अनोखा भंडारा: सीमेंट क्रंक्रीट तैयार करने वाले मिक्सर में गूथा जा रहा आटा, ट्रॉली में बन रही सब्जी, VIDEO
गुर्जर समाज के आराध्य भगवान देवनारायण की जयंती के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था। बताया जा रहा है कि सिरसा गांव के देवनारायण मंदिर में पिछले सात दिनों से भागवत कथा चल रही थी।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में स्थित घाटीगांव सिरसा में शनिवार (28 जनवरी) को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। यहां हर दिन 50 हजार लोगों के लिए खाना बन रहा है। खाना बनाने के लिए बिल्डिंग बनाने के लिए किसी और मशीनरी का इस्तेमाल नहीं, बल्कि सीमेंट कंक्रीट तैयार करने वाले मिक्सर प्लांट का उपयोग किया जा रहा है। भंडारे में मालपुआ के लिए मिक्सर प्लांट में आटा गूथा जा रहा है। वहीं ट्रॉलियों में खीर और आलू की सब्जी बन रही है।

विशाल भंडारे का आयोजन
गुर्जर समाज के आराध्य भगवान देवनारायण की जयंती के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था। बताया जा रहा है कि सिरसा गांव के देवनारायण मंदिर में पिछले सात दिनों से भागवत कथा चल रही थी। कथा के बाद हर शाम भंडारे का आयोजन किया जा रहा था।

हर किसी का खींच रहा ध्यान
इस विशाल भंडारे के आयोजन में कई गांव के लोग जुटे थे। कई दिनों से भंडारे का सफल आयोजन चल रहा था। इस बीच भंडारे का एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। ट्विटर यूजर सुशील कौशिक ने इस वीडियो को साझा किया है। जिसके बाद हर किसी का ध्यान खींचा जा रहा है।

भारी मात्रा में मटीरियल की खपत
भंडारे के आयोजनकर्ताओं में से एक ब्रजेश गुर्जर ने बताया कि पिछले सात दिनों तक भंडारे का आयोजन किया गया। हफ्ते भर प्रसाद में मालपुए, खीर और आलू की सब्जी बांटी गई। इसके लिए हर रोज तकरीबन 30 क्विंटल चीनी, 60 क्विंटल आलू, 20 क्विंटल चावल और 35 क्विंटल गेहूं के आटे सहित बड़ी मात्रा में घी की खपत हुई।

काफी संख्या में जुटे थे लोग
उन्होंने बताया कि 7वें दिन काफी बड़े स्तर पर भंडारा हुआ। भंडारे में 100 क्विंटल से अधिक चीनी, 100 क्विंटल आलू, 60 क्विंटल चावल और 500 क्विंटल आटे की खपत हुई थी। प्रसाद बनाने के लिए 100 से ज्यादा हलवाई लगे थे। प्रसाद परोसने के लिए काफी संख्या में लोग जुटे थे।

इन लोगों की मिली थी जिम्मेदारी
देवनारायण मंदिर के महंत संत शीतलदास ने बताया कि भंडारे की जिम्मेदारी गांव-गांव में बांटी गई थी। किसी एक गांव के लोगों को प्रसाद तैयार कराने, दूसरे गांव को प्रसाद परोसने और तीसरे गांव को पत्तल उठाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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