BBC IT 'surveys': आयकर के 'सर्वे', 'रेड' या 'सर्च' में क्या फर्क है ?
BBC IT 'surveys': आयकर सर्वे और आयकर सर्च या छापा में बहुत ज्यादा अंतर है। सर्वे के मुकाबले सर्च ज्यादा गंभीर होता है और इसके अंजाम भी अधिक गंभीर होते हैं।

BBC IT 'surveys': बीबीसी या ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन के मुंबई और दिल्ली स्थित दफ्तरों में आयकर विभाग की कार्रवाई ने पूरी दुनिया की मीडिया में खलबली मचा दी है। इसकी वजह ये है कि हाल ही में 2002 के गुजरात के दंगों पर बनी एक बहुत ही विवादित डॉक्यूमेंट्री की वजह से यह मीडिया हाउस आलोचनाओं का शिकार बन रहा है। ब्रिटेन में भी इसपर खूब राजनीति हो रही है और इसपर दोयम दर्जे की रिपोर्ट बनाए जाने तक के आरोप लग रहे हैं। भारत सरकार ने तो शुरू में ही इस डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा का हिस्सा बता दिया है। ऐसी स्थिति में आयकर विभाग की कार्रवाई से लोगों का ध्यान इसकी ओर खिंचना स्वाभाविक है। लेकिन, जानकारी के मुताबिक आयकर विभाग ने सिर्फ उसके दफ्तरों का सर्वे किया है और यह सर्च की कार्रवाई नहीं थी। आइए जानते हैं कि इन शब्दों में क्या फर्क है और कौन ज्यादा गंभीर माना जाता है।

बीबीसी पर आयकर की कार्रवाई के मायने ?
मंगलवार को आयकर विभाग (Income Tax Department) ने बीबीसी के दिल्ली और मुंबई स्थित दफ्तरों में सर्वे किया है। बीबीसी हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक विवादित डॉक्यूमेंट्री के प्रसारण की वजह से भारत में ही नहीं यूके में भी विवादों में रहा है। यही वजह है कि इस तरह के सवाल उठ रहे हैं की आयकर की इस कार्रवाई को सर्वे क्यों कहा जा रहा है? आयकर की छापेमारी या रेड या सर्च से यह किस तरह से अलग होता है।

बीबीसी दफ्तरों का 'सर्वे' किस कानून के तहत हुआ है ?
दिल्ली और मुंबई स्थित बीबीसी के दफ्तरों में आयकर सर्वे आईटी ऐक्ट, 1961 के विभिन्न प्रावधानों के तहत किया गया है। इसमें से एक सेक्शन 133ए है। इसके तहत आयकर विभाग को अधिकार है कि वह किसी छिपी हुई जानकारी जुटाने के लिए 'सर्वे' कर सकता है। आयकर कानून में 1964 में संशोधन के जरिए यह प्रावधान जोड़ा गया है। यह धारा सक्षम अधिकारी को अपने अधिकार क्षेत्र वाले इलाके में आने वाले किसी भी बिजनेस, प्रोफेशन या चैरिटेबल संस्था के परिसर में प्रवेश की अनुमति देता है, जहां जाकर वह उनके खातों से संबंधित या अन्य दस्तावेजों, कैश, स्टॉक या अन्य बेशकीमती चीजों की पड़ताल कर सकता है, जो उसकी जांच के लिए आवश्यक हो सकता है।

आयकर 'सर्वे' के दौरान और क्या हो सकता है ?
अगर आयकर अधिकारी जरूरी समझता है तो वह सर्वे के दौरान मिले कैश, स्टॉक या अन्य बेशकीमती चीजों के संबंध में किसी का बयान दर्ज कर सकता है या पाए गए दस्तावेजों को चिन्हित कर सकता है या उनकी डेटा या कॉपी ले सकता है। आयकर अधिकारी को अगर आवश्यक लगता है तो वह कारण बताकर 'खातों या दस्तावेजों' को 'जब्त' भी कर सकता है। लेकिन,15 दिन से ज्यादा समय तक इन दस्तावेजों को जब्त रखने से पहले संबंधित अधिकारी को आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मंजूरी लेना जरूरी है। किसी भी दस्तावेज या चीज अपने पास रखने या जब्त कर लेने का प्रावधान 2002 के वित्त अधिनियम से शामिल किया गया है।

आयकर 'सर्च' या 'छापा (raid)' क्या है ?
आयकर विभाग के 'सर्च' को आमतौर पर 'रेड' या 'छापा' कहकर संबोधित करते हैं। वैसे आयकर कानून में कहीं भी 'छापा' को परिभाषित नहीं किया गया है। लेकिन आईटी ऐक्ट की धारा 132 में 'सर्च' शब्द जरूर परिभाषित है। इसके तहत अगर आयकर विभाग के पास यह मानने के कारण मौजूद हैं कि किसी के भी पास कैश, सोना या बहुमूल्य धातु या उससे जुड़े दस्तावेज अघोषित संपत्ति के रूप में मौजूद हैं तो वह उसके परिसर में प्रवेश करके उसकी जांच कर सकता है। इस दौरान आयकर अधिकारी दरवाजे, बक्से, लॉकर, सेफ, आलमारी या अन्य चीजों के ताले भी तोड़ सकते हैं। सर्च के दौरान वह जांच से संबंधित किसी भी चीज को जब्त करके अपने साथ ले जा सकते हैं। वह परिसर में किसी भी जगह को आगे की जांच के लिए सील भी कर सकते हैं।
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'सर्वे', 'रेड' या 'सर्च' में क्या फर्क है ?
आमतौर पर लोग आयकर विभाग के सर्वे और सर्च या रेड में ज्यादा अंतर नहीं कर पाते। लेकिन, सर्वे की तुलना में सर्च ज्यादा गंभीर कार्रवाई है, जिसके अंजाम भी उतने ही गंभीर हो सकते हैं। इसके अलावा भी सर्वे और सर्च में एक बहुत ही बड़ा अंतर है। सर्वे सिर्फ कार्यकारी दिवस (छुट्टी वाले दिन नहीं) पर कार्य के घंटों (दफ्तर के कामकाजी समय) के दौरान ही किए जा सकते हैं। जबकि, सर्च या रेड किसी भी दिन सूर्योदय के बाद शुरू हो सकती है, जो तबतक जारी रह सकती है, जबतक की पूरी प्रक्रिया खत्म नहीं हो जाती। इसके अलावा सर्वे सिर्फ दस्तावेजों और कैश, भंडार की छानबीन तक सीमित होता है, लेकिन सर्च का दायरा ज्यादा विस्तृत होता है। इसमें अघोषित आय का पता लाने के लिए पूरे परिसर की तहकीकात की जा सकती है और इसके लिए आवश्यक होने पर पुलिस की भी मदद ली जाती है।












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