Punjab Assembly Election 2022: आखिरकार 'कैप्टन' बन ही गए सिद्धू लेकिन 'खफा' नेताओ संग सफर नहीं आसान
नई दिल्ली, 19 जुलाई। आखिरकार नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस की 'कप्तानी' मिल ही गई, हालांकि इसके लिए उन्हें काफी लंबा इंतजार करना पड़ा है। बता दें कि विधानसभा चुनावों से पहले उनको कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया है। जिसके बाद क्रिकेट के पिच से सियासत के अब तक के सफर में पहली बार सिद्धू को 'कप्तानी' का सौभाग्य हासिल हुआ है, पार्टी की ओर से इस बात का ऐलान रविवार को किया गया।
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आखिरकार 'कैप्टन' बन ही गए सिद्धू
सिद्धू की इस कामयाबी पर उनके समर्थकों ने खासा जश्न मनाया और नाच-गाकर से अपनी खुशी जाहिर की लेकिन अपने जीवन में 17 साल भारत के लिए क्रिकेट खेलने वाले सिद्धू की इस नई पारी का सफर उनके लिए आसान नहीं होगा। उनको ताज तो मिला है लेकिन इस ताज में कांटें काफी हैं।
पार्टी के कई वरिष्ठ नेता खुश नहीं
दरअसल सिद्धू की ताजपोशी से सीएम अमरिंदर सिंह समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता खुश नहीं है लेकिन चुनावों के मद्देनजर उन्हें कांग्रेस हाईकमान का फैसला मानने के लिए मजबूर होना पड़ा है। ऐसे में मन ना मिलने पर दोनों एक ही सफर में साथ कैसे चलेंगे, इसी पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं।

50 कांग्रेसी विधायकों से मिले सिद्धू
हालांकि सिद्धू ने पिछले दो दिनों के अंदर करीब 50 कांग्रेसी विधायकों से मुलाकात की है। उन्होंने तो कल कई विधायकों संग नाश्ता भी किया था तो वहीं बहुतों के घर जाकर उन्होंने हाल-चाल भी पूछा था और ये बताने की कोशिश की, वो सबको साथ लेकर काम करना चाहते हैं। हालांकि पार्टी के नेता कह रहे हैं कि दल में किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है लेकिन सिद्धू के नाम के ऐलान के ठीक पहले जिस तरह से कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा समेत 10 विधायकों ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के समर्थन में की, उससे साफ हो गया कि सिद्धू को लेकर अभी भी पार्टी में लोग एकमत नहीं हैं।

कांग्रेस के लिए 'सिद्धू' जरूरी
मालूम हो कि सिद्धू एक 'सेलिब्रिटी' हैं और उनकी एक लंबी फैन फॉलोइंग हैं, उनका होना पार्टी के लिए जरूरी है लेकिन उन्होंने जिस तरह से पार्टी के कलह को लेकर सार्वजनिक रूप से बयान दिया, उससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है और इसी वजह से पार्टी के कई बड़े नेता उनसे काफी खफा हैं।

कैसे साथ चलेंगे दो कैप्टन?
फिलहाल अपने खराब दौर से गुजर रही कांग्रेस पार्टी के लिए पंजाब का चुनाव काफी मायने रखता है, ऐसे में हाईकमान ने सिद्धू की मंशा पूरी करके एक तरह से आंतरिक कलह शांत करने की कोशिश की है लेकिन क्या इस बात का असर कैप्टन अमरिंदर सिंह पर नहीं हुआ है, ये ही सवाल सबके मन में कौंध रहा है। देखते हैं कि ये दोनों 'कैप्टन' किस तरह से सफर में आगे बढ़ते हैं और ये यात्रा कहां तक पहुंचती है?












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