चौधरी चरण सिंह, नरसिम्हा राव और स्वामीनाथन को भारत रत्न, 5-5 प्वाइंट्स में जानें पूरा प्रोफाइल
लोकसभा चुनाव के अब कुछ ही महीने शेष रह गए हैं। इस बीच, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने तीन शख्सियतों को भारत रत्न देने का ऐलान शुक्रवार को किया है। जिसमें पीवी नरसिम्हा राव, चौधरी चरण सिंह और एमएस स्वामीनाथन शामिल हैं।
इतिहास के पन्नों को पलटे तों, चौधरी चरण सिंह देश के 5वें और नरसिम्हा राव 9वें प्रधानमंत्री थे। वहीं, कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन को हरित क्रांति का जनक कहा जाता है। आइए हम आपको रूबरू कराते हैं इन महान हस्तियों से...

चौधरी चरण सिंह
- इनका जन्म 23 दिसंबर 1902 में यूपी के मेरठ जिले के नूरपुर में जाट किसान परिवार में हुआ था।
- 1923 में ग्रेजुएशन किया। 1925 में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया। आगरा यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई पूरी की। 1928 में वकालत शुरू की।
- 3 अप्रैल 1967 से 17 अप्रैल 1968 तक यूपी के सीएम रहे। दोबारा 19 फरवरी 1970 में सीएम बने।
- 1979 में वित्त मंत्री और उप प्रधानमंत्री रहे। इस दौरान राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की स्थापना की।
- 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक वे देश के प्रधानमंत्री रहे। 29 मई 1987 में निधन हो गया।
पीवी नरसिम्हा राव
- इनका जन्म 28 जून 1921 में करीमनगर में हुआ। हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी से पढाई की। इसके बाद आगे की शिक्षा मुंबई यूनिवर्सिटी और नागपुर यूनिवर्सिटी से हासिल की।
- आंध्र प्रदेश से राजनीतिक करियर की शुरुआत की। 1957 से 1977 तक आंध्र प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे।
- आंध्र सरकार में 1962 से 64 तक कानून एवं सूचना मंत्री, 1964 से 67 तक कानून मंत्री, 1967 में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री और 1968 से 1971 तक शिक्षा मंत्री रहे।
- 1971 से 73 तक आंध्रा के सीएम रहे। 1991 से 1996 तक देश के 9वें प्रधानमंत्री रहे।
- 23 दिसंबर 2004 में निधन हो गया।
डॉ. एमएस स्वामीनाथन
- इनका पूरा नाम है 'मनकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथन'। इनका जन्म 7 अगस्त 1925 को तमिलनाडु के कुंबकोणम में हुआ था।
- स्वामीनाथन अनुवांशिक वैज्ञानिक थे, जिन्हें भारत की हरित क्रांति का जनक कहा जाता है।
- 1971 में सामुदायिक नेतृत्व के लिए मैग्सेसे पुरस्कार, 1986 में अल्बर्ट आइंस्टीन वर्ल्ड साइंस पुरस्कार, 1987 में पहला विश्व खाद्य पुरस्कार और 1989 में यूनेस्को गांधी स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
- 1967 में पद्म श्री, 1972 में पद्म भूषण और 1989 में पद्म विभूषण मिला।
- 28 सितंबर 2023 में निधन हो गया ।












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