क्या IAS पूजा की तरह ये भी फर्जी है?, UPSC में 532वीं रैंक पाने वाले से लोग क्यों पूछ रहे हैं ये सवाल

तेलंगाना के आईएएस अधिकारी ने अपने ऊपर लग रहे तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया है। आरोप है कि आईएएस अधिकारी प्रफुल देसाई ने यूपीएससी की परीक्षा में फर्जी तरीके से दिव्यांग कोटा के तहत आरक्षण हासिल किया। लेकिन देसाई ने इन आरोपों को खारिज किया है।

आरोप है कि प्रफुल देसाई ने ऑर्थोपेडिकली हैंडीकैप्ड कोटा का गलत फायदा उठाया है। लेकिन प्रफुल का कहना है कि उनकी दिव्यांगता उन्हें शारीरिक गतिविधियां करने से नहीं रोकती है, यह उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा है। गौर करने वाली बात है कि इसी तरह के आरोप ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर भी लगे हैं।

IAS Praful Desai

प्रफुल ने तोड़ी चुप्पी

इस पूरे विवाद पर प्रफुल देसाई ने विस्तार से एक बयान सोशल मीडिया पर जारी किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग मेरे दिव्यांग सर्टिफिकेट पर सवाल खड़ा कर रहे हैं और भ्रम फैला रहे हैं, उन्हें बताना चाहता हूं कि मैंने यूपीएससी में बेंचमार्क डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट के साथ आवेदन किया था। इस सर्टिफिकेट को सक्षम संस्था ने जारी किया था।

2018 में नहीं हुए थे सफल

वर्ष 2018 में यूपीएससी परीक्षा के दौरान, काफी कड़ी मेहनत और लगन के बाद मैंने सफलता हासिल की और इंटरव्यू के लिए पहुंचा था। नियम के तहत मैंने अगले दिन एम्स दिल्ली में मेडिकल कराया। एम्स के मेडिकल बोर्ड मेरे सर्टिफिकेट की जांच की। इस वर्ष मैं इस परीक्षा को पास नहीं कर पाया था।

2019 में मिली सफलता

एक बार फिर से 2019 में मैंने सफलता हासिल की और इंटरव्यू राउंड तक पहुंचा। फिर से मैंने नियम का पालन किया और इंटरव्यू के अगले दिन एम्स के मेडिकल बोर्ड पहुंचा। यहां सघन जांच के बाद एम्स दिल्ली के मेडिकल बोर्ड ने सत्यापित किया कि मैं बेंचमार्क डिसेबिलिटी के नियम को पूरा करता हूं। इस रिपोर्ट को डीओपीटी और यूपीएससी के साथ साझा किया गया है।

मेरा मानना है कि जो लोग गलत जानकारी देकर इस आरक्षण का लाभ उठाते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें सजा मिलनी चाहिए। लेकिन इसके साथ ही जो लोग सच में दिव्यांग हैं उनके साथ संवेदनशील रहना चाहिए।

तस्वीरों पर दिया जवाब

मेरी कुछ तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है, जिसमे मैं ट्रेकिंग कर रहा हूं, अन्य गतिविधियां कर रहा हूं, यह मेरी ट्रेनिंग का हिस्सा है। प्रफुल ने कहा कि दिव्यांग होने के साथ अगर मैं अपनी शारीरिक क्षमताओं को बेहतर करने की कोशिश कर रहा और सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहा तो इसमे क्या गलत है।

फिर से किसी भी मेडिकल बोर्ड का सामना करने के लिए तैयार

मेरी आप सभी लोगों से अपील है कि जो लोग गलत जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं, वह सही लोगों के साथ अपनी संवेदना जाहिर करें और उनके प्रति संवेदनशील रहें। बिना सच की पड़ताल किए और तथ्यों को जाने किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे। मैं आज भी किसी भी मेडिकल बोर्ड की परीक्षा का सामना करने के लिए तैयार हूं।

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