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एक छोटी गलती और कोरोना वायरस की सबसे बड़ी शिकार बन गई इटली, क्या थी वह गलती?

बेंगलुरू। चीन के वुहान सिटी से फैला जानलेवा कोरोना वायरस अब यूरोपीय देशों पर कहर बनकर टूट रहा है। खासकर इटली और स्पेन इससे अधिक पीड़ित हैं। करीब 6 करोड़ आबादी वाले इटली में अब तक कुल 53,778 लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं और कुल 4825 लोगों की मौत हो चुकी है।

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फिलहाल, घातक कोरोना वायरस के केंद्र रहे चीन में संक्रमण से हुए मौत के आंकड़े इटली में हुए मौत के आंकड़े से कम है। वर्तमान में चीन और इटली के बीच मौत के आंकड़े में 1,564 का अंतर हैं। एक दिन में सबसे ज्यादा मौत का रिकॉर्ड भी इटली के नाम दर्ज है, जहां गत 21 मार्च को एक दिन में 793 लोंगी की मौत हुई है।

एक दिन सर्वाधिक मौतों का पिछला रिकॉर्ड भी इटली के ही नाम है जब 18 मार्च को 24 घंटे के अंतराल में कुल 475 कोरोना संक्रमित मरीजों की मौतें रिपोर्ट की गई थी। इसके पहले गत 13 मार्च को 24 घंटे के अंतराल में 368 लोगों की मौत का रिकॉर्ड भी इटली में ही बना है जबकि चीन में चीन में एक दिन में 254 संक्रमितों की मौत की पुष्टि हुई है। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो कोरोना वायरस चीन से करीब 7500 किलोमीटर दूर इटली में कहर बरपा रहा है।

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अभी तक मिली रिपोर्ट के मुताबिक इटली में कोरोना वायरस के विकराल रूप धारण करने के पीछे लापरवाही और कोरोना वायरस संक्रमण को कम आंकना था, जिसकी वजह से यह वायरस दुनिया के सबसे बुजुर्ग देशों में सुमार इटली के लोगों के लिए काल बनकर उभरा है।

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    गौरतलब है इटली में कोरोना वायरस का पहला मामला जनवरी को देखने में मिला था, जब दो चीनी पर्यटकों को इससे ग्रस्त पाया गया। प्रशासन ने उन्हें जांच के लिए भेज दिया। यह वायरस जनवरी के मध्य में इटली में फैले वायरस का केंद्र लोबार्डी शहर से पूरे देश में फैलना शुरू हो गया। चूंकि शुरूआत में कोरोना संक्रमित बीमारी का कोई लक्षण नहीं दिखाई पड़ रहा था। इस वजह से यह बीमारी दूसरे यूरोपीय देशों में मसलन स्पेन, जर्मनी और फ्रांस में भी फैल गई।

    दरअसल, वहां के डाक्टरों द्वारा पहले माना गया कि लोगों को निमोनिया हो रहा है। गत 18 फरवरी को एक स्थानीय नागरिक लगातार दो दिनों से बुखार की शिकायत होने पर अस्पताल गया और बुखार की दवा देकर उसे घर भेज दिया गया, लेकिन उसका बुखार कम नहीं हुआ था। गत 23 फरवरी को जब दो लोगों के मरने की खबर आई और कोडोना व आस-पास के शहरों में हजारों लोग इससे पीड़ित पाए गए, तो प्रशासन ने व वहां आने-जाने पर रोक लगा दी।

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    सरकार द्वारा इटली के बड़े शहर मिलान में अनेक प्रतिबंध लगाते हुए स्कूल बंद कर दिए गए। बॉर व रेस्तरां में 6 बजे के बाद जाने पर रोक लगा दी गई। इटली का दावा था कि पूरे यूरोप में सबसे पहले उसने इस वायरस से निपटने के लिए कार्रवाई की थी। हालांकि तब उसे इसकी आशंका जरा भी नहीं थी कि यह मामला चीन जैसा भयंकर हो जाएगा।

    इटली में 17-18 मार्च के बीच की स्थिति यह थी कि इटली में हर दिन हज़ारों की तादाद में कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में इटली एक विकसित देश इटली बीमारों का इलाज करने के लिए हॉस्पिटल बेड्स की कमी से जूझने लगा। आमतौर पर जंग में इस तरह के हालात पैदा होते हैं, लेकिन इटली को शांतिकाल में इस तरह की चुनौतीभरी स्थिति से दो-चार होना पड़ रहा है।

    माना जाता है कि इटली में कोरोना वायरस लोबार्डी प्रांत से फैला था, जहां के गवर्नर पहले दावा कर रहे थे कि यह रोग फ्लू सरीखा है। उत्तरी इटली का लॉम्बार्डी प्रांत देश का आर्थिक केंद्र माना जाता है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का आना-जाना भी खूब है। इस क्षेत्र में कोरोना वायरस चुपचाप तरीके से फैलता रहा , लेकिन दो चीनी पर्यटकों को आइसोलेशन में डालने के बाद प्रशासन का इस ओर ध्यान ही नहीं गया।

    इटली की सरकार और स्वास्थ्य प्रशासन के बीच तालमेल की कमी ही कहेंगे कि कोरोना वायरस के संक्रमण से लॉम्बार्डी, वेनेटो और एमिलिया रोमागा सबसे ज्यादा प्रभावित हो गए। इटली में संक्रमित 85 फीसदी मरीज इसी क्षेत्र से आते हैं और यहीं 92 फीसदी मौतें हुई है।

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    गौर करने वाली बात यह है कि महज तीन दिन बाद वहां बॉर व रेस्तरां पर लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए गए थे। इस तरह नेता व उनके स्टाफ तक इसके शिकार होने से नहीं बच पाए हैं। यह रोग इतनी तेजी से फैला कि 1 मार्च को पुनः स्कूल कॉलेज बंद कर दिए। कोरोना के चलते इटली की अर्थव्यवस्था धाराशाई हो गई, शेयर बाजार 10 फीसदी तक गिर गए। वहां का पर्यटन उद्योग ठप्प पड़ गए और स्टोर के बाहर खरीदारो की भीड़ लगने लग गए।

    गत 11 मार्च तक चीन के बाद दुनिया में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित दूसरे देश में शुमार हुए इटली के बाद देखते ही देखते वायरस ने फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन को भी अपनी चपेट में ले लिया। वर्तमान में इटली सर्वाधिक कोरोना वायरस संक्रमित मृतक देश बन चुका है, जिसके बाद चीन है, जहां 3255 मौत हुई है।

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    चीन के बाद कोरोना वायरस से सर्वाधिक पीड़ित देश स्पेन हैं, जहां 1093 मौत रिपोर्ट हुई हैं। चौथे नंबर है मध्य-पूर्व देश ईरान, जहां 1433 लोगों की मौत का मामला सामने आया है। इस लिस्ट में फ्रांस, ब्रिटन और अमेरिका के नाम को भी शुमार करना जरूरी हैं, जहां क्रमवार 450, 177 और 275 मौत हो चुकी हैं।

    उल्लेखनीय है चीन से निकलकर इटली को अपना दूसरा घर बनाने वाला कोरोना वायरस अब अन्य यूरोपीय देशों में तेजी फैल रहा है। इटली में कोरोना वायरस के तेजी से फैलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन दो बड़े कारण जो उभरकर सामने आएं है, उनमें एक है लापरवाही और नजरंदाजी।

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    यही बात हिंदुस्तान के संदर्भ में भी कही जा सकती है, क्योंकि हिंदुस्तान में भी कोरोना वायरस को अंडर एस्टीमेट किया जा रहा है और लापरवाही का आलम यह है कि लोग अभी भी स्वास्थ्य मंत्रालय और डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन फॉलो करते हुए नहीं दिखाई दे रहे हैं।

    शायद यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार, 22 फरवरी को जनता कर्फ्यू का ऐलान किया। यह एक तरह की लॉकडाउन जैसी स्थिति होगी, जिसमें सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक लोगों को घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई है, लेकिन जिस तरह जनता कर्फ्यू को अलग-अलग चश्मों से हिंदुस्तान में देखा जा रहा है।

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    इसलिए लगता नहीं है कि हिंदुस्तान में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकन में अधिक सफलता मिल पाएगी। लोगों का यह रवैया सरकार को दंडात्मक कार्रवाई के लिए भी मजबूर कर सकता है।

    मालूम हो, नेशनल पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक़ इटली में सेल्फ़-आइसोलेशन फ़ॉलो नहीं करने वाले और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने के साथ ही, ऐसे लोगों के खिलाफ़ और भी कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।

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    इटली में मौजूदा कानून के अंतर्गत जिन लोगों में वायरस के लक्षण पाए गए हैं और सेल्फ़-आइसोलेशन में जाने से इंकार कर रहे हैं, उन पर दूसरों को नुक़सान पहुंचाने का केस बन सकता है, जिसके तहत 6 से 36 महीने तक की जेल हो सकती है।

    इसके साथ ही वो लोग जो वायरस से संक्रमित हैं और दूसरों को भी संक्रिमत कर रहे हैं और उन संक्रमितों में से किसी की मौत होती है तो उन पर 'अंतर्राष्ट्रीय हत्या' का मुकदमा दर्ज होगा और इसके तहत उन्हें 21 साल तक की जेल भी हो सकती है।

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    डेली मेल के मुताबिक़ इटली में अगर कोई कोरोना संक्रमित है, वह जानता है कि वह संक्रमित है और बिना इसकी परवाह किए कि वह दूसरों से मुलाक़ात करता है तो ऐसे अपराध को 'Crime Of Injury' माना गया है। इटली में ऐसा पहले 2017 में हो चुका है जब रोम में एक शख़्स को जानबूझकर एचआईवी फ़ैलाने का दोषी पाए जाने के बाद 24 साल के लिए जेल भेज दिया गया।

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    इटली में कोरोना के केंद्र लॉम्बार्डी प्रांंत पर प्रशानस का ध्यान ही नहीं गया

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    इटली में जनवरी के अंत में कोरोना वायरस के तीन संदिग्ध केस सामने आए थे। इनमें दो चीनी पर्यटक थे। प्रशासन ने इन्हें अलग रखा और इनसे मिलने-जुलने वालों को भी ढूंढ लिया गया। मगर इसके बाद सरकार को लगा कि उसने इस वायरस पर काबू पा लिया है, लेकिन लॉम्बार्डी प्रांंत पर उसका ध्यान ही नहीं गया।

    लॉम्बार्डी में चुपचाप फैलता रहा वायरस, 92% मरीज की मौत यही हुईं

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    उत्तरी इटली का लॉम्बार्डी प्रांत इस देश का आर्थिक केंद्र माना जाता है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का आना-जाना भी खूब है। इस क्षेत्र में कोरोना वायरस चुपचाप तरीके से फैलता रहा और प्रशासन का इस ओर ध्यान ही नहीं गया। सरकार और स्वास्थ्य प्रशासन के बीच तालमेल की कमी साफ दिखी। कोरोना से लॉम्बार्डी, वेनेटो और एमिलिया रोमागा सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। 85 फीसदी संक्रमित मरीज इसी क्षेत्र से हैं और 92 फीसदी मौत के मामले भी यहीं से हैं।

    इटली यूरोप का सबसे बुजुर्ग देश और कोरोना के शिकार होते है बुजुर्ग

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    कोरोना वायरस के चीन में फैलने के साथ ही यह चीज स्पष्ट हो गई थी कि बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग इसकी चपेट में ज्यादा आते हैं। चीन में जिन लोगों की मौत हुई, उनमें 80 फीसदी की उम्र 60 से ज्यादा थी। इटली यूरोप का सबसे बुजुर्ग देश माना जाता है। यहां 65 साल से ज्यादा के लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। इटली के नागरिकों की औसत आयु 43.1 वर्ष है यानी यहां बुजुर्गों की संख्या बहुत ज्यादा है।

    इटालियन लोगों की पारंपरिक अभिवादन की परंपरा ने भी बढ़ाया कोरोना

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    कोरोना वायरस के बढ़ते डर की वजह से अब पूरी दुनिया नमस्ते को अपना रही है। इटली में अभिवादन का तरीका भारत से बिल्कुल अलग है। यहां किसी का अभिवादन करते वक्त दोनों गालों पर चूमा जाता है। इस वजह से लोग एक दूसरे के संपर्क में ज्यादा आए।

    ऐसे समझिए इटली का फैशन बाजार और चीन का कनेक्शन

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    इटली चमड़े के महंगे और खूबसूरत बैग के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। परादा, गुची, रॉर्बेटो कावाली जैसे ब्रांड की धूम विश्व में है। इटली के उत्पादों की चीन में भी बहुत मांग है। इसमें हर साल औसतन 21.3 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन इटली की बुजुर्ग होती आबादी की वजह से कई इटालियन कंपनियों ने चीन में इसका निर्माण कराना शुरू कर दिया है, जिससे चीन में इटली के लोगों की आवाजाही खूब बढ़ी है। वर्ष 2018 में जनवरी से अक्तूबर के बीच 12.3 करोड़ किलोग्राम चमड़े के उत्पाद इटली में आए। इनमें 60 फीसदी हिस्सेदारी चीन की ही थी।

    चीन के वुहान सिटी से मिलान तक है सीधी फ्लाइट

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    इटली में भी अधिकतर इटालियन लेदर प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियों में चीनी नागरिकों को रखा गया है। कई चीनी कंपनियों ने भी इटली के फैशन बाजार में अपनी पैठ बना ली है। उत्तरी इटली की फैक्टरियों में काम करने वाले कम से कम एक लाख लोग सीधे वुहान या वेंझोउ से हैं। माना जाता है कि वुहान से इटली सीधी उड़ान के चलते कोरोना वायरस इटली तेजी से पहुंचा है। इसी वजह से चीन के बाद इटली में कोरोना वायरस का प्रकोप इतना ज्यादा फैला है।

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