भगवंत मान बोले- अगर आप की सरकार बनी तो पंजाब विरोधी बिजली समझौते होंगे रद्द
चंडीगढ़, 5 जुलाई आम आदमी पार्टी (आप) की पंजाब में सरकार बनने पर बादलों की ओर से प्राईवेट बिजली कंपनियों के साथ किये गए पंजाब विरोधी बिजली समझौते जरुर रद्द किए जाएंगे, अगर यह समझौते रद्द न किये तो अगले 25 सालों में पंजाब के लोगों को सवा 2 लाख करोड़ रुपए इन बिजली कंपनियों को देने पड़ेंगे। यह बयान 'आप' के सूबा प्रधान और सांसद भगवंत मान ने सोमवार को यहां एक प्रेस कान्फ्रैंस के दौरान पत्रकारों के साथ सांझा किया। उन्होंने कहा कि 2022 के चुनाव समय आम आदमी पार्टी पंजाब के लोगों के लिए एक कारगर 'रोड मैप' ले कर आयेगी जिससे पंजाब के लोग आर्थिक तौर पर ख़ुशहाल और सांस्कृतिक पक्ष से अमीर हों।

भगवंत मान ने आगे कहा कि आकली दल और भारतीय जनता पार्टी की संयुक्त सरकार ने प्राईवेट बिजली कंपनियों के साथ पंजाब विरोधी समझौते किये थे और अब कांग्रेसियों की सरकार ने यह घातक समझौते लागू किये हुए हैं। जिस कारण बिना बिजली ख़रीदे ही पंजाब के खजाने में से 20,000 करोड़ रुपए प्राईवेट बिजली कंपनियों को दिए जा चुके हैं और पंजाब के लोगों को देश में सबसे महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है।
मान ने कहा आम आदमी पार्टी हमेशा इन बिजली समझौतों का विरोध करती रही है और इसी लिए पार्टी ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के सिसवां फार्म हाऊस का घेराव किया था। इस कारण अब कैप्टन अमरिंदर सिंह भी कह रहे हैं कि इन बिजली समझौतों की समीक्षा की जा रही है, क्योंकि 147 बिजली समझौतों में से 122 समझौते गलत साबित हुए हैं। उन्होंने कहा प्राईवेट बिजली कंपनी ने एक पावर थर्मल प्लांट लगाने के लिए 25,000 करोड़ के करीब पैसे खर्च किये थे, जब कि इस लागत से दुगने पैसे कंपनी ने पंजाब के खजाने से वसूल किये हैं।
भगवंत मान ने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कनवीनर और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में आप की सरकार बनने पर 24 घंटे बिजली सप्लाई और 300 यूनिट बिजली प्रति महीना मुफ्त देने का ऐलान किया है, जिस की हिमायत अब कांग्रेसी नेता भी कर रहे हैं। मान ने कहा कि अगर पंजाब में से माफिया राज खत्म कर दिया जाये और सरकारी खजाने की लूट रोक दी जाये तो पंजाब वासियों को उचित सुविधाएं दी जा सकतीं हैं, क्योंकि आप के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने ऐसा सब कुछ दिल्ली में करके दिखा दिया है।
एक सवाल के जवाब में भगवंत मान ने कहा कि भारत के चुनाव कमिशन को राजनैतिक पार्टियों की ओर से जारी किये जाते चुनाव मनोरथ पत्र रजिस्टर्ड करने चाहिए और सरकार बनाने वाली पार्टी को चुनावी वायदे पूरे न करने के विरुद्ध नोटिस भी जारी करना चाहिए।












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