AIIMS: 41.7 फीसदी बच्चे कोविड के चलते डिप्रेशन के शिकार, 22.5 फीसदी में बहुत ज्यादा डर की भावना
नई दिल्ली, 6 जुलाई: कोरोना के चलते बच्चों पर क्या मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा है, इसपर दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की एक स्टडी आई है, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस स्टडी के मुताबिक कोविड 19 के चलते कम से कम 22.5 फीसदी बच्चों में बहुत ज्यादा डर की भावना पैदा हुई है और 42.3 फीसदी बच्चे चिड़चिड़ाहट और ध्यान नहीं लगने जैसा दिक्कतें पैदा हुई हैं। यही नहीं 41.7 फीसदी बच्चे डिप्रेशन की भी परेशानी झेल रहे हैं।

41.7 फीसदी बच्चों को कोविड के चलते डिप्रेशन
एम्स के शोध के मुताबिक जिन बच्चों में पहले से व्यवहार से जुड़ी समस्याएं हैं, उनके लक्षणों के और बिगड़ने की संभावना बढ़ गई है। इस स्टडी का टाइटल 'साइकोलॉजिकल एंड बिहेवियरल इंपैक्ट ऑफ लॉकडाउन एंड क्वारंटीन मेजर्स फॉर कोविड-19 चिल्ड्रेन ऑन पैंडेमिक, एडोलसेंट्स एंड केयरगिवर्स' है। स्टडी में पाया गया है कि दो साल के बच्चे भी कोविड की वजह से उनके आसपास हुए बदलावों को समझ रहे हैं। यह शोध 10 देशों के 22,996 बच्चों और किशोरों पर 15 तरह की स्टडी पर आधारित है। इनमें कुल मिलाकर 34.5 फीसदी बच्चे चिंता, 41.7 फीसदी डिप्रेशन, 42.3 फीसदी चिड़चिड़ापन और 30.8 फीसदी ध्यानहीनता के शिकार पाए गए।
79.4 फीसदी बच्चों पर नकारात्मक असर
एम्स की डिपार्टमेंट ऑफ पीडियाट्रिक्स की फैकल्टी डॉक्टर शेफाली गुलाटी ने इसकी अगुवाई की है। उन्होंने कहा है, 'वैसे तो पैंडेमिक और क्वारंटीन की वजह से कुल 79.4 फीसदी बच्चों के व्यवहार और मनोवैज्ञानिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ा है, कम से कम 22.5 फीसदी बच्चों में कोविड-19 का बहुत ज्यादा डर देखा गया और 35.2 फीसदी बच्चों में ऊबने की शिकायत मिली और 21.3 फीसदी को नींद में भी दिक्कत आ रही थी।' डॉक्टर गुलाटी का कहना है, 'कोविड 19 महामारी के दौरान बच्चों में चिंता, अवसाद, चिड़चिड़ाहट, ऊबना, ध्यान नहीं दे पाना और डर की बहुत ज्यादा मनोवैज्ञानिक परेशानी पैदा हुई है, लेकिन जिन बच्चों में पहले से ऑटिज्म और अटेंशन डेफिसिट हाइपरऐक्टिवटी डिजॉर्डर जैसी दिक्कतें हैं, उनमें यह लक्षण और बिगड़ने की संभावना है।'
इस शोध का निष्कर्ष ये है कि बच्चों पर पड़ने वाले लंबे समय के मनोवैज्ञानिक असर को कम करने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों को उनकी उम्र और बाकी बातों को ध्यान में रखकर एक उचित रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है।












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