'टेस्ट ड्राइव' मतलब मुंह मारना, विवादों में घिरे अनिरुद्धाचार्य ने दी सफाई, संत प्रेमानंद का भी किया जिक्र
Aniruddhacharya Maharaj News: मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज के कथा के वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर खूब देखे जाते हैं। हाल ही में अनिरुद्धाचार्य महाराज ने महिलाओं की शादी और उम्र और उनके संबंधों को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसके बाद वो विवादों में घिर गए। सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रतिक्रियाएं व्यक्त करते हुए जमकर गुस्सा जताया।
अनिरुद्धाचार्य ने कहा था, "लड़कियों की शादी 25 साल की उम्र से पहले हो जानी चाहिए। क्योंकि शादी में देरी से लड़कियां "इधर-उधर मुँह मारती हैं" और उनके बॉयफ्रेंड बन जाते हैं।" जिस पर हंगामा मच गया और अब विवादों में घिरे अनिरुद्धाचार्य महाराज ने अपने बयान पर सफाई दी है।

अनिरुद्धाचार्य बोले- 'टेस्ट ड्राइव' मतलब मुंह मारना
मीडिया को दिए इंटरव्यू में अनिरुद्धाचार्य ने बताया कि कई लड़कियों ने उनके बयान पर आपत्ति जताई और कहा कि शादी से पहले 'टेस्ट ड्राइव' ज़रूरी है। जिस पर उन्होंने अपनी बात को ग्रामीण परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए कहा, "भले ही शहरों में शादी से पहले के अफेयर को 'टेस्ट ड्राइव' कहा जाता हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों की भाषा में इसे 'मुंह मारना' ही समझा जाता है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी को उसके सही संदर्भ में समझा जाना चाहिए।

अनिरुद्धाचार्य बोले- मुंह मारना गलत शब्द नहीं
अनिरुद्धाचार्य के मुताबिक, उनके पूरे छह मिनट के वीडियो का केवल 30 सेकंड का संपादित अंश दिखाया गया, जिससे विवाद पैदा हुआ। उन्होंने कहा मेरे शब्दों को गलत तरीके से समझा गया है और उनका विरोध भाषा के बजाय संतों के खिलाफ एक बड़े अभियान का हिस्सा है। अनिरुद्धाचार्य के अनुसार, उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। उन्होंने दावा किया कि "मुंह मारना गलत शब्द नहीं" वाली उनकी टिप्पणी केवल चरित्रहीन पुरुषों और महिलाओं के लिए थी।
अनिरुद्धाचार्य बोले- चोर को चोर ना कहा जाए तो क्या कहा जाए
अनिरुद्धाचार्य ने कहा "चोर को चोर ना कहा जाए तो क्या कहा जाए।" माफी मांगने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे वहीं माफी मांगते हैं, जहां गलत होते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनके बयान से केवल वे लोग नाराज थे, जो "चोर को चोर कहने" से असहज थे। उन्होंने कहा, "कुछ लोग मुझे महिला विरोधी बताते हैं, लेकिन वास्तव में मेरे शब्दों का नहीं, बल्कि संतों का विरोध हुआ। मेरा कोई विरोध नहीं कर रहा है।"
अनिरुद्धाचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन का भी किया जिक्र
कथावाचक ने आगे कहा कि जब भी कोई गुरु या माता-पिता बच्चों को समझाने का प्रयास करते हैं, तो उनकी भाषा अक्सर थोड़ी कठोर होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता सुनाते हुए भी कड़े शब्दों का प्रयोग किया था, जैसे "तू क्यों नपुंसक बन रहा है, क्यों मैदान छोड़कर जा रहा है?"
अनिरुद्धाचार्य ने रामचरितमानस का भी जिक्र
अनिरुद्धाचार्य ने रामचरितमानस का जिक्र करते हुए कहा, "गुरु, सचिव और सलाहकार को हमेशा कड़े शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए, इसी से समाज सुधरता है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि गुरु, सचिव या सलाहकार केवल मीठी बातें करने लगें, तो समाज का कभी भला नहीं हो सकता। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनका बयान एक गुरु और सलाहकार के तौर पर था, जिसका उद्देश्य समाज को सही दिशा देना था।
अनिरुद्धाचार्य ने गुरु प्रेमानंद जी महाराज का उदाहरण
अनिरुद्धाचार्य ने प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद जी महाराज का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें भी विरोध का सामना करना पड़ा था, जबकि उनके शब्द बेहद सम्मानजनक थे। उन्होंने इसे हिंदू संतों के खिलाफ चल रहे एक अभियान का प्रमाण बताया, न कि किसी विशिष्ट भाषा के खिलाफ।
पराई स्त्री या पुरुष की ओर न देखें
कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने बताया कि उन्होंने वही बातें कहीं जो भारतीय शास्त्रों और बड़े-बुजुर्गों द्वारा सिखाई जाती हैं। उन्होंने अपनी पत्नी या पति के प्रति वफादार रहने और पराई स्त्री या पुरुष की ओर न देखने की सलाह दी। उन्होंने बच्चों को चोरी और अन्य बुराइयों से बचने की शिक्षा देने पर भी जोर दिया। अनिरुद्धाचार्य ने समाज में बढ़ती अश्लीलता, जैसे अश्लील वीडियो, तस्वीरें और बॉलीवुड के गाने, पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी चीजें समाज को नुकसान पहुंचा रही हैं और इन पर रोक लगनी चाहिए।












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