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Ahmedabad Plane Crash: ‘हादसा तो होना ही था’, एक्सपर्ट ने कर दी थी भविष्यवाणी, DGCA ने किया नजरअंदाज

Ahmedabad Plane Crash: अहमदाबाद में बड़ा प्लेन हादसा हुआ है, जिसमें बड़ी जनहानि की संभावना है। विमान में कुल 242 लोग थे, जो अलग-अलग देशों के थे। इसमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी भी सवार थे। इसमें लोगों के बचने की संभावना कम ही है। ऐसे में एविशन एक्सपर्ट यशवंत शिनॉय ने वन इंडिया के साथ बात की और कहा कि 'ये हादसा होना ही था क्योंकि DGCA बहुत सी खामियों को नजरअंदाज कर रहा है'। इसके पीछे उन्होंने कुछ कारण भी बताए।

Ahmedabad Plane Crash

1. इन्फ्रास्ट्रक्चर-

एविएशन एक्सपर्ट यशवंत शिनॉय के मुताबिक 'एयरपोर्ट के पास एक तय दूरी तक एरिया खाली रखा जाता है, लेकिन भारत के ज्यादातर एयरपोर्ट्स पर इस बात का पालन नहीं होता। दिल्ली और मुंबई जैसे एयरपोर्ट तो घनी बसाहट के बीच हैं। सूरत एयरपोर्ट के पास कई बिल्डिंग्स पर कोर्ट में मामला लंबित है फिर भी उनमें लोग रहते हैं। दिल्ली के वसंत कुंज इलाके की कुछ बिल्डिंग्स पर भी इसी तरह के सवाल भी उठे हैं जिनको लेकर कोर्ट तक में मामला गया। नतीजा आप सबके सामने है। कितनी बिल्डिंग को हटाया गया और कितनी को नहीं आप खुद देख सकते हैं।'

2. पायलट्स पर दबाव-

विमानन एक्सपर्ट यशंवत शिनॉय ने बताया 'पैसेंजर विमानों के पायलट्स पर विमान कंपनियों की तरफ से फ्यूल बचाने का भीषण दबाव होता है। उन्हें टॉबल टॉप रनवे पर भी फ्लैप-4 लैंडिंग (जिस लैंडिंग में ज्यादा फ्यूल लगता है ताकि लैंडिंग सैफ हो सके) उसे ना करने का दवाब रहता है। इसको लेकर मणिपुर और दूसरे टेबल टॉप एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट ले जाने वाले पायलट्स पर ये दबाव अब सामान्य बन चुका है।'

3. रन-वे-

'देश में एयरपोर्ट पर रनवे की गुणवत्ता पर कोई सवाल नहीं है लेकिन उनके पास इतना कुछ बना है कि उनका इस्तेमाल करने में पायलट्स को मुश्किल होती है। जैसे मुंबई एयरपोर्ट के रनवे नंबर 16 और रनवे नंबर 34 को ब्रिटिश एयरवेज और सिंगापुर एयरलाइन्स के पायलट्स ने ब्लैक लिस्ट कर रखा है। इनके मुताबिक इन रनवे पर टैक ऑफ और लैंडिंग के समय बिल्डिंग्स आने का खतरा रहता है। जबकि इंडियन पायलट्स पर इन रनवे का प्रेशर रहता ही होगा। हाल यह है कि दिल्ली के आईजीआई एय़रपोर्ट पर एशिया का सबसे बड़ा रनवे है लेकिन इसका एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल नहीं हो सकता क्योंकि सामने एक स्टैच्यू है।'

4. फ्लाइट का इंजन-

यशवंत बताते हैं कि 'भारत में पूर्व में कई फ्लाइट्स में ऐसे इंजन का इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिन्हें दुनिया की बड़ी एयरलाइन कंपनियों ने बैन किया है। बावजूद इसेक भारत में इन इंजन्स का इस्तेमाल धड़ल्ले से जारी है। भारत में कुछ पैसेंजर विमानों में इन इंजन्स का इस्तेमाल हो रहा है।'

5. पार्ट्स एक्सचैंज-

'एविशन में पार्ट्स एक्सचेंज करने की मनाही है। जैसे- अगर एक प्लेन का कोई टेक्नीकल पार्ट खराब हो गया या ठीक से काम नहीं कर रहा तो नियम के मुताबिक उसके लिए नया पार्ट्स मंगाकर ही लगाना पड़ेगा। लेकिन भारत में कुछ कंपनियां अपने पुराने विमानों जो कि इस्तेमाल में नहीं हैं उनके पार्ट्स निकालकर उन्हें जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल कर रही हैं। यशंवन ने इसमें गो-फर्स्ट विमान कंपनी (यह कंपनी बंद हो चुकी है) का नाम लेकर दावा किया यह अकेली कंपनी नहीं है जो ऐसा करती थी। इसके अलावा और भी कंपनियां ऐसा करती रहती हैं और DGCA इनको अनदेखा करता रहता है।'

6. स्टाफ की कमी-

'लगभग हर भारतीय एयरलाइन स्टाफ की कमी रखकर अपनी सेवाएं दे रही हैं। पायलट्स से ओवरटाइम कराया जा रहा है और फ्लाइट इंजीनियर के नाम पर नोसिखिए टेकनीशियन हायर किए जा रहे हैं ताकि पैसा बचाया जा सके। इसके अलावा कम ग्राउंड स्टाफ और मैंटिनेंस इंजीनियर के चलते कई लापरवाहियां बरती जा रही हैं।'

एक्सपर्ट द्वारा उठाए गए इन प्वॉइंट्स पर आपकी क्या राय है, हमें कॉमेंट में बताएं।

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