सपा-बसपा गठबंधन को मुलायम सिंह ने सहमति दी थी, मायावती के साथ मंच साझा करेंगे- अखिलेश यादव
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में जिस तरह से सपा और बसपा के बीच गठबंधन हुआ है उसको लेकर समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव ने बड़ा बयान दिया है। अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह याद इस गठबंधन के फैसले से खुश हैं और उन्होंने खुद मायावती की पार्टी के साथ गठबंधन को अपनी हरी झंडी दी थी। एक साक्षात्कार में अखिलेश यादव ने कहा कि मुलायम सिंह यादव सपा-बसपा के गठबंधन से खुश थे, क्योंकि उन्हें पता था कि देश खतरे में है। अखिलेश ने साथ ही यह भी साफ किया है कि मुलायम और मायावती एक साथ चुनाव प्रचार के दौरान मंच साझा करेंगे।

रैलियों में शामिल होंगे मुलायम
अखिलेश यादव ने कहा कि हमने कई रैलियों की योजना बनाई है, हम एक साथ मैनपुरी में चुनावी रैली को संबोधित करेंगे, जिसमे मुलायम सिंह यादव भी मंच को साझा करेंगे। वहीं जब अखिलेश यादव से पूछा गया कि क्या मुलायम सिंह यादव ने पहले मायावती से कभी बात की तो उन्होंने कहा कि जब पिछले वर्ष उपचुनाव में पार्टी ने जीत दर्ज की थी तो मुलायम सिंह ने मायावती को बधाई दी थी। बता दें कि गोरखपुर उपचुनाव में सपा उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी, इससे पहले यह सीट 1998 से योगी आदित्यनाथ के पास थी।

परिवार के लिए नहीं शर्मिंदगी
जिस तरह से इस बार चुनाव में रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय प्रताप सिंह और मुलायम सिंह के भाई शिवपाल यादव फिरोजाबाद में एक दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं उसपर अखिलेश यादव ने कहा कि यह परिवार के लिए शर्मिंदगी का विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि नेताजी ने पहले ही अक्षय यादव को बधाई दी है।

कांग्रेस में घमंड
अखिलेश यादव ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस घमंडी पार्टी है, कांग्रेस और भाजपा एक ही तरह का बर्ताव करते हैं, उन्हें यह नहीं पता है कि लोगों को सम्मान कैसे दें। मैं यह सकता हूं इस बार के चुनाव में हम कांग्रेस के साथ नहीं रहेंगे। ये लोग अपनी पार्टी को प्रदेश में मजबूत करने में ज्यादा इच्छुक हैं बजाए भाजपा को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के।

किसानों और गरीबों के लिए गठबंधन
अखिलेश यादव ने कहा कि यह गठबंधन किसानों और गरीबों के लिए हुआ है, गरीब और किसान ही देश का सही मायने में प्रतिनिधित्व करते हैं। भाजपा इस चुनाव में पूरी तरह से भ्रमित है क्योंकि पार्टी को यह पता है कि उसे इस चुनाव में वोट नहीं मिलेगा। यही वजह है कि ये लोग राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और धार्मिक ध्रुवीकरण की बात कर रहे हैं।












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