Balasore Train Accident: ओडिशा पुलिस का दावा- सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास हुआ
ओडिशा के बालासोर में ट्रेन हादसा 275 लोगों की जिंदगी लील गया, लेकिन आपदा के इस समय में भी घृणा से भरे कई सोशल मीडिया यूजर्स ने एक्सिडेंट को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास किया।

Balasore Train Accident के बाद एक तरफ मानवता को गौरवान्वित करने वाले मददगार लोग उभरे तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर तुच्छ मानसिकता वाले लोगों ने इसे सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास भी किया।
ओडिशा पुलिस ने बताया है कि कुछ सोशल मीडिया अकाउंट बालासोर जिले में हुए भीषण ट्रेन हादसे को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं। पुलिस ने जनता से बालासोर दुर्घटना के बारे में इस तरह के "भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण पोस्ट" साझा करने से परहेज करने का अनुरोध किया।
ओडिशा पुलिस के अनुसार, शुक्रवार शाम को 2 यात्री ट्रेनों और एक मालगाड़ी की टक्कर और पटरी से उतर जाने को इन सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा दुर्भावनापूर्ण रूप से सांप्रदायिक रूप दिया गया था।
राज्य पुलिस ने रविवार को कहा कि ओडिशा पुलिस ने एक बयान में कहा, "यह देखने में आया है कि कुछ सोशल मीडिया हैंडल शरारती तरीके से बालासोर में हुए दुखद ट्रेन हादसे को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।"
पुलिस ने यह भी कहा कि झूठे और दुर्भावनापूर्ण सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से समुदायों को एक दूसरे के खिलाफ भड़काने की कोशिश करने वाले के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के अनुसार, राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) दुर्घटना की जांच करने और मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। बता दें कि शुक्रवार को ट्रिपल ट्रेन दुर्घटना में बालासोर के बहनगा बाजार स्टेशन पर तीन अलग-अलग पटरियों पर बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस, कोरोमंडल एक्सप्रेस और मालगाड़ी शामिल थी।
इससे पहले, रविवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दुर्घटना "इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव" के कारण हुई। बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नल तंत्र की व्यवस्था है जो पटरियों की व्यवस्था के माध्यम से ट्रेनों के बीच टकराव रोकता है।
इंटरलॉकिंग मूल रूप से संकेतों को अनुचित क्रम में बदलने से रोकने के लिए एक सुरक्षा उपाय है। इस प्रणाली का उद्देश्य यह है कि किसी भी ट्रेन को तब तक आगे बढ़ने का संकेत नहीं मिलता जब तक कि मार्ग सुरक्षित साबित न हो जाए।
बालासोर हादसे के संबंध में ओडिशा के मुख्य सचिव प्रदीप जेना ने स्पष्ट किया कि मरने वालों की संख्या 288 से संशोधित कर 275 कर दी गई है। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू के दौरान भूल से कुछ शवों की दो बार गिनती कर ली गई थी।
उन्होंने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) ने मृतकों की संख्या की फिर से जाँच की। 88 शवों की पहचान की जा चुकी है। 1,175 घायलों में से 793 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।"
रेल मंत्रालय के अनुसार, क्षतिग्रस्त पटरियों की बहाली के लिए 1000 से अधिक श्रमिकों को लगाया गया। 7 से अधिक पोकलेन मशीनें, दो दुर्घटना राहत ट्रेनें और 3-4 रेलवे और सड़क क्रेन की मदद से 51 घंटे में सेवाएं बहाल हो गईं।












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