बालासोर रेल हादसे के बाद बदल सकती है रेलवे की पूरी रणनीति, क्या रुकेगी नई ट्रेनों की रफ्तार?

बालासोर हादसे के बाद रेलवे की पूरी रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि अब रेलवे ट्रेनों के इंफ्रास्ट्रक्चर की बजाए सुरक्षा पर अधिक ध्यान देगी।

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Balasore Train Accident Setback: भारत में रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 30 बिलियन डॉलर खर्च किए जा रहे हैं, ताकि नई ट्रेनों का संचालन किया जा सके. आधुनिक सुविधा सै लैस रेलवे स्टेशन बनाए जा सके।

लेकिन जिस तरह से बालासोर रेल हादसा सामने आया है, वह इस पूरे बदलाव की प्रक्रिया को बाधित कर सकता है। एक्सपर्ट का कहना है कि इस रेल हादसे के बाद अब रेलवे को सुरक्षा ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

बालासोर हादसे में 288 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है जबकि 900 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। इस हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। पिछले कई दशकों में इतना बड़ा रेल हादसा नहीं हुआ था। एक साथ तीन ट्रेनों के पटरी से उतरने की वजह से यह हादसा और भी भीषण हो गया।

भारतीय रेल दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल सेवा है, यहां 13 मिलियन लोग रोजाना ट्रेन में सफर करते हैं, जबकि 1.5 बिलियन टन का माल ढोया जाता है। लिहाजा भारतीय रेल को एक तरह से देश की धड़कन भी कहा जाता है।

दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश भारत में 170 साल पुरानी ट्रेन सेवा चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ट्रेनों की रफ्तार को लगातार बढ़ाने, इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, बढ़ती अर्थव्यवस्था में रेल नेटवर्क को मजबूत करने का काम चल रहा है।

इस साल सरकार ने रिकॉर्ड 2.4 ट्रिलियन रुपए कैपिटल एक्सपेंडिचर का लक्ष्य रखा है। जोकि पिछले साल की तुलना में 50 फीसदी अधिक है, इस खर्च के जरिए रेलवे को नए ट्रैक अपग्रेड, भीड़ को कम करने और नई ट्रेनों के संचालन में मदद मिलेगी।

भारत में नई सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। वंदे भारत की कई पहली ट्रेनों के उद्घाटन के मौके पर खुद प्रधानमंत्री मोदी ने सफर किया है। लेकिन शुक्रवार को हुए हादसे के बाद इस पूरे बदलाव को एक बड़ा झटका लगा है

किरोडीमल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के मुखिया प्रकाश कुमार सेन ने कहा कि सुरक्षा के रिकॉर्ड लगातार बेहतर हो रहे हैं लेकिन इस दिशा में और भी करने की जरूरत है। मानवीय गलती या फिर ट्रैक के रखरखाव में खामी की वजह से इस तरह के हादसे होते हैं।

लगातार बढ़ती मांग की वजह से रेलवे अधिक से अधिक ट्रेनों का संचालन करके लोगों को सुविधा देने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस बढ़ते ट्रेन संचालन के बीच इसको संभालने वाले लोगों की संख्या में इजाफा नहीं हो रहा है। जहां हादसा हुआ है वह ट्रैक काफी पुराना है, वहां लोड काफी ज्यादा है, अगर रखरखाव अच्छा नहीं है तो हादसे होंगे।

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रेलवे मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि प्रति मिलियन ट्रेन किलोमीटर हादसे की बात करें तो इसमे 2013-14 की तुलना में गिरावट आई है, यह 0.10 से घटकर 2021-22 में 0.03 तक आ गई है।

2017-18 में पांच साल के लिए 1 ट्रिलियन रुपए का बजट पांच साल के लिए रेल सुरक्षा के लिए आवंटित किया गया था, जिसके बाद में बढ़ाकर 450 बिलियन रुपए कर दिया गया था। कुछ खामिया हुई हैं, जो जांच के बाद सामने आएगी। हम पता करेंगे कि आखिर क्या हुआ था।

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