Amit Shah जम्मू कश्मीर दौरा करेंगे! LOC के पास शारदा देवी मंदिर का वर्चुअल उद्घाटन किया

Amit Shah Maa Sharda Devi Temple का वर्चुअल उद्घाटन करने के बाद जम्मू कश्मीर दौरे को लेकर बोले, वे जल्द ही प्रदेश का दौरा करेंगे। उन्होंने बुधवार को भारत पाकिस्तान की सीमा के पास बने शारदा देवी मंदिर का उद्घाटन किया।

Amit Shah

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने अगस्त, 2019 में संसद में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन कानून के माध्यम से प्रदेश को दो हिस्सों में बांटने और इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाने का ऐलान किया। अब करीब 44 महीने के बाद गृह मंत्री शाह ने दावा किया कि प्रदेश में शांति बहाल हुई है। शाह ने नियंत्रण रेखा (LoC) के करीब मां शारदा देवी मंदिर के उद्घाटन के मौके पर ये बात कही।

शारदा देवी मंदिर में मत्था टेकेंगे शाह

गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कश्मीर के कुपवाड़ा में करनाह सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LOC) के पास माता शारदा देवी मंदिर का वर्चुअल उद्घाटन करने के बाद कहा, मंदिर का उद्घाटन शारदा संस्कृति को पुनर्जीवित करने की खोज की शुरुआत है। उन्होंने कहा, वह अपने अगले कश्मीर दौरे की शुरुआत माता शारदा देवी मंदिर में मत्था टेककर करेंगे।

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    अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद कश्मीर में शांति

    शारदा देवी मंदिर के वर्चुअल उद्घाटन के बाद शाह ने कहा, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद केंद्र शासित प्रदेश को उसकी पुरानी परंपराओं और संस्कृति में वापस ले जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिर का खुलना नई सुबह की शुरुआत है। करतारपुर कॉरिडोर की तर्ज पर नियंत्रण रेखा के पार शारदा पीठ खोलने की मांग का जिक्र करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र निश्चित रूप से इस पर प्रयास करेगा। अमित शाह ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद कश्मीर में शांति स्थापित हुई है। इस फैसले के बाद घाटी के साथ-साथ जम्मू भी अपनी पुरानी परंपराओं, संस्कृति और गंगा-जमुनी तहजीब की ओर वापस आ रहा है।

    पीओके में शारदा पीठ मंदिर

    केंद्रीय मंत्री ने कुपवाड़ा जिले में मंदिर के उद्घाटन के लिए पीओके के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर दोनों तरफ पंडितों के नेतृत्व में नागरिक समाज के सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में शारदा पीठ मंदिर की सदियों पुरानी तीर्थ यात्रा को पुनर्जीवित करने और प्राचीन मंदिर के केंद्र का पुनर्निर्माण किया जा रहा है।

    65 करोड़ रुपये की लागत से 35 स्थानों का जीर्णोद्धार

    शारदा पीठ देवी सरस्वती का कश्मीरी नाम है। यह भारतीय उपमहाद्वीप के अग्रणी प्राचीन विश्वविद्यालयों में से एक था। मोदी सरकार के प्रयासों के बारे में गृह मंत्री शाह ने कहा, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की प्रतिबद्धता के अनुरूप, मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर के सभी क्षेत्रों में प्रयास कर रही है। इसमें संस्कृति का पुनरुद्धार भी शामिल है। इसके तहत 123 चिह्नित जगहों पर व्यवस्थित जीर्णोद्धार और मरम्मत के काम हो रहे हैं। इसमें कई मंदिर और सूफी स्थल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में 65 करोड़ रुपये की लागत से 35 स्थानों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।

    देश भर के श्रद्धालुओं के लिए शुभ संकेत

    इससे पहले गृह मंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में देशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, ''आज नववर्ष के अवसर पर मां शारदा के नवनिर्मित मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है और यह देश भर के श्रद्धालुओं के लिए शुभ संकेत है।" शाह ने कहा कि शारदा पीठ के तत्वावधान में मां शारदा के मंदिर का जीर्णोद्धार वास्तुकला और पौराणिक निर्माण शास्त्रों के अनुसार किया गया है।

    शारदा-सभ्यता और शारदा-लिपि का प्रचार

    उन्होंने कहा कि श्रृंगेरी मठ द्वारा दान की गई शारदा मां की मूर्ति को 24 जनवरी से यात्रा पर यहां लाया गया है। इसके बाद मंदिर यहां स्थापित किया गया है। कुपवाड़ा में मां शारदा के मंदिर का पुनर्निर्माण शारदा-सभ्यता और शारदा-लिपि के प्रचार और खोज की दिशा में एक आवश्यक और महत्वपूर्ण कदम है।"

    मां शारदा का दाहिना हाथ गिरा, शक्तिपीठ बना

    शाह ने कहा कि एक समय में शारदा पीठ को भारतीय उपमहाद्वीप में ज्ञान का केंद्र माना जाता था और देश भर से विद्वान शास्त्रों और आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में यहां आते थे। उन्होंने कहा कि शारदा लिपि कश्मीर की मूल लिपि है, जिसका नामकरण भी माता (शारदा देवी) के नाम के आधार पर किया गया है। उन्होंने कहा, "यह महाशक्ति पीठों में से एक है और मान्यताओं के अनुसार, माँ सती का दाहिना हाथ यहाँ गिरा था।"

    LG मनोज सिन्हा के नेतृत्व में जम्मू कश्मीर

    मां शारदा मंदिर के उद्घाटन समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी मौजूद रहे। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक निवेश लाने में बड़ी भूमिका निभाई है। बकौल शाह, "आज की यह शुरुआत इस स्थान की खोई हुई भव्यता को वापस लाने में मदद करेगी और यह स्थान युगों-युगों तक भारत में मां शारदा की आराधना और उनसे प्रेरित चेतना के जागरण का केंद्र बना रहेगा।"

    44 महीने में कैसे बदला जम्मू कश्मीर

    बता दें कि केंद्र सरकार ने संसद में 5 अगस्त, 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 और आर्टिकल 35 (ए) को निरस्त कर दिया था। इस फैसले के बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में अस्तित्व में हैं। जम्मू कश्मीर में विधानसभा है, जबकि लद्दाख में विधानसभा नहीं है।

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