अर्नब गोस्वामी का हाईकोर्ट में दावा- पुलिस ने जूते से मारा, जबरदस्ती पिलाया पेय-पदार्थ
मुंबई। रिपब्लिक ग्रुप के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी की जमानत याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। उन्होंने मुंबई पुलिस पर अपनी जमानत याचिका में यातना देने का आरोप लगाया है। अर्नब ने दावा किया है कि पुलिस ने उन्हें जूते से मारा। पानी तक नहीं पीने दिया। उन्होंने रीढ़ की हड्डी और नस में चोट होने का दावा भी किया है। अर्नब गोस्वामी को 2018 के एक मामले में दो अन्य लोगों के साथ आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

अर्नब गोस्वामी ने जमानत याचिका में लगाया आरोप
बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक की बेंच द्वारा अर्नब गोस्वामी की जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही है। वेबसाइट बार और बेंच के अनुसार, अर्नब गोस्वामी ने अपनी याचिका में दावा किया कि गिरफ्तारी के दौरान एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने उन्हें भारी बूट से मारा, उन्हें बाएं हाथ में आधा फुट गहरा निशान पड़ गया है और उन्हें चोट लगी है। उनकी रीढ़ की हड्डी में भी गंभीर चोट आई है।

पुलिस ने गिरफ्तारी के वक्त जूते पहनने तक का समय नहीं दिया: अर्नब
अर्नब ने अपनी याचिका में दावा किया कि, पुलिस अधिकारियों ने उन्हें "एक पेय पदार्थ पीने के लिए मजबूर किया" उन्होंने यह भी कहा कि उसे पीने के बाद उन्होंने गले में घुटन की शिकायत हुई। उनका कहना है कि पुलिस ने गिरफ्तारी के वक्त जूते पहनने तक का समय नहीं दिया। उच्च न्यायालय शनिवार को गोस्वामी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उन्होंने अंतरिम जमानत की मांग की है।

पुलिस की रिमांड याचिका पर 9 नवंबर को होगी सुनवाई
इससे पहले रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी की रिमांड को लेकर रायगढ़ जिले के अलीबाग में एक सत्र अदालत ने एक आदेश जारी किया है। शनिवार को पुलिस की संशोधित याचिका पर सुनवाई करते हुए अलीबाग में एक सत्र अदालत ने कहा कि वह इस मामले पर 9 नवंबर को सुनवाई करेगी। रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को आत्महत्या के मामले में 2018 के अपहरण के मामले में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। अलीबाग जिला सत्र अदालत ने यह आदेश दिया कि यह सूचित किया गया था कि बॉम्बे उच्च न्यायालय वर्तमान में गोस्वामी और इस मामले के दो अन्य आरोपियों - फिरोज शेख और नितेश सारदा द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। पुलिस ने अपने आवेदन में सत्र अदालत से निचली अदालत के आदेश को रद्द करने और तीनों अभियुक्तों को हिरासत में देने की मांग की थी।












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