अयोध्या राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा भारतवर्ष के 'पुनर्निर्माण' की शुरुआत, RSS प्रमुख का इशारा किधर है?
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह भारतवर्ष के पुनर्निर्माण के अभियान की शुरुआत का प्रतीक है।
रविवार को आरएसएस की वेबसाइट पर पोस्ट किए गए अपने एक लेख में भागवत ने लिखा है कि इस विवाद को लेकर 'संघर्ष और कड़वाहट' अब निश्चित ही खत्म होनी चाहिए।

15 दशकों की कानूनी लड़ाई के बाद सुलझा मामला
दशकों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अयोध्या में विवादित जमीन पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हुआ है। इसने यूपी सरकार से मस्जिद बनाने के लिए भी अलग से जमीन देने का आदेश दिया था।
अब सारा विवाद और कड़वाहट खत्म होनी चाहिए- संघ प्रमुख
संघ प्रमुख का कहना है कि पूरा समाज भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में स्वीकार करता है। उन्होंने लिखा है, 'इसीलिए अब इस संघर्ष के पक्ष और विपक्ष में जो विवाद पैदा हुआ है, उसे खत्म कर देना चाहिए। इस दौरान जो कड़वाहट पैदा हुई है, उसे भी खत्म होना चाहिए। समाज के प्रबुद्ध लोगों को यह देखना होगा कि विवाद पूरी तरह समाप्त हो।'
भारतवर्ष के पुनर्निर्माण के अभियान का आरंभ- मोहन भागवत
उनके मुताबिक अयोध्या में मंदिर का निर्माण 'राष्ट्रीय गौरव का पुनर्जागरण है'। उनके अनुसार, 'श्रीराम लला का राम जन्मभूमि में प्रवेश और उनकी प्राण प्रतिष्ठा भारतवर्ष के पुनर्निर्माण के अभियान का आरंभ है, जो सबके कल्याण के लिए है और जो बिना शत्रुता के सभी को स्वीकार करने और सद्भाव, एकता, प्रगति और शांति का मार्ग दिखाता है।'
संघ प्रमुख का इशारा किधर है?
आरएसएस केंद्र और यूपी में सत्ताधारी बीजेपी का वैचारिक अगुवा संगठन है। भारत को 'परम वैभव' प्राप्त कराना इसका लक्ष्य रहा है, जिसमें भारतवर्ष और अखंड भारत जैसे विचार शामिल हैं। भारत को विश्वगुरु का दर्जा दिलाना भी इसके मंसूबों में शामिल रहा है।
'राष्ट्र-समाज का मनोबल तोड़ने के लिए धर्म स्थान नष्ट किए गए'
उन्होंने कहा है कि भारत का इतिहास आक्रमणों से भरा पड़ा है। उनके मुताबिक इस्लाम के नाम पर पश्चिम के हमलों ने समाज को पूरी तरह से तबाह किया है।
उन्होंने लिखा है, 'राष्ट्र, समाज के मनोबल को तोड़ने के लिए धार्मिक स्थानों को तबाह करना आवश्यक था। इसलिए विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत में मंदिरों को भी नष्ट किया। उन्होंने यह कई बार किया।'
उनका कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर को भारतीय समाज का मनोबल तोड़ने के लिए नष्ट किया गया। लेकिन, फिर भी समाज ने अपना प्रतिरोध जारी रखा।
उन्होंने कहा है, 'समाज झुका नहीं और उनका संघर्ष और प्रतिरोध जारी रहा। इसलिए जन्मभूमि (भगवान राम के) पर नियंत्रण पाने और वहां (अयोध्या) मंदिर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए गए।'
संघ प्रमुख के अनुसार, 'उनके लिए (भगवान राम) अनेक युद्ध, संघर्ष बलिदान हुए; और राम जन्मभूमि का मामला हिंदू जनमानस में घर कर गया।'












Click it and Unblock the Notifications