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Article 35A:अजित डोभाल बोले- जम्‍मू कश्‍मीर के लिए अलग संविधान बहुत बड़ी गलती

By Yogender Kumar
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    नई दिल्‍ली। नेशनल सिक्‍योरिटी एडवाइजर (एनएसए) अजित डोभाल ने जम्‍मू-कश्‍मीर के लिए अलग संविधान को बड़ी गलती करार दिया है। सरदार वल्‍लभ भाई पटेल पर लिखी किताब के विमोचन के दौरान अजित डोभाल ने कहा कि भारत में 560 रियासतों का विलय किया गया। इन रियासतों में अलग-अलग कानून थे, जो कि विलय के बाद एक संविधान के तहत आ गए। अजित डोभाल के बयान पर नेशनल कॉन्‍फ्रेंस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के नेता मुस्‍तफा कमाल ने केंद्र सरकार से कहा कि वह डोभाल के बयान पर ध्‍यान दे और अगर वह ऐसा नहीं करती है तो यह स्‍पष्‍ट है कि डोभाल जो कुछ कह रहे हैं, उसमें केंद्र की सहमति है।

    नई दिल्‍ली। नेशनल सिक्‍योरिटी एडवाइजर (एनएसए) अजित डोभाल ने जम्‍मू-कश्‍मीर के लिए अलग संविधान को बड़ी गलती करार दिया है। सरदार वल्‍लभ भाई पटेल पर लिखी किताब के विमोचन के दौरान अजित डोभाल ने कहा कि भारत में 560 रियासतों का विलय किया गया। इन रियासतों में अलग-अलग कानून थे, जो कि विलय के बाद एक संविधान के तहत आ गए। अजित डोभाल के बयान पर नेशनल कॉन्‍फ्रेंस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के नेता मुस्‍तफा कमाल ने केंद्र सरकार से कहा कि वह डोभाल के बयान पर ध्‍यान दे और अगर वह ऐसा नहीं करती है तो यह स्‍पष्‍ट है कि डोभाल जो कुछ कह रहे हैं, उसमें केंद्र की सहमति है। अजित डोभाल ने कार्यक्रम में कई और बातें कहीं। उन्‍होंने कहा कि संप्रभुता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता है और उसे कमजोर तरीके से पारिभाषित भी नहीं किया जाना चाहिए। उन्‍होंने आगे कहा, अंग्रेजों ने भारत छोड़ा, वह भारत को ताकतवर संप्रभु राष्‍ट्र के तौर पर छोड़कर नहीं चाहते थे। अंग्रेज विघटन के बीज बोने का प्रयास कर रहे थे। अंग्रेजों के इस प्‍लान को सरदार वल्‍लभ भाई पटेल समझ गए थे। सरदार पटेल अपनी सूझबूझ से एक ऐसा देश बनाने में कामयाब रहे, जिसमें राज्‍य तो कई हैं, लेकिन संविधान एक हो, क्‍योंकि संप्रभुता को बांटा नहीं जा सकता। सरदार पटेल की भूमिका केवल सिर्फ इतनी नहीं है कि उन्‍होंने रियासतों का विलय कराया। विलय तो राष्‍ट्र निर्माण का एक जरिया मात्र बना, लेकिन अहम बात यह है कि एक ही संविधान सभी पर बराबर लागू किया गया। जम्‍मू-कश्‍मीर जहां पर संविधान पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया, उसमें काट-छांट की गई और जम्‍मू-कश्‍मीर में अलग संविधान चल रहा है, जो कि एक बड़ी गलती है। अनुच्छेद 35 ए के तहत जम्मू कश्मीर के स्थायी निवासियों को खास तरह के अधिकार और कुछ विशेषाधिकारों दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट इस समय अनुच्छेद 35-ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। ऐसे समय में अजित डोवाल का बयान बेहद अहम हो जाता है। क्‍या है 35A -अनुच्छेद 35A जम्मू-कश्मीर विधानसभा को स्थाई नागरिक की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है। इसे राज्य में 14 मई 1954 को लागू किया गया था। -अनुच्छेद 35A को लागू करने के लिए तत्कालीन सरकार ने धारा 370 के अंतर्गत प्राप्त शक्ति का इस्तेमाल किया था। -राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 14 मई 1954 को इस विशेषाधिकार को लागू किया था। -अनुच्छेद 35A धारा 370 का हिस्सा है। इस धारा के तहत जम्मू-कश्मीर के अलावा भारत के किसी भी राज्य का नागरिक जम्मू-कश्मीर में कोई संपत्ति नहीं खरीद सकता और वहां का नागरिक भी नहीं बन सकता। - अब इसे खत्म करने की मांग इसलिए हो रही है क्योंकि इस अनुच्छेद को संसद के जरिए लागू नहीं किया गया है। दूसरा कारण यह है कि इस अनुच्छेद के ही कारण पाकिस्तान से आए शरणार्थी आज भी मौलिक अधिकारों से वंचित हैं।

    अजित डोभाल ने कार्यक्रम में कई और बातें कहीं। उन्‍होंने कहा कि संप्रभुता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता है और उसे कमजोर तरीके से पारिभाषित भी नहीं किया जाना चाहिए। उन्‍होंने आगे कहा, 'अंग्रेजों ने भारत छोड़ा, वह भारत को ताकतवर संप्रभु राष्‍ट्र के तौर पर छोड़कर नहीं चाहते थे। अंग्रेज विघटन के बीज बोने का प्रयास कर रहे थे। अंग्रेजों के इस प्‍लान को सरदार वल्‍लभ भाई पटेल समझ गए थे।

    सरदार पटेल अपनी सूझबूझ से एक ऐसा देश बनाने में कामयाब रहे, जिसमें राज्‍य तो कई हैं, लेकिन संविधान एक हो, क्‍योंकि संप्रभुता को बांटा नहीं जा सकता। सरदार पटेल की भूमिका केवल सिर्फ इतनी नहीं है कि उन्‍होंने रियासतों का विलय कराया। विलय तो राष्‍ट्र निर्माण का एक जरिया मात्र बना, लेकिन अहम बात यह है कि एक ही संविधान सभी पर बराबर लागू किया गया। जम्‍मू-कश्‍मीर जहां पर संविधान पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया, उसमें काट-छांट की गई और जम्‍मू-कश्‍मीर में अलग संविधान चल रहा है, जो कि एक बड़ी गलती है।

    अनुच्छेद 35 ए के तहत जम्मू कश्मीर के स्थायी निवासियों को खास तरह के अधिकार और कुछ विशेषाधिकारों दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट इस समय अनुच्छेद 35-ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। ऐसे समय में अजित डोवाल का बयान बेहद अहम हो जाता है।

    क्‍या है 35A

    -अनुच्छेद 35A जम्मू-कश्मीर विधानसभा को स्थाई नागरिक की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है। इसे राज्य में 14 मई 1954 को लागू किया गया था।

    -अनुच्छेद 35A को लागू करने के लिए तत्कालीन सरकार ने धारा 370 के अंतर्गत प्राप्त शक्ति का इस्तेमाल किया था।

    -राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 14 मई 1954 को इस विशेषाधिकार को लागू किया था।

    -अनुच्छेद 35A धारा 370 का हिस्सा है। इस धारा के तहत जम्मू-कश्मीर के अलावा भारत के किसी भी राज्य का नागरिक जम्मू-कश्मीर में कोई संपत्ति नहीं खरीद सकता और वहां का नागरिक भी नहीं बन सकता।

    - अब इसे खत्म करने की मांग इसलिए हो रही है क्योंकि इस अनुच्छेद को संसद के जरिए लागू नहीं किया गया है। दूसरा कारण यह है कि इस अनुच्छेद के ही कारण पाकिस्तान से आए शरणार्थी आज भी मौलिक अधिकारों से वंचित हैं।

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    English summary
    Article 35A: Ajit Doval backs jammu Kashmir for all, says separate J&K Constitution an aberration

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