टिक टॉक यूजर्स के लिए बड़ी खबर, अमेरिका में बैन हो सकता है ऐप
नई दिल्ली। भारत में काफी लोकप्रिय और चर्चित वीडियो ऐप टिक टॉक एक बार फिर सुर्खियों में हैं। भारतीय युवाओं में काफी फेमस टिक टॉक ऐप को 200 मिलियन लोगों ने डाउनलोड किया है, भारत में यह सबसे ज्यादा डाउनलोड किए गए ऐप्स में से एक है। सिर्फ हमारे देश में ही नहीं अमेरिका में भी इस ऐप को काफी पसंद किया जाता है, अकेले यूएस में इस ऐप को 11 करोड़ से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड किया है। विश्व का सबसे ताकतवर देश अमेरिका को अब टिक टॉक से खतरा महसूस होने लगा है। वहां के दो सांसदों ने सरकार से टिक टॉक की सुरक्षा जांच कराए जाने की मांग की है।

क्या है टिक टॉक
टिक टॉक एक चाइनीज वीडियो ऐप है जिसमें लोग छोटी-छोटी वीडियो बनाकर लोगों का मनोरंजन करते हैं। इस ऐप के जरिये लोग 15 से 30 सेकेंड की वीडियो बनाते हैं और वह शेयर करते हैं। भारत में यह ऐप तेजी से लोकप्रिय हुआ है, हमारे देश में इसके 200 मिलियन यूजर्स हैं वहीं पूरी दुनिया में टिक टॉक को 50 करोड़ बार डाउनलोक किया गया है। अमेरिका में भी बड़ी संख्या में इसके यूजर्स हैं, यह लोग अब अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं। वहां मांग की जा रही है कि टिक टॉक की सुरक्षा जांच कराई जाए और अगर वह दोषी पाया जाता है तो उसे बैन किया जाए।

अमेरिका को सता रहा ये डर
अमेरिका में टिक टॉक यूजर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है ऐसे में उसे अपनी राष्ट्रय सुरक्षा का खतरा सताने लगा है। बता दें, अमेरिका और चीन के बीच संबंध कुछ अच्छे नहीं है और दोनों ही देश एक दूसरे की जाजूसी में लगे हुए हैं। अमेरिका को लगता है कि टिक टॉक के जरिए चीन उसके यूजर्स की निजी डाटा चुरा सकता है और यह देश के लिए गंभीर समस्या है। अमेरिका के डेमोक्रेट पार्टी के सीनेटर चक शूमर और रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर टॉम कॉटन ने राष्ट्रीय आसूचना निदेशालय से टिक टॉक के सुरक्षा जांच की मांग की है। उन्होंने सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा कि यह ऐप अमेरिकी नागरिकों को कहीं बीजिंग की जासूसी का शिकार ना बना ले।

बाइट डांस पर लगाए आरोप
चीन के बाइट डांस के स्वामित्व वाले ऐप टिक टॉक पर अमेरिका में बैन होने का खतरा मंडराने लगा है। शूमर और कॉटन ने कहा, टिक टॉक से अमेरिका की जासूसी का खतरा है और इसे हम नजर अंदाज नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि, टिक टॉक के मालिक बाइट डांस पर चीन की खूफिया एजेंसिया ऐप यूजर्स की जानकारी साझा करने का दबाव डाल रही है। ऐसे में वह हमरे नागरिकों की निजी जानकारी चीन सरकार तक पहुंचा सकता है।












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