AAP: दिल्ली हारने के बाद 'आप' का गोवा, गुजरात में अकेले चुनाव लड़ने का एलान, कांग्रेस के लिए झटका या मौका?

Aam Aadmi Party: आम आदमी पार्टी (AAP) ने 2027 के गोवा और गुजरात विधानसभा चुनावों में अकेले उतरने का एलान किया है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना ने स्पष्ट कर दिया कि इन दोनों राज्यों में पार्टी किसी के साथ भी गठबंधन की योजना नहीं बना रही है।

'आप' के इस घोषणा की विपक्षी राजनीति में दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। खासकर कांग्रेस के लिए, जो इन राज्यों में मुख्य विपक्षी दल है। आइए, समझने की कोशिश करते हैं कि आम आदमी पार्टी के दोनों राज्यों में विधानसभा चुनावों से इतने पहले इस तरह की बात कहने के मायने क्या हो सकते हैं और इससे किस तरह का संकेत मिल रहे हैं?

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Aam Aadmi Party Atishi: दिल्ली में AAP और हरियाणा में कांग्रेस को अकेले लड़ने से हुआ नुकसान

दिल्ली में हालिया चुनावों में अगर आप और कांग्रेस ने गठबंधन किया होता, तो शायद उस गठबंधन को भारतीय जनता पार्टी से अधिक सीटें मिल सकती थीं। क्योंकि, बीजेपी और आप के बीच महज 2% के वोटों का ही अंतर था, और कांग्रेस का साथ इस अंतर को पाट सकता था। लेकिन, दोनों पार्टियों के अलग-अलग चुनाव लड़ने से बीजेपी-विरोधी विपक्ष कमजोर पड़ा।

2024 के आखिर में आप के साथ गठबंधन नहीं हो पाने का खामियाजा कांग्रेस को हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी भुगतना पड़ा था।

अब जब AAP ने गोवा और गुजरात में भी अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है, तो इससे यह साफ होता है कि दोनों दलों या इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों के बीच भरोसे का अभी भी बहुत ज्यादा अभाव है।

Aam Aadmi Party Arvind Kejriwal: INDIA bloc की एकता के लिए एक और बड़ा झटका

पश्चिम बंगाल में टीएमसी (TMC) और कांग्रेस-लेफ्ट के बीच पहले से ही गहरे मतभेद हैं और वहां तृणमूल कांग्रेस पहले से ही अपनी डफली, अपना राग बजा रही है। पंजाब में आप सरकार के खिलाफ अभी भी कांग्रेस ही सबसे बड़ी फोर्स है। इसलिए बंगाल की तरह यहां भी दोनों दल, अलग-अलग रास्ते चल रहे हैं। ऐसे में गोवा और गुजरात के लिए आम आदमी पार्टी ने घोषणा करके भाजपा-विरोधी इंडिया ब्लॉक को एक और बड़ा झटका दे दिया है।

Aam Aadmi Party Politics: कांग्रेस को नुकसान, भाजपा को फायदा?

गोवा और गुजरात में कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है। 2022 में गोवा में कांग्रेस ने 11 सीटें जीती थीं, लेकिन बाद में उसके 8 विधायक भाजपा में शामिल हो गए। आज कांग्रेस के पास सिर्फ 3 विधायक हैं, जबकि AAP के 2 विधायक हैं।

गोवा में 2022 में कांग्रेस को 23.46% वोट मिले थे और आप को 6.77% वोट आए थे। यहां तब टीएमसी भी पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ी थी और 5.21% वोट जुटाने में सफल हुई थी, हालांकि एक भी सीट जीत नहीं सकी थी।

बीजेपी को अकेले 33.31% वोट मिले थे और वह 40 में से आधी यानी 20 सीटें जीतकर सत्ता बचाने में सफल हो गई थी। ये आंकड़े बताते हैं कि यहां विपक्षी एकता से कैसे समीकरण बदलने की गुंजाइश हो सकती हैष

इसी तरह से गुजरात में उसी साल कांग्रेस को 27.28% वोट मिले थे और वह 182 में से सिर्फ 17 सीटें जीत सकी थी। तब भी वहां आम आदमी पार्टी अकेले चुनाव लड़ी और उसे 12.92% वोट और 5 सीटें मिली थीं।

हालांकि, यहां भाजपा की जीत अप्रत्याशित रही थी और उसने न सिर्फ 156 सीटें जीतकर प्रदेश के तमाम रिकॉर्ड तोड़ दिए थे, बल्कि 52.5% वोट जुटाकर जीत का ऐसा परचम लहराया कि विपक्ष को पूरी तरह से सफाचट करने में सफल हो गई।

इन चुनाव परिणामों को देखने से लगता है कि अगर आगे भी कांग्रेस और आप हाथ नहीं मिला सके तो बीजेपी को ही फायदा होगा, क्योंकि विपक्षी वोटों का विभाजन उसके लिए लाभदायक हो सकता है।

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