जम्मू-कश्मीर के रुके हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट अब होंगे पूरे
बंगलुरू। जम्मू और कश्मीर में धारा 370 और अनुच्छेद 35 ए हटने के बाद अब अधर में लटके हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट जल्द से जल्द पूरे होंगे। इससे हमारे देश में बिजली उत्पादन में अत्यधिक बढ़ोत्तरी होगी। सरकार जम्मू-कश्मीर में महत्वपूर्ण बिजली परियोजनाओं को गति देने में जुट गयी है। कश्मीर आतंकवाद और हिंसा के चलते भारत का अभिन्न अंग होने के बावजूद विकास में पिछड़ा हुआ था, लेकिन अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद अब विकास संबंधी योजनाओं को तेजी से बढ़ावा मिलेेगा।

370 हटने के बाद केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर की विकास संबंधी योजनाओं को अब सीधे संचालित कर रही है,जिससे वहां तेजी से विकास होने की संभावना जतायी जा रही है। मालूम हो कि जम्मू कश्मीर राज्य को मुख्य रूप से एनएचपीसी बिजली की सप्लाई करता है। ज्वाइंट वेंचर के तहत एनएचपीसी की सरकार के साथ 3814 मेगावाट बिजली उत्पन्न करके की योजना है, जो कि इस ऐतिहासिक फैसले के बाद संभव दिख रहा है।
इसके अंतर्गत एनएचपीसी चेनाब वैली पॉवर प्रोजेक्जेट्स लिमिटेड,जम्मू कश्मीर स्टेट पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड और देश के नंबर वन ट्रेडर साथ मिलकर ज्वाइंट वेंचर के तहत इस योजना को मूर्ति रूप देंगे। इसके तहत 800 मेगावाट का बरसर प्रोजेक्ट, 850 मेगावाट का रॉटेल समेत अन्य प्रोजेक्ट शामिल हैं।
NHPC के एक तिहाई बकाया धन का देनदार है जम्मू कश्मीर
एनएचपीसी का कई राज्यों पर कुल 443करोड़ रुपया बकाया है, जिसमें एक तिहाई धन का देनदार जम्मू कश्मीर है। जम्मू कश्मीर राज्य सरकार को एनएचपीसी को कुल 152 करोड़ रुपये चुकाने है, संभवत: बकाया अब कश्मीर खुद चुका सकेगा।
भारत अब कृष्ण गंगा नदी पर बना सकेगा बांध
भारत 1960 के सिंधु जल संधि के तहत अपने हिस्से का पानी पूरी तरह से उपयोग करने की योजना बना रहा है। सिंधु जल संधि के अनुसार, जो कोई भी निर्माण करता है, नदी के पानी पर उसका पहला अधिकार होगा। दरअसल, 330 मेगावाट के पॉवर प्रोजेक्ट्स कृष्ण गंगा नदी पर आधारित हैं।
इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार अब जल्द पूरा करेगी। खासकर तब जब पाकिस्तान इसको इंटरनेशनल ऑरब्राइट्रेशन में इनडस वॉटर ट्रीटी 1960 के तहत हेग में चैलेंज किया था। इसमें 2013 में निर्णय भारत के पक्ष में हुआ था।
इस ट्रीटी के अनुसार जो भी कृष्ण गंगा नदी पर पहले बांध बना लेगा उसी देश का उस पर पहला अधिकार होगा। अब 370 हटने के बाद भारत जल्द ही दखल देकर इस पर बांध बना सकेंगी और कृष्ण गंगा नदी के पानी पर भारत का पहला अधिकार होगा।
उल्लेखनीय है वर्तमान में, भारत में 357,875 मेगावाट (मेगावाट) की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता है, जिसमें से 13% या 45,399.22 मेगावाट हाउड्रो प्रोजेक्ट के माध्यम से उत्पन्न होती है। हाइड्रो प्रोजेक्ट को निष्पादित करने में समय लगता है और इसमें संपूर्ण सर्वेक्षण और जांच और विस्तृत परियोजना बनाने में समय लगता है।
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