Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर के लिए संघर्ष करते हुए खपा दिया जीवन, जानिए कौन हैं चंपत राय?
Ram Mandir Trust Champat Rai: राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा आज पूरी हो गई है। 500 सालों से भी ज्यादा का इंतजार आज पूरा हो गया है। रामलाल की प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर आज पूरे देश में उत्सव का माहौल है। देशभर में लोग दीपोत्सव मना रहे हैं। लेकिन राम मंदिर का सपना जो आप पूरा हुआ है, वो इतना आसान नहीं था। दशकों तक राम मंदिर के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी गई है।
राम मंदिर के लिए सैकड़ों लोगों ने संघर्ष किया है, जिसमें एक चंपत राय भी हैं, जो कि 'राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के महासचिव है। उन्होंने अपना पूरा जीवन इसी मंदिर के लिए संघर्ष करते हुए खपाया है। ऐसे में जो लोग नहीं जानते कि चंपत राय कौन है, पढ़िए उनके बारे में?

9 स्थाई सदस्यों में से एक चंपत राय
चंपत राय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव हैं। इसी के साथ वो विश्व हिंदू परिषद (VHP) के उपाध्यक्ष भी हैं। साल 2020 में राम मंदिर का निर्माण शुरू होने के दौरान उन्हें मंदिर ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त किया गया था। वो 15 सदस्य वाले राम मंदिर ट्रस्ट में 9 स्थाई सदस्यों में से एक हैं।
मंदिर आंदोलन से प्राण प्रतिष्ठा तक अहम योगदान
चंपत राय का राम मंदिर आंदोलन से लेकर राम मंदिर के निर्माण से लेकर अब प्राण प्रतिष्ठा तक अहम योगदान रहा है। चंपत राय अविवाहित हैं। मूल रूप से यूपी के बिजनौर स्थित नगीना कस्बे के सरायमीर मोहल्ले के रहने वाले हैं। उनके पिता का नाम रामेश्वर प्रसाद बंसल और माता का नाम सावित्री देवी था।
युवावस्था में ही बन गए थे संघ के पूर्णकालिक सदस्य
18 नवंबर 1946 को जन्मे चंपत राय अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से प्रभावित होकर युवावस्था में ही संघ के पूर्णकालिक सदस्य बन गए। इसके बाद वह धामपुर के आरएसएम डिग्री कॉलेज में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर बन गए।
आपातकाल में हुए गिरफ्तार
बताया जाता है कि 25 जून 1975 को जब देश में आपातकाल लगा तब चंपत राय आरएसएम कॉलेज, धामपुर में प्रवक्ता थे। इस दौरान पुलिस जब उन्हें गिरफ्तार करने कॉलेज पहुंची तो वह प्रिंसिपल के रूम में बुलाए गए। उस वक्त चंपत कॉलेज में विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे।
18 महीने काटी जेल
उस वक्त उन्होंने पुलिस से कहा था किवो घर से कपड़े लेकर सीधे कोतवाली पहुंचेंगे। और फिर अपने कहे मुताबिक उन्होंने किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। जेल में उनके 18 महीने गुजरे। इमरजेंसी खत्म होने के बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया।
साल 1980-81 में चंपत राय ने नौकरी से अपना इस्तीफा दे दिया और वो RSS के प्रचारक बन गए। पहले देहरादून, सहारनपुर में प्रचारक रहे। फिर वर्ष 1985 में मेरठ के विभाग प्रचारक रहे। 1986 में संघ के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें विश्व हिंदू परिषद में प्रांत संगठन मंत्री बनाकर भेज दिया।
अयोध्या आकर यहीं के हो गए चंपत राय
जानकारी के अनुसार साल 1991 में चंपत राय को क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर अयोध्या भेजा गया था। इसके बाद 1996 में वो विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री बनाए गए। फिर 1996 में विहिप ने उन्हें संगठन का केंद्रीय मंत्री बनाया। 2002 में संयुक्त महामंत्री और फिर अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बनाए गए। चंपत राय अविवाहित हैं और अपने घर ना के बराबर ही आते-जाते हैं।
राम मंदिर कानूनी लड़ाई के मुख्य पैरोकार
चंपत राय ने अदालत में चली राम मंदिर को लेकर लंबी लड़ाई में अहम शख्स रहे हैं। वो सुनवाई में मुख्य पैरोकार और पक्षकार रहे थे। इसके अलावा उनका राम जन्मभूमि के पक्ष में अहम साक्ष्य जुटाने और सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने में भी बड़ी भूमिका रही। इसके अलावा राम मंदिर भूमिपूजन समारोह से लेकर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम तक का प्रबंधन उन्होंने ही किया था। राम मंदिर निर्माण कार्य भी उनकी देेखरेख में पूरा हुआ है।












Click it and Unblock the Notifications