खपा दी। उनमें से कई मुख्यमंत्री से कहीं अधिक अनुभवी हैं। रेवंत साफ रूप से महसूस कर सकते हैं कि बतौर मुख्यमंत्री उन्हें क्या करना है। यह बताने के लिए कोई नहीं हैं। इसलिए आप देखते हैं कि लोग कई स्तरों पर स्वतंत्रता का दावा करते हुए उनके मुख्यमंत्री पद को नकारते हैं।












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