बांग्लादेश संकट पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में राहुल गांधी ने पूछे सवाल, जानिए विदेश मंत्री ने क्या दिया जवाब?
All Party Meeting: बांग्लादेश में इस वक्त स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बीच वहां की प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देखर देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। बांग्लादेश की स्थिति के बारे में चर्चा के लिए भारत में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई।
बांग्लादेश की स्थिति पर सर्वदलीय बैठक के दौरान राहुल गांधी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से तीन महत्वपूर्ण सवाल पूछे। यह बैठक हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद हुई। गांधी ने इस सत्ता परिवर्तन के कूटनीतिक परिणामों के बारे में सरकार की तत्काल और दीर्घकालिक रणनीतियों के बारे में पूछा।

नेता विपक्ष के सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जवाब दिया कि स्थिति बदल रही है और केंद्र सरकार अपने दृष्टिकोण को तदनुसार समायोजित करने के लिए इस पर बारीकी से नजर रख रही है।
कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ढाका में हाल ही में हुई घटनाओं में विदेशी ताकतें, खास तौर पर पाकिस्तान शामिल था। इस पर विदेश मंत्री ने कहा कि सरकार इस पहलू की जांच कर रही है, और ध्यान दिला रही है कि एक पाकिस्तानी राजनयिक बांग्लादेश की स्थिति को दर्शाने के लिए अक्सर अपने सोशल मीडिया डिस्प्ले पिक्चर को बदल रहा था।
राहुल गांधी के सवाल
बांग्लादेश मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक में, लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हमारी विदेश नीति के भविष्य के बारे में चिंता जताई, खासकर बांग्लादेश में हाल की घटनाओं के मद्देनजर।
सरकार की ओर से जानकारी दिए जाने के बाद राहुल गांधी ने राष्ट्रहित में उठाए गए कदमों के प्रति अपना समर्थन जताया। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या इस घटना में विदेशी ताकतें शामिल थीं। उन्होंने कहा कि वहां अल्पसंख्यकों की स्थिति एक महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है, उनकी संपत्तियों पर हमलों की रिपोर्टें हैं।
बांग्लादेश की स्थिति पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया
जयशंकर ने आश्वासन दिया कि भारत बांग्लादेश में हो रहे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि नई दिल्ली ने ऐसे नाटकीय बदलावों की उम्मीद नहीं की थी, लेकिन अब वह स्थिति पर सक्रिय रूप से नजर रख रहे हैं। सरकार ने सांसदों को यह भी बताया कि कैसे प्रदर्शनकारियों द्वारा उनके आवास पर हमला किए जाने के बाद वहां से भाग कर शेख हसीना भारत आ गईं।
शेख हसीना भारत में ही हैं और ब्रिटेन में राजनीतिक शरण मांग सकती हैं। केंद्र सरकार उन्हें नई दिल्ली के साथ उनकी पुरानी दोस्ती को देखते हुए अपने अगले कदम तय करने के लिए समय देने की योजना बना रही है। इस बीच, सरकार बांग्लादेश की सेना से संपर्क बनाए हुए है, जिसने अंतरिम सरकार की घोषणा की है।
विपक्ष का समर्थन और सरकार की कार्रवाई
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस संकट से निपटने के लिए मोदी सरकार के प्रयासों को अपना पूरा समर्थन व्यक्त किया है। बैठक के बाद, जयशंकर ने इस सर्वसम्मत समर्थन की सराहना करते हुए एक्स पर पोस्ट किया, "बांग्लादेश में चल रहे घटनाक्रम के बारे में आज संसद में सर्वदलीय बैठक को जानकारी दी। दिए गए सर्वसम्मत समर्थन और समझ की सराहना करता हूं।"
केंद्र ने सभी पार्टी सांसदों को बांग्लादेश में संकट की पृष्ठभूमि और मौजूदा हालात के बारे में जानकारी दी। उन्होंने चर्चा की कि कैसे शेख हसीना हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच भागने में सफल रहीं और भारत में शरण ली। सरकार ने शेख हसीना की स्थिति पर प्रतिक्रिया देने के लिए अपनी योजनाओं को भी साझा किया।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं
बांग्लादेश में करीब 20,000 भारतीय नागरिक रह रहे हैं, जिनमें से करीब 8,000 पहले ही भारत लौट चुके हैं। सरकार अपने उच्चायोग के जरिए उनसे संपर्क बनाए हुए है। इसके अलावा, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की रिपोर्ट पर भी केंद्र नजर रख रहा है।
बैठक के बाद कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भारत की प्राथमिक चिंताओं को उजागर करते हुए कहा, "बांग्लादेश में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सीमा सुरक्षा हमारी मुख्य प्राथमिकताएं हैं।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या विपक्ष इस बात से संतुष्ट है कि सरकार स्थिति से कैसे निपट रही है, तो उन्होंने कहा, "यह तथ्य कि विदेश मंत्री ने सभी पार्टी नेताओं को जानकारी दी, एक बहुत ही स्वागत योग्य कदम है। और जहां तक राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है, हम सरकार के साथ हैं।"
इस महत्वपूर्ण बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए। उन्होंने शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने से पहले की घटनाओं के बारे में जानकारी दी और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए चल रहे प्रयासों पर चर्चा की।












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