आंध्र प्रदेश विधानसभा ने पास किया प्रस्ताव, केंद्र से जाति आधारित जनगणना कराने की मांग
अमरावती, 23 नवंबर: आंध्र प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को जाति आधारित जनगणना को लेकर एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव में भारत सरकार से पिछड़े वर्गों की जाति आधारित जनगणना करने का अनुरोध किया गया है। अब इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। प्रस्ताव में केंद्र से मांग की गई है कि आने वाली जनगणना में सभी जातियों की तादाद का पता लगाया जाए ताकि इनकी आर्थिक और सामाजिक हैसियत का पता चल सके। जिससे सभी जातियों के लिए योजनाएं बनाने और उन तक लाभ पहुंचाने में आसानी हो।

आंध्र प्रदेश मंत्रिमंडल ने बीते महीने यानी अक्टूबर में ही 2021 की राष्ट्रीय जनगणना में अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) का उल्लेख करने के लिए केंद्र से जाति आधारित जनगणना करने का अनुरोध करने संबधी प्रस्ताव पेश किया था। कैबिनेट से मंजूरी मिल जाने के बाद इसे विधानसभा में पेश किया गया और पारित कर दिया गया। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी कई बार जातिगत जनगणना की मांग कर चुके हैं।
आंध्र प्रदेश के अलावा तेलंगाना की विधानसभा ने भी पिछले महीने (8 अक्टूबर) को इसी तरह का एक प्रस्ताव पारित किया था। उससे पहले बिहार विधानसभा में भी बजट सत्र के दौरान जाति आधारित जनगणना कराने के पक्ष में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव दोनों ही इसकी मांग करते रहे हैं।
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लगातार होती रही है जाति जनगणना की मांग
देश में जातिगत जनगणना की मांग लगातार होती रही है। हाल के कुछ सालों में इसकी मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ा है क्योंकि जल्दी ही अब जनगणना का काम शुरू होना है। बता दें कि देश में पहली बार अंग्रेजों के समय में 1931 में जातिगत आधार पर जनगणना हुई थी। इसके बाद 2011 यूपीए की सरकार में जाति आधारित जनगणना तो हुई लेकिन इसमें कमियां होने की बात सरकार की ओर से कही गई और इसे जारी नहीं किया गया। केंद्र में इसके बाद सरकार बदल गई लेकिन ये रिपोर्ट जारी नहीं की गई।












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