चाणक्य की धरती पर फेल हो गए बीजेपी के 'चाणक्य' शाह
पटना। बिहार राजनीति, कूटनीति और अर्थशास्त्र का पंडित माने जाने वाले चाणक्य की धरती है। इस धरती ने दुनिया को चाणक्य जैसा विद्वान दिया जिसने चंद्रगुप्त मौर्य को पाटिलपुत्र पर राज करने के तरीकों और राजनीति के रहस्यों से रूबरू करवाया था।

लेकिन शायद बीजेपी के 'चाणक्य' जब यहां पर आए तो वह गणित को समझ ही नहीं सके। यहां बात हो रही है अमित शाह की जिन्हें लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मिले चुनावों के बाद बीजेपी का 'चाणक्य' करार दिया जाने लगा था।
'स्वजनों' पर नहीं रोक-टोक
चाणक्य के मुताबिक 'स्वजन' में मंत्री और करीबी सभी लोग शामिल होते हैं। अगर इन स्वजनों में कोई भी गलत कर रहा हो तो उसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
पढ़ें-पिछले बिहार चुनावों में किसे मिली थीं कितनी सीटें
बिहार में तो लगता है कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं और अनाप-शनाप बयानबाजी शायद बीजेपी के लिए काल साबित हो गई। आखिरी दौर की वोटिंग से पहले हुई चुनावी रैली में अमित शाह ने कहा था, 'अगर बीजेपी चुनाव हारी तो पाकिस्तान में पटाखे बजेंगे।'
उनके इस बयान पर काफी विवाद तो हुआ ही लेकिन पार्टी के किसी भी नेता ने अपने अध्यक्ष के इस बयान को खारिज नहीं किया।
'साधारण आग चंदन के जंगल को भी जला देती है'
बिहार चुनावों में बीजेपी और शाह ने अगर कोई सबक नहीं लिया तो फिर शायद आगे आने वाले दिन उनके लिए मुश्किल हो सकते हैं। अभी कई राज्यों में चुनाव होने हैं और यह नतीजे काफी असर डाल सकते हैं।
कम से कम चाणक्य ने तो यही कहा था, 'एक साधारण सी आग चंदन के पूरे जंगल को भी खाक कर सकती है।' केंद्र में आने के 18 माह के अंदर किसी राज्य में हुए चुनावों में पार्टी को मिली अब तक की सबसे करारी हार है।
तेजस्वी की हार और जीत के मायने
न सिर्फ पार्टी बल्कि खुद शाह भी नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर क्या हुआ जो उनके धुआंधार कैंपेन के बाद भी पार्टी हार गई। मध्य प्रदेश, हरियााणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र और कई अहम राज्यों में मिली जीत के सिलसिले पर लगाम लग गई है।
उत्तर प्रदेश ने किया था इशारा
अगला निशाना उत्तर प्रदेश है और अब शाह को अपनी रणनीति में शायद थोड़ा बदलाव करना पड़े। यह चुनाव न सिर्फ पार्टी बल्कि शाह को भी नींद से जगाने के लिए काफी हैं।
उत्तर प्रदेश में कुछ ही दिनों पहले पंचायत चुनाव हुए हैं और उनके नतीजों ने पहले ही बीजेपी को एक इशारा कर दिया था। इन चुनावों में बीजेपी को करारी हार मिली। साथ ही साथ देश के इस सबसे बड़े राज्य में हुए कुछ उपचुनावों में भी बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा है।
उत्तर प्रदेश की सत्ता से बीजेपी पिछले करीब डेढ़ दशक से गायब है और अगर वापस इस राज्य में अपनी धमक दर्ज करानी है तो गलतियों से सीख लेनी होगी।












Click it and Unblock the Notifications