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जब बालाकोट में बम बरसा रहे थे मिराज तो 'नेत्र' भारत की सीमा में रहकर रख रहा था नजर

नई दिल्‍ली। 26 फरवरी को इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) ने पाकिस्‍तान के बालाकोट में हवाई हमला किया। हमला आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद के ठिकानों में मौजूद आतंकियों को निशाना बनाते हुए किया गया था। इन हमलों के लिए आईएएफ ने मिराज 2000 फाइटर जेट्स को चुना था। सन्1971 की जंग के बाद आईएएफ, लाइन ऑफ कंट्रोल (आईएएफ) पार करके पाकिस्‍तान पहुंची थी और उसने आतंकियों को निशाना बनाया था। इस पूरे हमले में एयरफोर्स ने एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल (अवॉक्‍स) एयरक्राफ्ट का प्रयोग किया। इस एयरक्राफ्ट को गाइड किया नेत्र एक अर्ली वॉर्निंग वॉर प्‍लेन है और पूरी तरह से भारत में ही निर्मित है।

मिराज की आंखें और दिमाग बना नेत्र

मिराज की आंखें और दिमाग बना नेत्र

नेत्र ही हमलों के दौरान मिराज 2000 की आंखें और उनका दिमाग था। आईएएफ के मिराज जेट 26 फरवरी को एलओसी से करीब 80 किलोमीटर दूर बालाकोट तक गए थे। यह हमला पुलवामा में14 फरवरी को हुए आतंकी हमले का जवाब था। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। हमले को जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकियों ने अंजाम दिया था। यह प्लेन इतना ताकतवर है कि पायलट्स को आने वाले मिसाइलों के बारे में भी जानकारी देकर उन्‍हें अलर्ट कर देता है। इसकी डिटेक्‍शन क्षमता को सर्वश्रेष्‍ठ माना जाता है और यह इतनी ताकतवर है कि हवा में आती मिसाइलों का पता भी सेकेंड्स में लगा सकती है।

500 किलोमीटर बैठा दुश्‍मन भी दायरे में

500 किलोमीटर बैठा दुश्‍मन भी दायरे में

नेत्र को भारत में ही नि‍र्मित इलेक्‍ट्रॉनिक और हार्डवेयर की मदद से तैयार किया गया है। नेत्र को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानी डीआरडीओ की ओर से बनाया गया है। बेंगलुरु में इस एयरबॉर्न सिस्‍टम का केंद्र है और जिस समय इसे तैयार किया जा रहा था डीआरडीओ के मुखिया एस क्रिस्‍टोफर थे। उनकी देखरेख और उनके निर्देश में नेत्र का निर्माण हुआ। सूत्रों की मानें तो नेत्र 450 से 500 किलोमीटर की दूरी पर स्थित टारगेट को भी ट्रैक कर सकता है। जिस समय यह हवा में होता है तो 120 डिग्री से भी दुश्‍मन के अड्डे का पता लगा सकता है।

पाकिस्‍तान सेना की हर प्‍लानिंग को सुन सकता है नेत्र

पाकिस्‍तान सेना की हर प्‍लानिंग को सुन सकता है नेत्र

नेत्र, रडार के सिग्‍नल को डिटेक्‍ट कर सकता है। इसके साथ ही पाकिस्‍तान की सेनाओं के बीच में होने वाली हर बातचीत को भी यह आसानी से सुन सकता है। यह किसी भी तरह के एक्टिव कैमरा से लैस नहीं है लेकिन इसमें जो इलेक्‍ट्रॉनिक इंटेलीजेंस वाली ही डिवाइस लाइव इंफॉर्मेशन तक भेजने में सक्षम है। दिल्‍ली स्थित राष्‍ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी संस्‍थाएं नेत्र की ओर से भेजे गए डाटा की मदद से लाइव ऑपरेशंस तक देख सकती हैं। एयरफोर्स के पास दो नेत्र एयरक्राफ्ट हैं और तीसरे का टेस्‍ट जारी है। तीसरा एयरक्राफ्ट पहले की तुलना में ज्‍यादा एडवांस्‍ड है।

साल 2007 में शुरू हुआ डेवलपमेंट

साल 2007 में शुरू हुआ डेवलपमेंट

साल 2007 में नेत्र का डेवलपमेंट शुरू हुआ था और इसकी लागत करीब 2,460 करोड़ रुपए थी। साल 2017 में नेत्र का लेटेस्‍ट वर्जन एयरफोर्स को दिया गया था। नेत्र पांच घंटे तक हवा में रह सकता है और अगर इसे रि-फ्यूल किया जाए तो यह नौ घंटे तक फ्लाई कर सकता है। अवॉक्‍स पांच फ्लाइट कंट्रोल को संभाल सकता है। दिल्‍ली तक इस बात की जानकारी मिल सकती है कि नेत्र के पास कौन सा डाटा है और वह क्‍या देख रहा है। इस एयरक्राफ्ट को सैटेलाइट बेस्‍ड प्‍लेटफॉर्म से भी ऑपरेट किया जा सकता है। हाल ही में आईएएफ को जीसैट-7ए सैटेलाइट मिला है जिसे इसरो की ओर से तैयार किया गया था। डीआरडीओ ने नेत्र को श्रीनगर और लेह में भी टेस्‍ट किया है।

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