PM के 'आंदोलनजीवी' बयान पर बोले अखिलेश- क्या चंदा लेने वाले 'चंदाजीवी संगठन' के सदस्य नहीं?
नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान 'आंदोलनजीवी' को लेकर सरकार पर बरसे हैं। मंगलवार को लोकसभा में बोलते हुए अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आंदोलन को लेकर दिए गए बयान पर निशाना साधा है। उन्होंने 'आंदोलनजीवी' कहे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'अब जो घर घर जाकर चंदा ले रहे हैं, क्या वे चंदाजीवी संगठन के सदस्य नहीं है'? बता दें, अखिलेश यादव इससे पहले ट्वीट कर भी इस बयान पर अपना विरोध जता चुके हैं।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को लोकसभा में कृषि कानून को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कानून किसानों के लिए है और जब किसान ये कानून नहीं चाहते तो, इसे वापस क्यों नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्र ने आंदोलन के जरिए स्वतंत्रता प्राप्त की। आंदोलन के माध्यम से असंख्य अधिकार प्राप्त हुए। महिलाओं को आंदोलन के माध्यम से मतदान का अधिकार प्राप्त हुआ। महात्मा गांधी राष्ट्र के पिता बने, क्योंकि उन्होंने अफ्रीका, देश और विश्व में आंदोलन किया। अखिलेश ने पीएम मोदी द्वारा 'आंदोलनजीवी' वाले बयान पर कहा, 'आंदोलन के बारे में क्या कहा जा रहा है? वे लोग आंदोलनजीवी हैं। मुझे उन लोगों को क्या कहना चाहिए जो दान लेने के लिए बाहर जाते हैं? क्या वे चंदा जीवी संगठन के सदस्य नहीं है?'
अखिलेश ने आगे कहा, 'कल मैंने एमएसपी था, एमएसपी है और एमएसपी रहेगा सुना। यह सिर्फ भाषण में है, लेकिन जमीन पर नहीं। किसानों के यह नहीं मिल रहा है। मैं आंदोलनकारी किसानों को बधाई देता हूं कि उन्होंने पूरे भारत के किसानों के जगाया।'
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा था?
पीएम मोदी ने सोमवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के तहत हुई चर्चा का जवाब दिया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष पर कई बार तंज कसे। उन्होंने कहा, 'हम लोग कुछ शब्दों से बड़े परिचित हैं। श्रमजीवी, बुद्धिजीवी, ये सारे शब्दों से परिचित हैं, लेकिन मैं देख रहा हूं कि पिछले कुछ समय से इस देश में एक नई जमात पैदा हो गई है और वो है आंदोलनजीवी। ये जमात आप देखोगे वकीलों का आंदोलन है, वहां नजर आएंगे, स्टूडेंट का आंदोलन है वो वहां नजर आएंगे, मजदूरों का आंदोलन है वो वहां नजर आएंगे। कभी पर्दे के पीछे कभी पर्दे के आगे। ये पूरी टोली है जो आंदोलनजीवी है। वो आंदोलन के बिना जी नहीं सकते हैं। हमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा। ये आंदोलनजीवी दरअसल परजीवी होते हैं।'












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