मणिपुर में बिगड़ रहे हालात, केंद्रीय बल की 20 अतिरिक्त कंपनियां पहुंची, 6 लोगों का अपहरण
मणिपुर में एक बार फिर से हालात चिंताजनक होने लगे हैं। जिस तरह से मणिपुर में फिर से हिंसा देखने को मिली है, उसे देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने CAPF की 20 अतिरिक्त कंपनी भेजने का फैसला लिया है, जिसमे 2000 जवान शामिल हैं। गौर करने वाली बात है कि तीन महिलाओं और तीन बच्चों का जिरिबम जिले से कुछ हथियारबंद विद्रोहियों ने अपहरण कर लिया। दो दिन बीत जाने के बाद भी उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।
अधिकारियों ने बताया कि पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। इंफाल में अपहरण के खिलाफ लोगों ने पूरी तरह से बंद का ऐलान किया हुआ है, यहां दो बुजुर्ग लोगों की 11 नवंबर की हत्या कर दी गई।

दरअसल विद्रोहियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच फायरिंग के दौरान ये दोनों लोग लापता हो गए थे, लेकिन बाद में इनके शव बरामद किए गए थे। गौर करने वाली बात है कि जो लोग लापता हैं उनमे तीन महिलाएं जिनकी उम्र 25, 31, 66 वर्ष है, दो बच्चे 10 वर्ष और 2 वर्ष के हैं और एक 8 माह का बच्चा भी इसमे शामिल है। विद्रोहियों ने इनका अपहरण कर लिया है, जिनके बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
20 अतिरिक्त कंपनियां पहुंचने के साथ ही मणिपुर में सीएपीएफ कर्मियों की कुल संख्या लगभग 22,000 हो गई है, जो लगभग 218 कंपनियों में वितरित हैं। बता दें कि 13 नवंबर की सुबह तामेंगलोंग जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 37 पर नागा समुदाय माल से लदे एक ट्रक को आग लगा दी गई।
रोंगमेई नागा छात्र संगठन ने इस आगजनी की घटना के लिए "कुकी चरमपंथियों" को जिम्मेदार ठहराते हुए इन जिलों में कुकी-ज़ो समुदायों को सभी आपूर्तियों का "पूर्ण बहिष्कार" घोषित किया।
असम से सीआरपीएफ की पंद्रह कंपनियों को स्थानांतरित किया जा रहा है और त्रिपुरा से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की पांच कंपनियों को वापस बुलाया जा रहा है। अतिरिक्त बलों को 30 नवंबर तक कंगपोकपी, चुआरचंदपुर और जिरीबाम सहित विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में और साथ ही घाटी और पहाड़ी जिलों के बीच बफर जोन में तैनात किए जाने की उम्मीद है।
मणिपुर में तनाव 10 सशस्त्र उग्रवादियों की मौत के बाद और बढ़ गया है। 11 नवंबर को सीआरपीएफ चौकी और एक पुलिस स्टेशन पर हमला करने के बाद जवाबी गोलीबारी इनकी मौत हुई है।
फ़ेरज़ावल और चूड़ाचंदपुर जिलों के रहने वाले इन लोगों की पहचान कर ली गई है और असम के सिलचर मेडिकल कॉलेज में छह शवों का पोस्टमार्टम किया गया है।
7 नवंबर से अब तक राज्य में कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है। आदिवासी कुकी-ज़ो-हमार और मैतेई लोगों के बीच संघर्ष, जो 3 मई, 2023 को शुरू हुआ था, अब तक 240 से ज़्यादा लोगों की जान ले चुका है।












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