गुजरात में बीसीजी के टीके ने ली दो जुड़वा बच्चों की जान
अहमदाबाद। गुजरात के सुरेंद्र नगर से एक ऐसी खबर है जो यहां के विकास की पोल खोल देगी। यहां के सुरेंद्रनगर जिले के एक गांव में बीसीजी के टीके से दो जुड़वा बच्चों की मौत का मामला सामने आया है।

इस खबर के साथ ही देश में मौजूद स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर से सवाल उठने लगे हैं। अभी थोड़े दिन पहले ही छत्तीसगढ़ में नसबंदी कैंप में 13 महिलाओं की मौत ऑपरेशन के बाद हो गई थी।
बीसीजी का टीका किसी भी नवजात को टीबी से बचने के लिए लगाया जाता है। सुरेंद्रनगर के धारेली गांव का यह पूरा मामला है। इन बच्चों की मौत के बाद इनके माता-पिता ने डॉक्टरों पर आरोप लगाया है। फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
जिला अधिकारी केबी भट्ट ने इस पूरे मसले पर बयान दिया है कि दोनों बच्चों की उम्र सिर्फ डेढ़ माह थी और इन्हें बुधवार को बीसीजी का टीका 'ममता दिवस ' के मौके पर दिया गया था। टीका लगने के अगले ही दिन इन बच्चों की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कर रहा है।
जिन बच्चों की मौत हुई है उनकी पहचान नितिन और निकुल के तौर पर की गई है। बच्चों के पिता भिखाभाई कोली ने आरोप लगाया है कि टीके के बुरे प्रभाव की वजह से उनके बच्चे मारे गए।
उन्होंने बताया कि टीका लगने के बाद से ही दोनों बच्चों को बुखार था। वह रात एक बजे सो सके। जब सुबह चार बजे हमने उन्हें देखा तो उनके मुंह खुले हुए थे। इन दोनों बच्चों के शरीर को राजकोट सिविल अस्पताल भेजा गया जहां पर इनका पोस्टमार्टम हुआ।
वहीं स्वास्थ्य अधिकारी एसके उपाध्याय का कहना है कि इन बच्चों की मौत टीका लगने की वजह से नहीं हुई है।












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