दो बहनों ने आधा-आधा लिवर देकर बचाई 14 साल के भाई की जान, रक्षाबंधन पर पढ़ें दिल को छू लेने वाली कहानी

दो बहनों ने आधा-आधा लिवर देकर बचाई 14 साल के भाई की जान, रक्षाबंधन पर पढ़ें दिल को छू लेने वाली कहानी

नई दिल्ली, 22 अगस्त: आज रक्षा बंधन का त्योहार है। इस दिन हम आपको एक ऐसे भाई-बहन की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने मिसाल पेश की है। दो बहनों ने आधा-आधा लिवर देकर अपने 14 साल के भाई की जान बचाई है। रक्षा बंधन पर एक बहन की ओर से भाई के लिए इससे बेस्ट गिफ्ट क्या हो सकता है। ये सफल सर्जरी गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में किया गया है। मेदांता की लीवर ट्रांसप्लांट टीम ने 14 वर्षीय अक्षत का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया है। लीवर फेल होने से गंभीर रूप से बीमार अक्षत को अपनी बहनों की बदौलत एक नया जीवन मिला है। डॉक्टरों ने शनिवार को जानकारी दी है कि भाई-बहनों ने एक चुनौतीपूर्ण ट्रांसप्लांट सर्जरी को पूरा किया है।

जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा था भाई

जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा था भाई

14 वर्षीय अक्षत उत्तर प्रदेश के बदायूं का रहने वाला है। करीब एक महीने पहले अक्षत का लीवर फेल हो गया था, लीवर खराब होने के कारण अपनी जिंदगी के लिए वह संघर्ष कर रहा था। लीवर फेल होने की वजह से अक्षत को पीलिया हो गया था। अक्षत का केस और भी गंभीर इसलिए हो गया था क्योंकि उसका वजन 92 किलो था।

दोनों बहनों ने आधा-आधा लिवर भाई को किया डोनेट

दोनों बहनों ने आधा-आधा लिवर भाई को किया डोनेट

मेदांता अस्पताल में पीडियाट्रिक लिवर डिजीज एंड ट्रांसप्लांटेशन की निदेशक डॉ नीलम मोहन ने कहा कि अक्षत की दोनों बहनें 29 वर्षीय नेहा और 22 वर्षीय प्रेरणा ने अपना आधा-आधा लिवर देकर भाई की जान बचाई है। मेदांता लीवर ट्रांसप्लांट इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष इस केस के मुख्य सर्जन डॉ ए एस सोइन ने कहा कि बड़ी ही मुश्किल से दोनों बहनों के आधे लिवर को लिया गया और दोनों हिस्सों को अक्षत की बॉडी में फिट करना एक चुनौतीपूर्ण काम था।

डॉक्टर बोले- एक ही साथ तीनों भाई-बहन ऑपरेशन रूम में थे

डॉक्टर बोले- एक ही साथ तीनों भाई-बहन ऑपरेशन रूम में थे

सर्जन डॉ ए एस सोइन कहा कि तीनों भाई-बहनों को एक ही साथ एक वक्त पर एक साथ ऑपरेटिंग टेबल पर देखना, न केवल डॉक्टर की टीम के लिए, बल्कि माता-पिता के लिए भी कठिन वक्त था। उन्होंने कहा कि एक सफल ट्रांसप्लांट के लिए बहुत जरूरी है कि लीवर का वजन रोगी के शरीर के वजन का कम से कम 0.8% से 1% हो। इस मामले अगर हम सिर्फ एक बहन से लिवर लेते तो उसक वजन सिर्फ 0.5 से 0.55% होता है। इसलिए हमें दोनों बहनों से लिवर लेने की जरूरत पड़ी। हमारी पूरी टीम इस बात से बहुत खुश है कि हमने इस जटिल ऑपरेशन को कर लिया है और किसी को भी अब कोई ज्यादा दिक्कत नहीं है।

'इन भाई-बहनों की कहानी रक्षाबंधन पर खुशियां लाएंगी'

'इन भाई-बहनों की कहानी रक्षाबंधन पर खुशियां लाएंगी'

डॉक्टरों ने कहा कि ऑपरेशन करने के बाद आईसीयू में तीनों भाई-बहनों को शिफ्ट किया गया था। आईसीयू में ठीक होने की शुरुआती अवधि तीनों के लिए बहुत मुश्किल भरा था। लेकिन तीनों भाई-बहन ठीक हो गए हैं। डॉक्टर ने कहा, "इन भाई-बहनों की कहानी निश्चित रूप से रक्षाबंधन के अवसर पर परिवार में खुशी लाएगी।"

'ऑर्गन डोनेट का ये सबसे अनूठा उदाहरण है'

'ऑर्गन डोनेट का ये सबसे अनूठा उदाहरण है'

मेदांता अस्पताल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ नरेश त्रेहन ने कहा, ''यह जीवन बचाने के लिए ऑर्गन डोनेट का सबसे अनूठा उदाहरण है। इससे समाज में यह संदेश जाता है कि कोई भी हेल्दी व्यक्ति बिना किसी नुकसान के अपना आधा लीवर या एक किडनी डोनेट करके किसी की भी जान बचा सकता है।''

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+