नोटबंदी के फैसले से पटरी पर लौटी जिंदगी, एक कश्मीरी की पीएम को चिट्ठी
कश्मीर के मुसलमान व्यापारी ने लिखा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत। बताया कैसे नोट बंदी ने बदल दी इसकी जिंदगी। घाटी में कपड़े का काम करता है यह व्यक्ति।
श्रीनगर। पूरे देश में भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोट बंदी के फैसले को अलग-अलग तरह से बयां किया जा रहा हो, लेकिन कश्मीर के एक मुसलमान व्यापारी ने इस फैसले के लिए पीएम मोदी को तहेदिल से शुक्रिया अदा किया है।

इस व्यापारी ने पीएम मोदी को बताया है कि नोट बंदी के फैसले के बाद कैसे घाटी की माहौल बदल गया है। आप भी पढ़िए इस व्यापार का खत पीएम मोदी के नाम और जानिए कि चिट्टी में इसने क्या लिखा है।
प्रिय पीएम नरेंद्र मोदी,
एक कश्मीरी की जिंदगी भारत के बाकी हिस्सों की तुलना में अकल्पनीय होती है। एक साधारण कश्मीरी जो रोजाना अपने परिवार का पेट भरने के लिए कड़ी मेहनत करता है, वह हमेशा अलगाववादी और सुरक्षा बलों के बीच जारी संघर्ष में पिसता रहता है, यह काफी दुखद है लेकिन हमें इसके साथ ही रहना है।
मैं एक साधारण कश्मीरी हूं, अफजल रहमान और मैं कश्मीर में उन दो प्रतिशत अलगाववादियों में नहीं हूं। मैं एक पति हूं, और चार बच्चों का पिता और बूढ़े मां-बाप का बेटा हूं। और हां मैं एक गौरान्वित भारतीसू भी हूं और एक कश्मीरी हूं जो श्रीनगर में कपड़े की एक दुकान चलाता है।
जो एक बात मैं बार-बार सोंचने पर मजबूर होता हूं वह है अपने बच्चों को एक अच्छा भविष्य देना। इसलिए कई खतरों को भी झेलकर मैंने अपने बड़े बेटे को इस वर्ष पुलिस भर्ती परीक्षा देने के लिए कहा। मेरी एक बेटी 12वीं कक्षा में पढ़ रही है और मैा इस बात से वाकिफ हूं कि यह साल उसकी जिंदगी, कैरियर और तरक्की के लिए कितना अहम है।
लेकिन पिछले चार महीनों ने सब-कुछ बिखरा हुआ है। चार माह से बिजनेस ना के बराबर है या हुआ ही नहीं है और रोजाना कर्फ्यू लगा रहा है। ऐसे में एक निम्न मध्यम वर्ग बिना काम के कैसे जिंदा रह पाएगा? मैं किसी तरह से अपनी पिछली बचत के जरिए अपने परिवार का पेट भरने में कामयाब रहा लेकिन सिर्फ यही एक मुसीबत नहीं थी।
मेरी बेटी ने अपनी पढ़ाई के कई अहम दिनों को गंवा दिया वह भी तब जब उसकी जिंदगी का एक अहम पल चल रहा है। मेरा बेटा मौजूदा स्थितियों से काफी हत्तोसाहित महसूस करता है।
उसकी उम्र के बाकी युवा जिनके पास काम नहीं है, वे सड़कों पर सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंकने का काम कर रहे हैं और उन्हें इसके लिए अलगाववादियों की ओर से पैसा मिल रहा है।
लेकिन जिस इंसान के पास काम नहीं है, वह कया करेगा? वह अपने बच्चों और मां-बाप का पेट भरने के लिए पैसे कमाने के के लिए कुछ भी करेगा।
मेरा अपना बेटा जो कि पुलिस में शामिल होना चाहता है, उसने भी पत्थर फेंकने वाले इसी गैंग को ज्वॉइन कर लिया था। मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं मालूम था। मुझे इस बारे में तब पता लगा जब उसकी बांह में पैलेट गन से चोट लग गई थी।
जब यह संघर्ष कुछ कम हुआ, घाटी के स्कूलों को जलाया जाने लगा। मेरी बेटी का भी स्कूल उन 29 स्कूलों में से एक था जिन्हें जलाया गया था। हमारी जिंदगी पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी थी। हम न तो सो सकते थे, न ही कुछ खा सकते थे और न ही हमें मौत आ रही थी।
लेकिन आठ नवंबर को हमने रेडियो कश्मीर पर एक न्यूज सुनी। आपने 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट को बैन करने एक फैसला लिया।
शुरुआत में इस फैसले ने हमें थोड़ी देर के लिए डरा दिया था। हमारे पास बहुत कम पैसे थे और जो थे वे भी 500 रुपए थे। और इसे बदलने का विकल्प कश्मीर में जारी अशांति की वजह से भी हमारे पास नहीं था।
पूरा देश काले धन के बारे में सोचता है लेकिन कश्मीरी जिंदा रहने के बारे में सोचते हैं। हमने कभी नहीं सोचा था कि आपका यह फैसला हमें मारी जिंदगी वापस दे देगा, लेकिन निश्चित तौर पर इसने हमार जिंदगी हमें वापस लौटा दी।
सड़कों पर पत्थरबाजी नहीं हुई है, हालांकि सड़कों पर सेना थी लेकिन पत्थर फेंकने वाले गायब थे। पहले एक या दो दिन में घाटी में ट्रैफिक शुरू हो गया।
हमने अपनी दुकानें खोलीं और बाजार में लोग आए। हम वाकई में कुछ चेहरों को खुशी के साथ देख सकते थे।
देश के बाकी हिस्सों में लोगों को लाइन में खड़े होने में तकलीफें हो रही हैं लेकिन हम कश्मीरियों को इन लाइनों में खड़े होना अच्छा लग रहा है। हम एक दूसरे से मिल रहे हैं और काफी दिनों बाद सामाजिक हो रहे हैं।
हम अपनी बेटी की परीक्षाओं के लिए परेशान थे लेकिन अब वह अपनी बोर्ड परीक्षाओं को दे रही है। और सिर्फ मेरी बेटी ही नहीं बल्कि बाकी बच्चे भी अब स्कूल जा रहे हैं, परीक्षाएं दे रहे हैं और काफी खुश हैं। परीक्षाओं में सबसे ज्यादा 95 प्रतिशत शामिल हुए।
सब कुछ सकारात्मक चीजें हो रही हैं और सब पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया। हमें पता लगा कि अलगाववादियों के पास सिर्फ 500 रुपए या 1000 रुपए के ही नोट हैं और अब उन्हें कोई ले नहीं रहा है। मुझे नहीं पता कि बाकी देश क्या सोचता है लेकिन मैं और घाटी के बाकी लोग आपके इस फैसले से काफी खुश हैं।
आपका
अफजल रहमान












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