सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मिली ताकत, ओडिशा के एक अफसर ने कहा वह हैं ट्रांसजेंडर

भुवनेश्‍वर। सुप्रीम कोर्ट के पिछले दिनों आए एक फैसले से ओडिशा के एक गजटेड ऑफिसर को ताकत मिली और फिर उसने जो कुछ किया वह वाकई तारीफ के काबिल है।

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ओडिशा की ऐश्वर्या रितुपर्णा प्रधान ने अपना नाम रतिकांत प्रधान कर लिया है और अब अपनी एक नई पहचान के साथ जी रही हैं। वह राज्‍य के फाइनेंस डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं।

पारादीप में टैक्‍स ऑफिसर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहीं प्रधान की मानें तो उन्‍हें अब अपनी पहचान पर गर्व है। उन्‍होंने बताया कि 15 अप्रैल 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर्स को तीसरे लिंग की श्रेणी में मान्यता तो दी ही साथ ही उनके संवैधानिक अधिकारों की बात भी कही थी। इसके बाद ही उन्‍होंने अपनी पहचान सामने लाने का सोचा।

वह याद करती हैं कि जिस जिस दिन सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला दिया, उसी दिनउन्‍होंने पुरूष लिंग की जगह तीसरे लिंग की पहचान चुनने का मन बना लिया था।

ओडिशा के कंधमाल जिले में जी उदयगिरि ब्लॉक के तहत कनाबागिरी गांव की निवासी प्रधान ने अक्टूबर 2010 में पुरूष उम्मीदवार के रूप में ओडिशा वित्तीय सेवा में प्रवेश किया था।

लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर और भारतीय जनसंचार संस्थान से स्नातक प्रधान ने एक बैंक में क्लर्क की नौकरी का विकल्प चुनने से पहले एक न्‍यूजपेपर में इंटर्नशिप की थी।

बाद में उन्होंने राज्य सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त की। ऐश्वर्या रितुपर्णा प्रधान ने कहा कि नौ अप्रैल 2014 को सीटीओ के रूप में मेरी तैनाती हुई। उस समय मैं पुरूषों के कपड़े पहनती थी।

बाद में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने पर मैंने साड़ी पहननी शुरू कर दी। उन्‍हें अपने घर में और आसपास के लोगों से काफी भेदभाव झेलना पड़ा था।

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