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AQI Alert: जहरीली हवा की ‘साइलेंट किलिंग’ शुरू! फेफड़ों के बाद अब इस ऑर्गन पर हमला, डॉक्टर भी हैरान

AQI Alert: देश के शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण अब सिर्फ फेफड़ों के लिए खतरा नहीं रह गया है। दिल्ली, मुंबई और अन्य बड़े शहरों में लगातार बढ़ता AQI अन्य स्वास्थ्य खतरों को निमंत्रण दे रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि लोग शराब या गलत खान-पान से होने वाले लिवर नुकसान को जानते हैं, लेकिन वायु प्रदूषण एक छिपा और गंभीर खतरा बनकर सामने आया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जहरीली हवा सीधे लिवर को भी प्रभावित कर सकती है और इसके कारण लिवर में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और मेटाबोलिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो यह फैटी लिवर, नॉन-अल्कोहलिक स्टेटोहिपेटाइटिस और लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

AQI Alert

प्रदूषण का असर सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं

डॉ. सरीन के अनुसार, हवा में मौजूद सूक्ष्म कण और रसायन शरीर में प्रवेश कर सीधे लिवर तक पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि यह कण लिवर की कोशिकाओं में बदलाव लाते हैं और समय के साथ स्थायी क्षति का कारण बन सकते हैं। देश के कई शहरों का वायु गुणवत्ता स्तर लगातार 'अस्वस्थ' से 'हानिकारक' श्रेणी में बना है, जैसे मुंबई में हाल ही में दर्ज किए गए 277 AQI ने चिंता और बढ़ा दी है। राजधानी दिल्ली की स्थिति तो और खराब है। वहां AQI 400 के करीब है।

कैसे पहुंचता है प्रदूषण लिवर तक?

विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों के रास्ते रक्त में प्रवेश कर जाते हैं। रक्तप्रवाह के जरिए ये कण लिवर तक पहुंचकर कई जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं।
कुछ प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं:

ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस में बढ़ोतरी

जब प्रदूषक तत्व शरीर में प्रवेश करते हैं, तो वे फ्री रेडिकल्स बनाते हैं। ये फ्री रेडिकल्स लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और लगातार संपर्क में रहने से लिवर कमजोर हो सकता है।

सूजन और फैटी लिवर का खतरा

प्रदूषण शरीर में सूजन पैदा करने वाले रसायनों का स्तर बढ़ाता है, जो लिवर की संरचना और कार्य पर सीधा असर डालते हैं। इससे फैटी लिवर रोग, नॉन-अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH) और आगे चलकर सिरोसिस जैसी गंभीर स्थितियां हो सकती हैं।

मेटाबोलिज्म पर असर

शोध बताते हैं कि प्रदूषण इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाता है, जिससे लिवर में वसा जमा होना तेज हो जाता है। इससे लिवर की सामान्य सफाई प्रक्रिया और चयापचय प्रणाली प्रभावित होती है।

देश के बड़े शहरों में हवा की स्थिति चिंताजनक

दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम, नोएडा और कई शहरों में AQI लगातार 200 से ऊपर दर्ज हो रहा है। यह केवल अस्थमा और हृदय रोगियों के लिए ही नहीं, बल्कि स्वस्थ लोगों के लिए भी जोखिम का संकेत है। डॉक्टरों के अनुसार, लिवर पर प्रदूषण का असर पहले समझ से बाहर था, लेकिन अब शोध और मरीजों में पाए जा रहे बदलाव इसे गंभीर समस्या के रूप में सामने ला रहे हैं।

विशेषज्ञों की सलाह

स्वच्छ हवा भले ही पूरी तरह हमारे नियंत्रण में नहीं हो, लेकिन अपनी सेहत को सुरक्षित रखने के कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं:

  • अत्यधिक प्रदूषण वाले दिनों में बाहर कम निकलें।
  • बाहर निकलते समय N95 या N99 मास्क का इस्तेमाल करें।
  • आहार में विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजें शामिल करें जैसे हरी सब्जियां, फल, हल्दी और नींबू।
  • शरीर को हाइड्रेटेड रखें।
  • बच्चों, बुजुर्गों और पहले से लिवर या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

क्या प्रदूषण नई हेल्थ इमरजेंसी बनता जा रहा है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ते प्रदूषण का असर सिर्फ खांसी, अस्थमा या फेफड़ों की बीमारियों तक सीमित नहीं है। अब यह साबित हो रहा है कि लंबी अवधि में यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगों-खासकर लिवर-को भी नुकसान पहुंचा रहा है। सरकार और नागरिक दोनों को मिलकर इस खतरे का समाधान ढूंढने की जरूरत है, ताकि भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य आपदा से बचा जा सके।

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