कर्नाटक विधानसभा में भारी हंगामे के बीच गौ हत्या रोधी विधेयक हुआ पारित, जानें डिटेल
कर्नाटक विधानसभा में भारी हंगामे के बीच गौ हत्या रोधी विधेयक हुआ पारित, जानें डिटेल
बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा में बुधवार को गो हत्या रोधी विधेयक काफी हंगामे के बीच पारित हो गया। इस विधेयक का विरोध करते हुए प्रदेश सरकार की विपक्षी पार्टी कांग्रेस के विधायक सदन छोड़कर चले गए। वहीं कनार्टक के मंत्री जेसी मधुस्वामी ने गायों के वध को लेकर बुधवार को एक बयान जारी किया है।
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मंत्री मधुस्वामी ने कहा 'कर्नाटक मवेशी वध रोकथाम एवं संरक्षण विधेयक-2020'' के तहत राज्य में गो हत्या पर पूर्ण रोक का प्रावधान है। प्रदेश में गायों और बछड़ों के वध की अनुमति नहीं है। 13 वर्ष से अधिक आयु की भैंस का वध स्वीकृत है। उन्होंने कहा कि गायों की अवैध बिक्री, परिवहन या गायों की कटाई दंडनीय है यदि किसी गाय ने एक ऐसी बीमारी से संपर्क किया है जो अन्य मवेशियों में फैल सकती है तो उसे मार दिया जा सकता है यानी कि उसका वध किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि गाय की तस्करी, उसकी अवैध सप्लाई ढुलाई और गायों पर अत्याचार किए जाने में शामिल पाए जाने के वाले व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रवाधान किया गया है। न्यूज एजेंसी से मधु स्वामी ने कहा कि हां, विधानसभा में विधेयक पारित हो गया।'' गाय और बछड़ों के अलावा विधेयक में भैंस एवं उनके बछड़ों के संरक्षण का भी प्रावधान है। उन्होंने कहा कि आरोपी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई किए जाने का इस विधेयक में प्रवाधान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस विधेयक के तहत गौशाला भी बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे केस में जांच करने के लिए पुलिस को भी शक्ति प्रदान की गई है।
बता दें बुधवार को कर्नाटक विधानसभा में पशुपालन मंत्री प्रभु चव्हाण ने जब विधेयक पेश किया तब विपक्ष के नेता सिद्धरमैया के नेतृत्व में कांग्रेस के विधायक अध्यक्ष के सामने आकर आरोप लगाया कि इस विधेयक के बारे में सदन कार्य मंत्रणा के समक्ष कोई भी मंत्रणा नहीं की गई है। वहीं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री ने सिद्धरमैय्या ने कहा कि हमने कल इस बारे में चर्चा की थी कि नए विधेयक पेश नहीं किए जाएंगे। हम इस बात को लेकर सहमत हुए थे कि केवल अध्यादेश पारित किए जाएंगे। लेकिन अचानक विधेयक सदन में पेश करके पास करवा दिया गया। वहीं कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े ने कहा कि पहले हुई बैठक में उन्होंने कहा था कि बुधवार को सभा में महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया जाएगा। विधेयक पास होते ही विपक्षी दल के नेताओं ने जमकर विधान परिषद में हंगामा काटा और सभा का बहिष्कार कर बाहर निकल गए।












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