'पोरिबोर्तन' का दावा करने वाली सरकार के राज्‍य में मजबूत आतंकी संगठन

कोलकाता। तीन वर्ष पहले यानी वर्ष 2011 में जब मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने 30 वर्ष पुरानी कम्‍यूनिस्‍ट पार्टी को उखाड़कर राज्‍य की सत्‍ता हासिल की थी। दीदी ने राज्‍य में पोरिबोर्तन यानी बदलाव लाने के दावे की वजह से सत्‍ता हासिल की थी।

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राज्‍य में बदलाव हुआ हो या न हुआ हो लेकिन बांग्‍लादेश के एक आतंकी संगठन को जरूर मजबूती देकर सरकार ने उसके स्‍वरूप में बदलाव जरूर ला दिया है। जिस संगठन की कमर पड़ोसी मुल्‍क बांग्‍लादेश ने तोड़ दी थी, उसे दीदी के राज्‍य में आकर अपनी खोई ताकत वापस मिल गई है।

बांग्‍लादेश में सख्‍ती, बंगाल में नरमी

बांग्‍लादेश का जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्‍लादेश वर्ष 2006-2007 में उस समय पूरी तरह से खत्‍म हो चुका था जब वहां की सरकार ने बुरी तरह से इस संगठन
के खिलाफ कार्रवाई की और इस पर लगाम लगाई।

इसका नतीजा था कि 2500 मॉड्यूल वाला यह आतंकी संगठन सिर्फ 130 मॉड्यूल पर सिमट गया। इसके बाद इस संगठन ने पश्चिम बंगाल में अपने संपर्कों के सहारे जमात-ए-इस्‍लामी के तौर पर कदम रखा।

जेएमबी जिसका नाम नेशनल इनवेस्टिगेटिंग एजेंसी यानी एनआईए की ओर से भी लिया गया है, उसके पास इस समय 280 ऑपरेटिव्‍स के साथ ही 56 मॉड्यूल्‍स तो हैं ही। सिर्फ इतना ही नहीं संगठन 600 बम बनाने की क्षमता भी रखता है।

पश्चिम बंगाल सरकार की लापरवाही

वर्ष 2010 में संगठन के सिर्फ चार मॉड्यूल बचे थे और सिर्फ 20 ऑपरेटिव्‍स ही मौजूद थे। संगठन को बांग्‍लादेश सरकार ने खत्‍म करने में कोई कसर नहीं छोड़ी
थी।

लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार के लापरवाह नजरिए और बर्ताव की वजह से मानों इस संगठन को नई सांस मिल गई है। यहां तक कि इंटेलीजेंस ब्‍यूरो यानी
आईबी ने भी पिछले चार वर्षों के दौरान 16 बार इस संगठन पर नकेल करने की कोशिशें की हैं।

पिछले चार वर्षों के दौरान संगठन की गतिविधियां जब अनियंत्रित होती गईं तो बांग्‍लादेश सरकार की ओर से भी रिपोर्ट मांगी गई।

यहां तक कि अब केंद्र सरकार ने भी फैसला कर लिया है कि वह अपने सीनियर सुरक्षा अधिकारियों को बर्दवान ब्‍लास्‍ट के रिव्‍यू के लिए भेजेगी। इसी के तहत जहां शुक्रवार को एनआईए के निदेशक

शरद कुमार ने सुरक्षा का जायजा लिया तो वहीं सोमवार को एनएसए अजित डोवाल राज्‍य के दौरे पर पहुंचने वाले हैं। डोवाल के साथ रॉ और आईबी के प्रमुख भी मौजूद रहेंगे।

कैसे पहुंचा बंगाल

जेएमबी जिसका बांग्‍लादेश की सरकार के साथ अक्‍सर ही टकराव होता रहा है, वह लगभग वहां पर सरकार के प्रयासों की वजह से खत्‍म हो चुका था। संगठन को जमात-ए-इस्‍लामी की ओर से मदद मिली।

बांग्‍लादेश की आवामी लीग को बाहर करने के मकसद से ही दोनों संगठन काम करते हैं। वर्ष 2009 में तो आवामी लीग को बांग्‍लादेश से बाहर करने की योजना भी तैयार कर ली गई थी।

जमात-ए-इस्‍लामी ने जेएमबी को आर्थिक मदद दी ताकि वह राज्‍य में अपना संचालन स्‍थापित कर सके।

एनआईए और आईबी की रिपोर्ट

जमात के लिंक सिमी से रहे हैं और एक भारतीय आतंकी संगठन की ओर से भी जेएमबी को काफी मदद मिली। वर्ष 2010 में संगठन ने 10 व्‍यक्तियों के साथ पश्चिम बंगाल में दो मॉड्यूल स्‍थापित किए।

अपने मॉड्यूल्‍स के लिए संगठन ने लोगों की घुसपैठ भी की और वर्ष 2014 में अकेले इस संगठन ने 109 लोगों को बाहर भेजा है। इसके अलावा इस संगठन ने 1109 घुसपैठियों को भारत में घुसपैठ कराई हैं।

यह सभी लोग बांग्‍लादेश के रहने वाले हैं। आईबी और एनआईए की ओर से दो रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी गई हैं। इन रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है।

सरकार को मालूम था सारा प्‍लान

जमात-ए-इस्‍लामी ने पश्चिम बंगाल में मौजूद राजनीतिक समर्थन का जमकर प्रयोग किया गया और एनआईए और आईबी की मानें तो राज्‍य की सरकार बखूबी इस बात को जानती थी।

इस बात के भी संकेत मिले हैं कि कुछ वरिष्‍ठ नेताओं ने जेएमबी को राज्‍य में संचालन शुरू करने में काफी मदद की लेकिन वह अपना नाम कभी जाहिर नहीं होने देना चाहते थे।

इन वरिष्‍ठ नेताओं की ओर से स्‍थानीय नेताओं को सलाह दी गई थी कि वह संगठन की मदद करें लेकिन इन वरिष्‍ठ नेताओं का नाम बीच में नहीं आना चाहिए।

सरकार ने इसके बदले सरकारी जमीन संगठन को दे दी ताकि वह इन जमीन पर गैरकानूनी मदरसे शुरू कर सकें। साथ ही वह संगठन की मॉडेस ऑपरेंडी का हिस्‍सा भी बने।

अनीरुसुल नाम का एक ऑपरेटिव लगातार इन नेताओं के संपर्क में था। इन नेताओं के घरों को किराए पर दिया गया ताकि किसी भी तरह के विवाद से
बचा जा सके।

भारत में बन रहा था बांग्‍लादेश पर हमले का प्‍लान

वर्ष 2014 तक जेएमबी ने पूरे पश्चिम बंगाल में करीब 53 मॉड्यूल्‍स को सेट करने में सफल‍ता हासिल कर ली थी। साथ ही उसने 500 बम बनाने का प्रस्‍ताव
भी तैयार किया जिनके जरिए बांग्‍लादेश में आतंकी हमलों को अंजाम दिया जा सके।

आईबी और एनआईए की ओर से हो रही पड़ताल में भी इस बात का पता लगा है कि जेमएबी को जमात-ए-इस्‍लामी की ओर आर्थिक मदद हासिल हुई थी। जमात की एक स्‍थानीय शाखा की वजह से संगठन ने स्‍थानीय नेताओं के साथ अपने संपर्क को मजबूत किया।

सुरक्षा एजेंसियों की ओर से संगठन के सदस्‍यों से पूछताक्ष में उनके आक्रामक रवैये का पता भी लगा है। एजेंसियों की मानें तो सदस्‍यों का आक्रामक रवैया पूरे घटनाक्रम पर पर्दा डालने के लिए था।

कहां से मिलता था पैसा

एनआईए के मुताबिक जेएमबी ने कई तरीकों को प्रयोग कर अपने लिए पैसा जुटाया था। पश्चिम बंगाल मे बिना रोक टोक के संगठन के लिए पैसा आता रहा और इस पर कभी किसी ने भी ध्‍यान नहीं दिया।

वर्ष 2012 और 2013 में संगठन को एक बड़ी धनराशि हाथ लगी जिसके बारे में सरकार की ओर से कोई जांच ही नहीं की गई।

संगठन ने यह पैसा सऊदी अरब में हुंडी, बांग्‍लादेश में खेती पर लगने वाले टैक्‍स और बांग्‍लादेश के एक बैंक में जमा घोटाले की धनराशि के जरिए हासिल किया था। एनआईए के एक अधिकारी की ओर से इस बारे में जानकारी दी गई।

सरकार का लापरवाह नजरिया

इंटेलीजेंस ब्‍यूरों के एक अधिकारी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल सरकार के टालने वाले रवैये की वजह से ही इस संगठन को एक नई जान मिल सकी।

वर्ष 2006 में 2500 मॉड्यूल वाला जेएमबी सख्‍ती के चलते सिर्फ 130 मॉड्यूल पर सिमटकर रह गया था। फिर जमात-ए-इस्‍लामी के साथ मिलकर संगठन ने पश्चिम बंगाल में अपना आधार बना डाला।

इस संगठन को मजबूती देने में कुछ हद तक महिलाओं का रोल भी काफी अहम है। संगठन की महिलाएं युवाओं को अपने जाल में फंसाकर उनसे शादी करती और फिर उन्‍हें संगठन में शामिल करा देती।

वह इस बात को सुनिश्चित करतीं कि सारे मॉड्यूल्‍स आपस में एक परिवार की तरह ही जुड़े रहें। जेएमबी हमेशा इस रणनीति पर काम करता जिसमें वह परिवार के सदस्‍यों को शामिल करता ताकि सबके काम करने का तरीका एक ही रहे।

इंटेलीजेंस एजेंसियों के पास बांग्‍लादेश का डॉजियर

भारतीय इंटेलीजेंस एजेंसियों के पास डॉजियर है जिसे बांग्‍लादेश की नेशनल सिक्‍योरिटी एजेंसी ने तैयार किया है। इस डॉजियर के मुताबिक पिछले चार वर्षों के दौरान जमात के कई सदस्‍यों ने पश्चिम बंगाल के कई स्‍थानीय नेताओं के साथ मुलाकात की थी।

इस डॉजियर में जमात के सदस्‍यों और जेएमबी के बीच भी सांठगांठ होने की बात कही है। डॉजियर की मानें तो दोनों ही संगठन सिर्फ आवामी लीग के खिलाफ अपने एक ही मकसद को पूरा करने के लिए साथ आए हैं। साथ ही इस डॉजियर में यह बात भी कही गई है कि पश्चिम बंगाल में सिमी के कई सदस्‍य मौजूद हैं।

अल कायदा का भी मिला साथ

जमात और जेएमबी को आवामी लीग को बांग्‍लादेश से बाहर करने के मकसद को पूरा करने के लिए अल कायदा का भी साथ मिला था। अल कायदा की हालिया मैगजीन में भी इस बात का जिक्र किया गया है।

अल कायदा ने अपनी मैगजीन में लिखा है कि आवामी लीग पूरी तरह से एक हिंदु राष्‍ट्र के निर्माण के लिए जिम्‍मेदार है। ऐसे में अब समय आ गया है जब इसको बांग्‍लादेश से बाहर फेंक दिया जाए।

अल कायदा की ओर से कहीं गईं यह सारी बातें इस संगठन की उम्‍मीद के मुताबिक ही हैं और यह संगठन बांग्‍लादेश में एक द्वाह का संचालन करता है ताकि किसी भी तरह से बांग्‍लादेश में उसकी मौजूदगी पूरी तरह से खत्‍म न हो।

जमात और सिमी दोनों ही अल कायदा के साझीदार हैं और इन्‍होंने एशिया उपमहाद्वीप में अल-जिहाद नाम के एक संगठन को भी तैयार कर लिया है।

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