अडानी-हिंडनबर्ग विवाद: सेबी ने SC से जांच पूरी करने के लिए 6 महीने का और वक्त मांगा, जानिए वजह
अडानी समूह के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच पूरी करने के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी ने सुप्रीम कोर्ट से छह और महीने का समय मांगा है।

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा अडानी समूह के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच पूरी करने के लिए 6 महीने का और समय मांगा है। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना अनुरोध दायर किया।
कहा कि जांच पूरी करने के लिए 15 महीने लगेंगे, लेकिन कम से कम और छह महीने में पूरा करने की कोशिश करेंगे। ऐसे में जांच के लिए और मोहलत दी जाए। सेबी ने अदालत को सूचित किया कि उसने एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट और विशेषज्ञ समिति को प्रथम दृष्टया निष्कर्ष प्रस्तुत किया है।
दरअसल, हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा उद्योगपति गौतम अडानी के नेतृत्व वाले व्यापारिक समूह के खिलाफ धोखाधड़ी, शेयर-कीमत में हेरफेर सहित कई आरोप लगाए गए। अडानी समूह ने आरोपों को झूठ बताते हुए खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि यह सभी कानूनों का अनुपालन किया गया है। 2 मार्च को, सुप्रीम कोर्ट ने मार्केट रेगुलेटर सेबी को अडानी-हिंडनबर्ग मामले में अपनी जांच पूरी करने और दो महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।
सेबी ने पेश किए उल्लंघनों की सूची, जिसके जांच के लिए लगेगा वक्त
- संबंधित पक्ष लेन-देन (RPT) प्रकटीकरण से संबंधित संभावित उल्लंघन
- कॉर्पोरेट प्रशासन संबंधी मामलों के संभावित उल्लंघन
- न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) मानदंडों का संभावित उल्लंघन
- संभावित शेयर की कीमत में हेरफेर
- एफपीआई विनियमों का संभावित उल्लंघन
- ओडीआई मानदंडों के संभावित उल्लंघन
- इनसाइडर ट्रेडिंग विनियमों/FUTP विनियमों का संभावित उल्लंघन
- शॉर्ट सेलिंग के नियमों का संभावित उल्लंघन
सात सूचीबद्ध कंपनियां भी जांच के घेरे में
- अदानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड
- अदानी पावर लिमिटेड
- अदानी ट्रांसमिशन लिमिटेड
- अदानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड
- अदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड
- अदानी टोटल गैस
- लिमिटेड और अदानी विल्मर लिमिटेड












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