'अटल बिहारी वाजपेयी को मैं दद्दा कह के बुलाती थी, वो मुझे बेटी कहते थे'

नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अब हमारे बीच नहीं हैं। उनके निधन से देशभर में शोक की लहर है। आम हों या खास हर वर्ग के लोग उन्हें अपने अंदाज में याद कर रहे हैं। इसी कड़ी में स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने भी अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर गहरा शोक जताया है। लता मंगेशकर ने कहा ऐसा लग रहा जैसे मैंने एक बार फिर से अपने पिता को खो दिया है। अटल जी हृदय से कवि थे और स्वभाव से साधु। मुझे ऐसा लगता है जैसे आज एक साधु पुरुष चला गया। वो बहुत अच्छे लेखक और कवि थे। उनका भाषण सुनने के लिए लोग तरसते थे।

लता बोलीं- वह मेरे पिता की तरह थे

लता बोलीं- वह मेरे पिता की तरह थे

लता मंगेशकर ने कहा कि वह मेरे पिता की तरह थे। वो मुझे बेटी बुलाते थे और मैं उन्हें दद्दा कहके बुलाती थी। जब भी उनके चेहरे की चमक को देखती, उनकी प्रेरक व्याख्यात्मक शक्ति और कला को लेकर उनका प्यार, मुझे हमेशा अपने पिता (जादीनानाथ मंगेशकर) की याद दिलाती थी। वो एक महान आत्मा थे।

'अटलजी के निधन की खबर सुनकर ऐसा लगा जैसे पहाड़ टूट पड़ा हो'

'अटलजी के निधन की खबर सुनकर ऐसा लगा जैसे पहाड़ टूट पड़ा हो'

88 वर्षीय लता मंगेशकर ने ट्वीट के जरिए अपनी श्रद्धांजलि अटल बिहारी वाजपेयी को दी। उन्होंने लिखा कि अटलजी के निधन की खबर सुनकर ऐसा लगा जैसे पहाड़ टूट पड़ा हो। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे। उन्होंने कहा कि 1942 में मेरे पिता की मृत्यु हुई थी, आज उतना ही बड़ा धक्का लगा। इसका मुझे बहुत दुख है।

जब मैंने पिता के नाम पर अस्पताल के उद्घाटन के लिए अटल जी को बुलाया

जब मैंने पिता के नाम पर अस्पताल के उद्घाटन के लिए अटल जी को बुलाया

पुरानी यादों का जिक्र करते हुए लता मंगेशकर ने कहा कि जब हमने अपने पिता के नाम पर अस्पताल खोला तो इसके उद्घाटन के लिए मैंने अटल बिहारी वाजपेयी को बुलाने की योजना बनाई। जैसे ही मैंने उन्हें इसके लिए आमंत्रित किया वो तुरंत तैयार हो गए। उद्घाटन समारोह में अटलजी आए और उन्होंने कार्यक्रम के अंत में अपना भाषण दिया।

'भारतीय राजनीति में उनके जैसा कोई वक्ता नहीं था'

'भारतीय राजनीति में उनके जैसा कोई वक्ता नहीं था'

इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि आपका अस्पताल अच्छा चले मैं ऐसा आपसे ऐसा नहीं कह सकता। अगर मैं ऐसा कहता हूं तो इसका मतलब होगा कि लोग ज्यादा बीमार पड़ें। लता मंगेशकर ने कहा कि इस टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि आखिर इस पर अब मैं क्या कहती। उनका भाषण आर्ट की तरह काम करती थी और भारतीय राजनीति में उनके जैसा कोई वक्ता नहीं था।

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