अमित शाह को दरकिनार कर कांग्रेस से मिले भाजपा के सदस्य, दोनों ने मिलकर बनाई 'सरकार'
नई दिल्ली। गुवाहाटी में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है, यहां भाजपा और कांग्रेस के चुने हुए नेताओं ने बगावत कर दी है और एक साथ मिलकर काउंसिल चलाने का फैसला लिया है। दोनो ही पार्टियों के सदस्यों ने मिलकर मिजोरम टकमा ट्राइबल फ्रंट को चलाने का फैसला लिया है। दरअसल इस बार हुए चुनाव में मिजो नेशनल फ्रंट ने बहुमत हासिल किया था, लेकिन भाजपा के चुने हुए सदस्यों ने एमएनएफ को सत्ता से बाहर रखने का फैसला लिया है, जिसके बाद अमित शाह को बड़ा झटका लगा है।

शाह ने किया था ट्वीट
आपको बता दें कि चकमा ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल का गठन 1972 में किया गया था, लेकिन इस महीने हुए चुनाव में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ था। इससे पहले इस फ्रंट को बौद्ध आदिवासी चला रहे थे। गौर करने वाली बात यह है कि यहां हुए चुनाव के बाद खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीट करके मिजोरम भाजपा यूनिट को बधाई दी थी। ट्वीट करके शाह ने कहा था कि चकमा में एमएनएफ और भाजपा मिजोरम को बहुमत हासिल करने पर बधाई। दोनों ने मिलकर 20 में से 13 सीटों पर जीत हासिल की थी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूर्वोत्तर भारत की नीति की वजह से ही संभव हो सका है। इसी के साथ ही मिजोरम में भी भाजपा का उदय हो रहा है। लेकिन भाजपा के चुने हुए सदस्यों ने एमएनएफ को सत्ता से बाहर रखने का फैसला लिया है और कांग्रेस के नेताओं से हाथ मिला लिया।

भाजपा नेता नाराज
गौरतलब है कि पूर्वोत्तर भारत में मिजोरम आखिरी ऐसा राज्य था जहां कांग्रेस की सरकार थी। ऐसे में भाजपा इस बात की पूरी कोशिश कर रही थी कि यहां कांग्रेस सत्ता में दोबारा नहीं आने पाए। मिजोरम की आधी से ज्यादा आबादी चकमा लोगों की ऐसे में यह कांग्रेस और भाजपा के नेताओं की बगावत भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। इससे पहले भाजपा और एमएनएफ के नेताओं के बीच हुई डील की वजह से भाजपा के उम्मीदवार को काउंसिल के चेयरमैन का पद मिला था। लेकिन जिस तरह से इसके जीते हुए सदस्यों ने बगावत दिखाई है उसकी वजह से पार्टी के नेता सकते में हैं और काफी नाराज भी हैं।

भाजपा पर लगाया आरोप
अजवल से भाजपा नेता का कहना है कि इस खबर के बाद हम सकते में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने प्रतिनिधियों को दल बदलने देने में सफल हुई है। हालांकि कांग्रेस ने अभी तक इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार किया है और ना ही काउंसिल के चेयरमैन के पद का दावा पेश किया है। वहीं मिजोरम के खेल मंत्री और कांग्रेस नेता जोडिंतुलंगा का कहना है कि चुनाव के बाद दोनों ही दल के नेताओं का यह गठबंधन फर्जी है। उन्होंने कहा कि ये नेता आप में मिलकर गठबंधन तो कर सकते हैं लेकिन हमारी सरकार के काम को हटा नहीं सकत ेहैं।












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