Article 370: 11 जुलाई को SC की 5 सदस्यीय संविधान पीठ में सुनवाई, CJI चंद्रचूड़ करेंगे अगुवाई
जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म किए जाने के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संविधान पीठ में 11 जुलाई को सुनवाई होगी। इस संविधान पीठ की अगुवाई सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ करेंगे।
5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को खत्म कर दिया गया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं डाली गई हैं। इसपर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में पहला सबसे बड़ा यही फैसला लिया था।

सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संविधान पीठ में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को जारी नोटिस के मुताबिक शाह फैसल और अन्य बनाम भारत सरकार और अन्य के इस मामले की सुनवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच में सीजेआई के अलावा चार और वरिष्ठ जज शामिल हैं।
11 जुलाई को सुबह 10.30 बजे शुरू होगी सुनवाई
इस संविधान पीठ में सीजेआई के साथ ही जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्य कांत शामिल हैं। इस मामले की सुनवाई 11 जुलाई को सुबह साढ़े 10 बजे शुरू होगी।
संवैधानिक वैद्यता को दी गई है चुनौती
दरअसल, जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म किए के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में 20 से ज्यादा याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी गई है। इन याचिकाओं में संसद के दोनों सदनों से पारित फैसले की संविधानिक वैद्यता पर सवाल खड़े किए गए हैं।
2 मार्च, 2020 के बाद पहली बार सुनवाई
मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 कर दिया, जिसकी वजह से इसे मिला विशेष दर्जा अब खत्म हो चुका है। याचिकाकर्ताओं की दलील है कि यह फैसला लेते समय संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया गया। 2 मार्च, 2020 के बाद पहली बार यह याचिकाएं सुनवाई के लिए लिस्टेड हुई हैं।
जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया है
बता दें कि केंद्र सरकार ने न सिर्फ जम्मू और कश्मीर को धारा-370 के प्रावधानों से मुक्त किया है, बल्कि राज्य को जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के रूप में दो केंद्र शासित प्रदेशों में भी विभाजित कर दिया है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट आईएएस अधिकारी शाह फैसल की ओर से याचिका वापस लिए जाने के अनुरोध पर भी फैसला लेगा। पिछले साल सितंबर में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की थी कि वह याचिकाकर्ताओं की लिस्ट से अपना नाम वापस लेना चाहते हैं।
दरअसल, शाह फैसल ने सुप्रीम कोर्ट से यह गुहार तब लगाई थी, जब केंद्र सरकार ने उनके इस्तीफा वापस लेने के उनके आवेदन को अप्रैल, 2022 में स्वीकार कर लिया और उनकी आईएएस की सेवा बहाल कर दी गई।












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