Bangladesh Unrest: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा के खिलाफ भारत के लेखक, शिक्षाविद, लिखा संसद को खुला पत्र
बांग्लादेश में आंतरिक सरकार के गठन के बावजूद स्थिति गंभीर है। पड़ोसी देश में लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच हिंदूओं के घरों और मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है। इस बीच बांग्लादेश में आशांति के लिए कथित रूप से विदेशी ताकतों हाथ होने की भी आशंका जताई जा रही है। बांग्लादेश में टारगेटेड हिंसा को लेकर अब भारत में विरोध के बीच लेखकों और शिक्षाविदों ने एक पत्र लिखकर सांसद में एक प्रस्ताव लाने की मांग की है।
बांग्लादेश में विरोध के दौरान वहां मेहरपुर में एक इस्कॉन केंद्र को जलाना, देश भर में कई हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ और दंगाइयों द्वारा हिंदुओं की हत्या का जश्न मनाते हुए वीडियो सामने आने के बाद भारत में इसका जोरदार विरोध हो रहा है। इस बीच भारत के शिक्षाविदों और लेखकों ने एक खुला पत्र लिखा है।

पत्र में ये मांग की गई है कि सांसद में बांग्लादेश में हो रही घटनाओं के खिलाफ प्रस्ताव लाया जाए और मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। पत्र में इसके अलावा बांग्लादेश को वैश्विक मोर्चे पर बांग्लादेश की दोहरे चरित्र को सामने लाने के साथ वहां पीड़ित समुदाय को न्याय दिलाने की मांग की गई है।
अपने खुले पत्र में लेखकों, शिक्षाविदों ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के बारे में अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। पड़ोसी देश में हो घटनाओं को लेकर संसद में प्रस्ताव की मांग के साथ पत्र में बाग्लादेश में अल्पसंख्यकों को न्याय दिलाने की मांग की गई है। पत्र में लेखक अमीश त्रिपाठी, अश्विन सांघी, अभिषेक बनर्जी, राजीव मंत्री, स्मिता बरूआ और एससी अधिवक्ता जे साई दीपक समेत कई लेखकों और शिक्षाविदों ने हस्ताक्षर किए हैं।
पत्र में लिखा गया है, "हाल के दिनों में हमने बेहद परेशान करने वाली घटनाएं देखी हैं, जिनमें मेहरपुर में एक इस्कॉन केंद्र को जलाना, देश भर में कई हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ और दंगाइयों द्वारा हिंदुओं की हत्या का जश्न मनाते हुए वीडियो का प्रसार शामिल है। दुख की बात है कि हिंसा की ये हरकतें न तो अलग-थलग हैं और न ही ये बिना मिसाल के हैं... बांग्लादेश में हिंदू आबादी ने ऐतिहासिक रूप से बार-बार उत्पीड़न की लहरों को सहन किया है, जो अक्सर राजनीतिक अस्थिरता के दौरान तेज हो जाती है। 1971 से, जब बांग्लादेश के गठन से पहले पाकिस्तानी शासन द्वारा 2.5 मिलियन हिंदुओं की हत्या कर दी गई थी, तब से हिंदुओं के खिलाफ लगातार और व्यवस्थित नरसंहार हो रहा है। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि 2013 के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं पर 3,600 से अधिक हमले हुए हैं।"
संसद से पत्र में बांग्लादेश की स्थिति का जिक्र करते हुए लिखा गया, "हम भारतीय संसद से बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ चल रही हिंसा को मान्यता देने और सांप्रदायिक हिंसा की इस लहर की निंदा करते हुए एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करने का आग्रह करते हैं...बांग्लादेशी अधिकारियों पर अपने हिंदू अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने और अपराधियों को जवाबदेह ठहराने के लिए दबाव डालने के लिए संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय निकायों के साथ सहयोग करें। बांग्लादेश में उत्पीड़न से भाग रहे हिंदुओं के लिए मानवीय सहायता और शरण विकल्पों के प्रावधान पर विचार करें।"
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