जाते-जाते सोनिया गांधी के लिए बहुत बड़ा गिफ्ट छोड़ गए अरुण जेटली

नई दिल्ली- पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के दिग्गज चेहरा रहे अरुण जेटली के बारे एक बाद बेहद प्रचलित है कि राजनीतिक रिश्तों को अलग रख दें तो व्यक्ति संबंध उनके हर पार्टी के नेताओं से बने हुए थे। राजनीति ही नहीं समाज का ऐसा कोई वर्ग नहीं रहा, जिसमें जेटली ने अपनी छाप नहीं छोड़ी थी। लेकिन, वे जाते-जाते कांग्रेस की सबसे बड़ी नेता और पार्टी की मौजूदा अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक भविष्य के लिए भी अपनी तरफ से कोई बड़ा तोहफा छोड़कर जाएंगे, इसका अंदाजा तो शायद खुद सोनिया को भी नहीं रहा होगा। मगर यह बात पूरी तरह सच है। मौजूदा राजनीतिक विद्वेष के माहौल में भी वे अपने निधन से महज हफ्ते भर पहले ही सोनिया के गढ़ यानि रायबरेली संसदीय सीट के भविष्य को संवारने का काम कर गए हैं।

जेटली के सांसद फंड से होगा रायबरेली का विकास

जेटली के सांसद फंड से होगा रायबरेली का विकास

अरुण जेटली राज्यसभा में उत्तर प्रदेश से बीजेपी का प्रतिनिधित्व करते थे। इस नाते बतौर सांसद पूरे उत्तर प्रदेश के विकास पर ध्यान देने की भी उनकी जिम्मेदारी थी। पिछले शनिवार को उनके निधन के बाद खुलासा हुआ है कि अपनी मौत से ठीक एक हफ्ते पहले ही उन्होंने सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र के विकास की अपनी ओर से पहल की थी। जब जेटली एम्स में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे, तब भी उनकी ओर से रायबरेली जिला प्रशासन को क्षेत्र के विकास के लिए एक चिट्ठी लिखी गई थी। इस चिट्ठी में जेटली की ओर से रायबरेली में सौर ऊर्जा से जलने और ऊंचे खंभे वाले 200 लाइट्स लगाने का प्रस्ताव भेजा था। इसके लिए उन्होंने जिला प्रशासन को खुद के सांसद स्थानीय विकास निधि (एमपीएलएडी फंड) से फंड मंजूर करने की बात लिखी थी। गौरतलब है कि एक सांसद को सांसद स्थानीय विकास निधि (एमपीएलएडी फंड) के तहत 5 करोड़ रुपये आवंटित किए जाते हैं।

रायबरेली को रोशन करना जेटली की थी अंतिम इच्छा

रायबरेली को रोशन करना जेटली की थी अंतिम इच्छा

संभावना है कि जेटली ने जाते-जाते सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र के लिए जो सौगात छोड़ी है, उसके चलते रायबरेली के लोग इस साल की दिवाली ज्यादा उत्साह से मनाएंगे। रायबरेली के लोगों को तो लगता है कि रायबरेली का विकास उनकी अंतिम इच्छा थी, इसलिए वह अस्पताल के बेड से क्षेत्र के लिए इतना बड़ा योगदान करके गए हैं। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक रायबरेली के जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने कहा है कि , 'यह उनकी अंतिम इच्छा की तरह थी कि दिवाली से पहले रायबरेली रोशन हो जाए। इस प्रोजेक्ट को जिला ग्रामीण विकास एजेंसी के साथ तालमेल करके पूरा किया जाएगा। हम प्रोजेक्ट पर तेजी से काम करेंगे।' जिलाधिकारी की बातों से लगता है कि अब रायबरेली का अंधियारा जरूर दूर हो सकता है।

रायबरेली को ही क्यों चुना?

रायबरेली को ही क्यों चुना?

बता दें कि जब पिछले साल अक्टूबर में अरुण जेटली ने रायबरेली में एमपीलैड फंड से विकास की इच्छा जाहिर की थी, तब उसे सियासी चश्मे से देखा जा रहा था। क्योंकि, रायबरेली कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का संसदीय क्षेत्र ही नहीं, नेहरु-गांधी परिवार का गढ़ भी माना जाता रहा है। तब यही कयास लगाए जा रहे थे कि बीजेपी रायबरेली में भी विकास का नया नरेटिव सेट करने की कोशिश कर रही है। लेकिन, जब आज जेटली की असल मंशा सामने आई है, तब लग रहा है कि उन्होंने तो सिर्फ यूपी के सांसद होने के नाते अपनी जिम्मेदारी निभाने की सोची थी। जेटली के प्रतिनिधि हीरो बाजपेयी के अनुसार, '17 अगस्त को रायबरेली प्रशासन को उनकी सिफारिश सौंपी गई है।' उन्होंने ये भी कहा कि 'जिले के पिछड़ेपन के कारण जेटली जी ने रायबरेली को चुना था।'

सोनिया ने जेटली की पत्नी को लिखा था भावुक खत

सोनिया ने जेटली की पत्नी को लिखा था भावुक खत

इससे पहले सोनिया गांधी ने खुद जेटली को उनके घर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी थी। बाद में उन्होंने जेटली की पत्नी संगीता जेटली के ना एक भावुक पत्र भी भेजा था। पत्र में सोनिया ने जेटली की पत्नी को लिखा था कि 'मैं आपका दर्द समझ सकती हूं।' खत में उन्होंने कहा कि 'मैं आपके पति के निधन के बारे में सुनकर बहुत दुखी हूं।' उन्होंने लिखा कि जेटली ऐसी शख्सियत थे, जिनके दोस्त सभी राजनीतिक दलों और जीवन के हर क्षेत्र में थे। उन्होंने लिखा, 'उनकी तेज बुद्धि और संचार कौशल उनके हर कैबिनेट पद में दिखता था जिसपर वे रहे, चाहे राज्यसभा में विपक्ष के नेता की उनकी भूमिका हो या फिर वह सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील के रूप में हो।' सोनिया ने कहा कि क्रूर बीमारी से भी वे बड़ी हिम्मत के साथ अंतिम दम तक लड़ते रहे। 'उनका जाना इसलिए और भी दुखद है क्योंकि वे अभी युवा ही थे और उन्हें राष्ट्रीय जीवन में अभी और भी योगदान देना था।' उन्होंने लिखा कि 'इस पीड़ादायक क्षण में सांत्वना देने के लिए शब्द नहीं हैं, लेकिन मैं चाहती हूं कि जेटली की पत्नी, बेटे और बेटी इस बात को समझें की वह उनका दर्द समझ सकती हैं।'

रायबरेली को अमेठी बनाने की थी तैयारी?

रायबरेली को अमेठी बनाने की थी तैयारी?

वैसे एक राजनीतिक राय ये भी है कि पिछले कुछ वर्षों से बीजेपी ने अमेठी की तरह ही रायबरेली पर भी फोकस करना शुरू कर दिया था। पिछले दिसंबर महीने में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रायबरेली में मॉडर्न रेल कोच फैक्ट्री का लोकार्पण किया था। पीएम मोदी ने वहां के लिए सैकड़ों करोड़ों रुपयों की योजनाओं का सौगात देने का भी ऐलान किया था। जेटली ने भी पिछले हफ्ते जिस प्रस्ताव को वहां के जिलाधिकारी के पास भेजा है, उसकी योजना पिछले साल ही बन चुकी थी।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+