यूपी में एक मुस्लिम दंपति के विवाद में जज से हुई बड़ी कानूनी चूक, कहा- गलतियां तो होंगी ही

नई दिल्ली- यूपी में एक मुस्लिम दंपति के वैवाहिक विवाद के मामले में एक फैमिली कोर्ट का फैसला और फिर उस फैसले पर उसी फैमिली कोर्ट के दूसरे जज के रवैये ने हायर जुडिशरी के भी कान खड़े कर दिए हैं। दरअसल, इसमें पहले तो एक फैमिली कोर्ट ने एक मुस्लिम दंपति के मामले में हिंदू कानूनों के तहत आदेश दिया; और जब हाई कोर्ट ने सवाल पूछे तो संबंधित जुडिशियल ऑफिसर ने कोर्ट से हुई गलती मानने के बजाय हाई कोर्ट के अधिकारों पर ही सवाल उठा दिए। इतना ही नहीं संबंधित जज ने यहां तक कह दिया कि फैमिली कोर्ट में काम का दबाव इतना रहता है कि गलतियां रोकी नहीं जा सकतीं।

मुस्लिम दंपति के वैवाहिक विवाद में हिंदू विवाह कानून का इस्तेमाल

मुस्लिम दंपति के वैवाहिक विवाद में हिंदू विवाह कानून का इस्तेमाल

इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक डिविजन बेंच के सामने एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने काबिल न्यायाधीशों को भी चकरा दिया। इस मामले में एक फैमिली कोर्ट ने एक मुस्लिम दंपति के वैवाहिक विवाद में हिंदू विवाह कानून के तहत आदेश जारी किया था। फैमिली कोर्ट ने उस मुस्लिम पति को अपनी बीवी को अंतरिम गुजारे के तहत एक रकम देने का फैसला सुना दिया था। विवाद 2015 का था और जब अपील में हाई कोर्ट के डिविजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए मामला आया तो अदालत ने इसकी पड़ताल शुरू कर दी कि इतनी बड़ी गलती कैसे हुई? हाई कोर्ट ने पिछले अक्टूबर में ही इस फैसले पर रोक लगा दी थी। लेकिन, जब इस गलती की छानबीन के लिए हाई कोर्ट ने संबंधित फैमिली कोर्ट के जज को सफाई देने के लिए अपनी अदालत में बुलाया तब तो पूरे केस ने एक नया ही मोड़ ले लिया।

फैमिली कोर्ट के जज को हाई कोर्ट के बुलावे पर आपत्ति

फैमिली कोर्ट के जज को हाई कोर्ट के बुलावे पर आपत्ति

जब फैमिली कोर्ट के जज मनोज कुमार शुक्ला इलाहाबाद हाई कोर्ट की डिविजन बेंच के न्यायाधीशों जस्टिस अनिल कुमार और जस्टिस सौरभ लवानिया के सामने फैसले में हुई चूक पर सफाई देने के लिए पहुंचे तो उन्होंने अदालत से कहा कि उन्हें बिना मतलब के बुला लिया गया है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि मुस्लिम दंपति के मामले में हिंदू विवाह कानून के तहत फैसला उनसे पहले वाले जज ने सुनाया था। वे हाई कोर्ट के विवेक पर सवाल उठाते हुए ये बात दोहराते रहे कि उन्हें इस तरह से नहीं बुलाया जाना चाहिए था। इसके लिए जज शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया कि जुडिशियल ऑफिसर को अदालत के सामने नहीं बुलाया जाना चाहिए।

काम का दबाव रहेगा तो गलतियां होंगी ही- फैमिली कोर्ट के जज

काम का दबाव रहेगा तो गलतियां होंगी ही- फैमिली कोर्ट के जज

हद तो तब हो गई जब फैमिली कोर्ट के जज ने हाई कोर्ट की डिविजन बेंच के सामने अपने फैसले में गलती करने वाले जज के बचाव में दलीलें देनी शुरू कर दी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जज शुक्ला की दलील है कि 'फैमिली कोर्ट में बहुत ज्यादा काम के दबाव की वजह से जुडिशियल ऑफिसर इस तरह की गलतियां करते हैं और ऐसी गलतियां होती रहेंगी, क्योंकि आदेश/फैसला लिखने के लिए सिर्फ एक स्टेनो ही उपलब्ध कराया गया है।' सोमवार को दिए अपने आदेश में हाई कोर्ट बेंच ने जज शुक्ला के अदालत में 'दुर्व्यवहार' की जानकारी चीफ जस्टिस को दी है। हाई कोर्ट ने ये भी कहा है कि सबसे आश्चर्यजनक ये है कि इस केस में संबंधित जज जिला जज की रैंक के हैं। बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि उन्हें 'बहुत ही भारी मन से इस बात की जिक्र करनी पड़ रही है कि जज मनोज शुक्ला के कोर्ट रूम में बर्ताव ने जुडिशरी की छवि खराब की है और उन्होंने इस कोर्ट का भी अनादर किया है, जिसकी उम्मीद एक जुडिशियल ऑफिसर से नहीं की जा सकती।'

सही कानून का इस्तेमाल जज की ड्यूटी- हाई कोर्ट

सही कानून का इस्तेमाल जज की ड्यूटी- हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह बात स्पष्ट तौर पर बता दिया है कि एक जज की यह ड्यूटी है कि वह हर हाल में सही कानून का इस्तेमाल करे। लेकिन, संबंधित जज ने हाई कोर्ट के कार्य करने के तरीके पर ही सवाल उठा दिए हैं और उसके विरोध में टिप्पणियां की हैं। जब बेंच ने संबंधित जज को आगाह किया तो वे अदालत को ही कार्रवाई करने की चुनौती दे डाली और कहा कि उन्हें किसी चीज की परवाह नहीं है। लेकिन, फैमिली कोर्ट के जज के खिलाफ फौरन कोई कार्रवाई करने से हाई कोर्ट ने फिलहाल परहेज किया है।

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