केरल में गर्भवती हथिनी की मौत के बाद पोस्टमार्टम में हुआ बड़ा खुलासा
नई दिल्ली। केरल के मलप्पुरम में गर्भवती हथिनी की मौत के बाद हर कोई इस अमानवीय घटना पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहा है। दरअसल भूखी हथिनी खाने की तलाश में रिहायशी इलाके में आ गई थी, लेकिन किसी ने उसे अनानास में पटाखे भरकर खिला दिए, जिसकी वजह से हथिनी की मौत हो गई। हथिनी की मौत के बाद उसका पोस्टमार्टम किया गया है, जिसमे बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार हथिनी कई दिनों तक भूखी रही जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई।

दो हफ्ते कुछ खा नहीं पाई
पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में इस बात की जानकारी सामने आई है कि गर्भवती हथिनी के मुंह में काफी गंभीर चोट लगी थी, इसकी मुख्य वजह विस्फोटक भरा अनानास खाना हो सकती है, जिसके चलते हथिनी तकरीबन 2 हफ्तों तक कुछ खा नहीं सकी, जिसके बाद नदी में डूबने से उसकी मौत हो गई। बता दें कि हथिनी की मौत के बाद लगातार वन विभाग की टीम उन लोगों की तलाश कर रही है, जिन्होंने हथिनी को अनानास में पटाखे भरकर खिलाए थे। इस मामले में पुलिस एक आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है।
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एक आरोपी गिरफ्तार
केरल के वन मंत्री के. राजू ने बताया कि पल्लकड़ में हथिनी की मौत के मामले में एक शख्स की गिरफ्तारी हुई है। वन विभाग ने जांच के लिए तीन टीमों को नियुक्त किया है। पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि इस तरह की घटना दोबारा न हो। इससे एक दिन पहले मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने ट्वीट कर रहा कि, पलक्कड़ जिले में एक दुखद घटना में, एक गर्भवती हथिनी की जान चली गई। इसे लेकर लोगों में काफी गुस्सा है, लेकिन मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि आपकी चिंताएं व्यर्थ नहीं जाएंगी। न्याय की जीत होगी। उन्होंने लिखा कि, तीन संदिग्धों पर ध्यान केंद्रित करते हुए जांच जारी है। पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से घटना की जांच करेंगे। जिला पुलिस प्रमुख और जिला वन अधिकारी ने आज घटनास्थल का दौरा किया। हम दोषियों को सजा दिलाने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे।

घटनाओं को रोकने की करेंगे कोशिश
पिनराई विजयन ने कहा, हम मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के पीछे के कारणों का समाधान करने का भी प्रयास करेंगे। जलवायु परिवर्तन स्थानीय समुदायों और जानवरों दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। सोशल मीडिया में चल रही गलत खबरों को लेकर सीएम पिनराई ने कहा कि, हमें इस बात का दुख है कि, इस त्रासदी को कुछ लोगों ने नफरत फैलाने वाले अभियान में तब्दील कर दिया। गलत विवरणों और आधी सच्चाई को पूरा सच बनाने की कोशिश की है। कुछ लोगों ने इसे कट्टरता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया।












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