कोच बनें मोदी तो भाजपा को मिली 4-0 की बढ़त
हालांकि भाजपा की चार राज्यों में संभावित जीत को 2014 की सफलता की गारंटी नहीं माना जा सकता है, 2003 में दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हुए चुनावों में कांग्रेस सिर्फ दिल्ली में ही जीत हासिल कर सकी थी तीन राज्यों में भाजपा की सफलता के बाद भी जनता ने अप्रत्याशित जनादेश देते हुए केंद्र में कांग्रेस को नेतृत्व में चुना। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अब के हालात भाजपा के लिए पहले से बेहतर हैं, पिछले दस साल में यूपीए के शासन में हुए घोटालों और अर्थव्यवस्था के कमजोर होने से यूपीए पर सवाल उठने लगे हैं, वहीं कांग्रेस महंगाई, प्रशासन जैसे आम जनता के मोर्चे पर भी नाकाम रही है। अगर अन्य घटनाक्रमों की बात करें तो जनलोकपाल के लिए अन्ना हजारे के आंदोलन और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी केंद्र सरकार बैकफुट पर ही नजर आ रही है।
प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद मोदी भाजपा के कोच के रूप में नजर आ रहे है, कांग्रेस नेताओं के बयानों से भी यही जाहिर होता है कि मोदी ने भाजपा को टेकओवर कर लिया है। ऐसे में राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में जीतने की स्थिति में मोदी के सिर ही जीत का सेहरा बंधेगा, जो कि उनके प्रमुख प्रतिद्वंदियों नीतीश कुमार, मुलायम सिंह यादव, मायावती, वामदल और खुद कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका होगा। जबकि भाजपा की संभावित सहयोगियों ममता बनर्जी, नवीन पटनायक, जयललिता, चंद्र बाबू नायडू और राज ठाकरे के लिए केंद्र में होने वाली बड़ी भूमिका के स्क्रिप्ट तैयार करेगा।
इन एक्जिट पोल के परिणामों के आधार पर कहा जा सकता है कि जनता ने कांग्रेस के साथ ही इसके युवा नेता राहुल गांधी को भी नकार दिया है जो कि अभी भी राजनीति में अपरिपक्व माने जा रहे हैं, यह ध्यान देने योग्य है राहुल ने चार प्रमुख राज्यों के विधानसभा चुनावों में कई रैलियां की थी लेकिन वह जनता का भरोसा नहीं जीत सके।













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