जम्मू कश्मीर के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों की रिहाई पर बोले शाह, ये फैसला मुझे नहीं करना है

नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों और दूसरे नेताओं की रिहाई का फैसला वो नहीं बल्कि स्थानीय प्रशासन लेगा। शाह ने कहा कि ये फैसला मुझे नहीं करना है, स्थानीय प्रशासन को लगेगा कि उनकी रिहाई कर दी जाए तो वो रिहा कर देगा। शाह ने कहा कि हमारी कोई इच्छा नहीं है कि किसी को जेल में रखा जाए। इन तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को इनके भड़काऊ बयान देने के चलते हिरासत में लेना पड़ा। एक टीवी इंटरव्यू में अमित शाह ने ये बात कही हैं।

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जम्मू कश्मीर के पूर्व तीन सीएम फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती बीते पांच महीने से हिरासत में है। 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करते हुए दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने और अनुच्छेद 370 निरस्त करने के फैसले के साथ ही हिरासत में ले लिया था।

तीनों नेताओं कि रिहाई को लेकर हुए सवाल पर शाह ने कहा कि उनकी ओर से इस तरह के बयान आए कि अनुच्छेद 370 को छुआ तो देश में आग लग जाएगी। इन बयानों को देखते हुए कुछ समय के लिए उन्हें हिरासत में रखने का फैसला लिया गया। जैसी ही प्रशासन को लगेगा कि उनकी रिहाई से कानून व्यवस्था को कोई परेशानी नहीं होगी तो उन्हें छोड़ दिया जाएगा। शाह ने ये भी कहा कि कोई भी इन नेताओं को एंटीनेशनल या देश के खिलाफ नहीं कह रहा है।अमित शाह ने ये भी दावा किया है कि कश्मीर घाटी में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और हर दिन जन-जीवन सुचारू रूप से चल रहा है। कश्मीर में आज कहीं एक इंच जगह पर भी कर्फ्यू नहीं है।

बता दें कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने का ऐलान किया था। सरकार ने राज्य से आर्टिकल 370 खत्म कर इसे दो केंद्र शासित राज्यों में बांटने का फैसला किया था। फैसले के ऐलान के साथ ही ना सिर्फ संचार साधनों पर पाबंदिया लगाई गई थीं। जिसमें कुछ बाद में हटा ली गईं। हालांकि इंटरनेट अभी भी पूरी तरह से बंद है। 5 अगस्त को ही राज्य के (भाजपा के ज्यादातर नेताओं को छोड़कर), खासतौर से घाटी में प्रभाव रखने वाले ज्यादातर पार्टियों के नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था। वहीं सैकड़ों सामाजिक और राजनैतिक कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार नेताओं में तीन पूर्व मुख्यमंत्री, नेशनल कांफ्रेंस के फारूक और उमर अब्दुल्ला, और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं। इसके अलावा दर्जनों पूर्व मंत्री, सांसद, विधायक नेता कार्यकर्ताओं को अगस्त महीने से हिरासत में रखा गया है।

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