Lok Sabha Election 2024: बीजेपी के हाथ लगा तीसरा 'अचूक' हथियार! UCC पर यूं किया मेगा प्लान तैयार

2024 के लोकसभा चुनावों में पहली बार भारतीय जनता पार्टी अपने सभी तीन प्रमुख वादों को पूरा कर लेने के दावे के साथ दंगल में उतरने की तैयारी कर रही है।

अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का निर्माण, जम्मू और कश्मीर से आर्टिकल 370 की समाप्ति और यूनिफॉर्म सिविल कोड दशकों से बीजेपी के घोषणापत्र का आधार रहा है।

ucc ram temple article 370

तीनों मूल वादों को पूरा करने का दावा कर सकती है बीजेपी
अगले साल ऐसा पहला चुनाव होगा, जब बीजेपी मतदाताओं के पास इस दावे के साथ पहुंचेगी कि उसने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अपने तीनों मूल संकल्पों को पूरा कर लिया है। इससे पार्टी को अपने समर्थकों के बीच यह नरेटिव पेश करने में मदद मिलेगी कि वह जो कहती है, करके भी दिखाती है।

'मोदी की गारंटी' से सेट होगा चुनावी एजेंडा!
कांग्रेस की चुनावी गारंटियों की काट में हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 'मोदी की गारंटी' को चुनाव प्रचार का थीम बनाया था और उसे इसमें सफलता भी मिली है। पार्टी को अपनी इस चुनावी थीम को आगे बढ़ाने के लिए आने वाले दिनों में खुला मैदान मिलने जा रहा है।

अगले महीने 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम लला के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके मुख्य अतिथि होंगे। पूरा संघ परिवार इसे ऐतिहासिक समारोह बनाने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा है।

उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की तैयारी!
इसी महीने सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल-370 खत्म करने के मोदी सरकार के फैसले पर मुहर लगाकार बीजेपी का बहुत बड़ा राजनीतिक डर खत्म कर चुका है। अब पार्टी अपने तीसरे मूल एजेंडे यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को अमलीजामा पहनाने को तैयार है।

उत्तराखंड के बाद 10 और राज्यों में शुरू हो सकती है यूसीसी की प्रक्रिया
जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड सरकार अगले महीने ही यूसीसी लागू करने की तैयारियों में जुटी है। चुनावी साल में बीजेपी इसे पूरे देश के लिए एक उदाहरण के तौर पर पेश करने वाली है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक यह विषय संविधान के समवर्ती सूची में है, इसलिए केंद्र सरकार इसे एकसाथ राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के बजाए, राज्यों पर छोड़ना चाहती है।

पार्टी नेता के अनुसार, '...हमारी पार्टी उन 10 राज्यों में भी जहां हमारी सरकारें हैं, वहां यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।' मतलब, उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद बीजेपी इसे यूपी, एमपी, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, छत्तीसगढ़, मणिपुर, त्रिपुरा, असम और महाराष्ट्र में भी इसे आगे बढ़ाना चाहेगी।

यूसीसी पर जनमत जुटाने की भी कोशिशों में जुटेगी भाजपा
उत्तराखंड में लागू होते ही बीजेपी लोगों के बीच पहुंचकर उन्हें यह समझाने में जुट जाएगी कि देश के सभी नागरिकों के लिए कानून एक तरह का होना चाहिए, इसमें धर्म के आधार पर भेदभाव उचित नहीं है। पार्टी को यकीन है कि इस पर जनता की प्रतिक्रिया सकारात्मक होगी और इसका विरोध करना पार्टियों को भारी पड़ सकता है।

पार्टी के उस नेता के मुताबिक, 'हमें स्थानीय परंपराओं को लेकर संवेदनशील रहना होगा, लेकिन शादियों में एक समानता बनानी पड़ेगी।' पार्टी को लगता है कि जनता की राय शामिल करने से इस कानून को बेहतर बनाने और सही तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में कहा था, 'यूसीसी पर हमने एक कमेटी बनाई है। हमें जैसे ही रिपोर्ट मिल जाती है, राज्य में बिना देर किए यूसीसी लागू की जाएगी।'

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जानकारी के मुताबिक हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी कह चुके हैं कि फरवरी में होने वाले विधानसभा सत्र में बहुविवाह पर रोक लगाने वाला विधेयक पास कराएंगे और इसके साथ ही यूसीसी की प्रक्रिया भी लाइन पर आ जाएगी।

मतलब, साफ है कि लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी ने अपने तीनों कोर एजेंडे वाले वादे पूरा कर लेने को मुद्दा बनाकर भुनाने की तैयारी कर ली है।

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