अमृतसर हादसा: कब, क्या और कैसे हुआ ?

अमृतसर हादसा
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पंजाब के अमृतसर में दशहरा मेले के दौरान एक बड़ा हादसा हुआ. शहर के करीब जोड़ा रेलवे फाटक के पास रावण के पुतले के दहन के वक़्त ट्रेन की चपेट में आकर कम से कम 62 लोगों की मौत हो गई.

पुलिस प्रशासन के मुताबिक इस हादसे में कम से कम 150 लोग घायल हुए हैं. घायलों को इलाज के लिए अमृतसर के अस्पतालों में दाखिल कराया गया है.

ये हादसा क्यों हुआ और इसमें किसकी ग़लती थी, ये पता लगाने के लिए पंजाब सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं.

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि वो शनिवार को अमृतसर जाएंगे. रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया.

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पंजाब सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डा. नवजोत कौर रावण दहन के कार्यक्रम में मौजूद थीं. मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि हादसे के बाद वो घटनास्थल से चली गईं लेकिन डा. नवजोत कौर ने इसे ग़लत बताते हुए सफाई दी है. डा. कौर का दावा है कि उन्हें कार्यक्रम ख़त्म होने तक हादसे की जानकारी नहीं थी.

कब क्या हुआ ?

  • अमृतसर रेलवे स्टेशन से करीब चार किलोमीटर दूर जोड़ा फाटक के पास दशहरा मेले के आयोजन किया गया था.
  • क़रीब सात हज़ार लोग रावण दहन के लिए मैदान में जमा हुए थे
  • इस मैदान की क्षमता दो से ढाई हज़ार लोगों की बताई जा रही है.
  • आम लोगों के लिए मैदान में जाने और आने का एक ही रास्ता था
  • मैदान के एक हिस्से में वीआईपी मेहमानों के लिए मंच बनाया गया था, जिसके पीछे से उनके आने-जाने की व्यवस्था थी
  • जिस समय हादसा हुआ उस समय पंजाब के मंत्री नवजोत सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर भी मौजूद थीं
  • प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि हादसे के बाद वो वहां से तुरंत निकल गईं
  • मैदान में ही एक दीवार है जो रेलवे लाइन और मैदान को अलग करती है. लोग दीवार और रेलवे ट्रैक पर मौजूद थे
  • हादसा शाम करीब साढ़े छह बजे हुआ लेकिन पुलिस और एंबुलेंस क़रीब एक घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंची.
  • क़रीब दस हज़ार लोग अब भी घटनास्थल पर मौजूद हैं.
  • अमृतसर के गुरुनानक अस्पताल, गुरु रामदास अस्पताल, फोर्टिस अस्पताल और पार्वती देवी अस्पताल मे चल रहा है घायलों का इलाज.

हादसे के बाद रेलवे को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. हालांकि रेल प्रशासन का दावा है कि रेलवे की ओर से पूरी सावधानी रखी गई थी.

दीपक कुमार, मुख्य प्रवक्ता, उत्तर रेलवे

ये हादसा अमृतसर और मानावाला के बीच लेवल क्रासिंग गेट पर हुआ. इस गेट से करीब 70-80 मीटर दूर दशहरा कार्यक्रम चल रहा था.

शाम करीब 6.40 बजे रावण दहन के वक़्त वहां पटाखे चले और रावण का पुतला नीचे गिरा तो वहां भगदड़ की स्थिति बन गई.

उस वक्त बड़ी संख्या में लोग क्रॉसिंग गेट की तरफ दौड़े. क्रॉसिंग गेट उस वक़्त बंद था. वहां से जालंधर से अमृतसर जाने वाली डीएमयू ट्रेन गुजरने वाली थी.

भगदड़ के बीच लोग रेलवे ट्रैक पर आ गए. ये कहा जा रहा है कि उसी वक़्त 3006 अमृतसर हावड़ा ट्रेन गुजरी लेकिन ये सही नहीं है. वो ट्रेन पहले ही निकल चुकी थी.

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डीएमयू ट्रेन भी जब गुजर रही थी तब सभी सावधानियों का ध्यान रखा गया था. क्रॉसिंग गेट को बंद किया गया था. इस हादसे में रेलवे की कोई ग़लती नहीं थी.

हमारी जानकारी के मुताबिक़ कार्यक्रम के लिए रेलवे से कोई अनुमति नहीं ली गई थी. ग़लती किसकी थी, इस बारे में जानकारी जांच के बाद सामने आएगी.

सवाल स्थानीय प्रशासन की तैयारियों को लेकर उठ रहे हैं.

एसएस श्रीवास्तव, कमिश्नर, अमृतसर

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कार्यक्रम के दौरान जब भगदड़ हुई, उसी वक़्त ये हादसा हुआ. प्रशासन सतर्क है. डिप्टी कमिश्नर राहत और बचाव काम की निगरानी कर रहे हैं. घायलों को इलाज मुफ्त दिया जा रहा है. इस कार्यक्रम की अनुमति ली गई थी या नहीं, इसके बारे में हमें जांच करनी होगी.

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह

ये घटना दुखद है. मैं कल सुबह (शनिवार) अमृतसर जा रहा हूं और पीड़ित परिवारों से मिलूंगा. राज्य सरकार अलर्ट है. घायलों को अस्पताल में दाखिल किया गया है. उनके इलाज का खर्च सरकार देगी. घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं. मुझे फिलहाल ये जानकारी नहीं है कि रेलवे ट्रैक के करीब ये कार्यक्रम क्यों रखा गया.

डा. नवजोत कौर, पंजाब सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी

नेताओं और विधायकों को हर जगह कार्यक्रम में जाना होता है. यहां हर साल कार्यक्रम होता है. कार्यक्रम ख़त्म होने के बाद मैं घर चली गई. उसके बाद मुझे जानकारी दी गई कि ये हो गया है. जब रावण जल रहा था तब पता ही नहीं चला कि ऐसा हो गया है.

लोग रेलवे ट्रैक पर बैठे थे या फिर वहां बैठकर वीडियो बना रहे थे. ऐसे हर कार्यक्रम में रेलवे से अनुमति ली जाती है. ट्रेन को बहुत धीमे आना चाहिए था. रास्ते में अगर कुछ आता है तो ये तय करना चाहिए कि ट्रेन रोकी जाए. या फिर ज़ोर ज़ोर से हॉर्न बजाना चाहिए जिससे लोग रास्ते से हट जाएं.

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