देहरादून एक्सप्रेस की भयावह तस्वीरें, जानिए 30 वर्षों में कब-कब लगी ट्रेनों में आग
ठाणे। महाराष्ट्र की सीमा के पास दाहाणु में मुंबई-देहरादून एक्सप्रेस की तीन बोगियों में आग लगने की घटना में मृतकों की संख्या 9 हो गई है। पश्चिम रेलवे के प्रवक्ता ने बताया कि माना जा रहा है कि आग मंगलवार आधी रात के बाद 2.30 बजे बोगी नंबर एस-2 और एस-3 के बीच गलियारे में लगी जो फौरन एस-4 में फैल गई, जिससे सोए हुए यात्री इसकी चपेट में आ गए।
अधिकारियों के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। केंद्रीय रेलमंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने घटना पर दुख प्रकट किया है और मृतकों के परिवार को पांच लाख रुपये सहायता राशि देने का ऐलान किया है। रेलवे बोर्ड ने इस घटना के संदर्भ में जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार गेटमैन के प्रयासों के चलते एक बहुत बड़ा हादसा होने से बच गया। चलती हुई रेलगाड़ी में आग का पता रेलवे क्रासिंग के गेटमैन को चलने पर उसने इसकी सूचना तुरंत दी। उसने रेलगाड़ी के चालक को इसकी जानकारी दी और रेलगाड़ी रुकवाई गई। गेटमैन ने बेहतरीन काम किया और एक बड़े हादसे को होने से रोक लिया।
रेलगाड़ी के मुंबई से लगभग 145 किलोमीटर दूर स्थित गोलवाड़ स्टेशन पर रोके जाने के फौरन बाद आग पर काबू पाया गया। राहत कार्य में मदद के लिए मुंबई और गुजरात से वैन भेजे गए हैं और घायलों को दाहाणु और गोलवाड़ के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। रेलवे के मंडलीय प्रबंधक सहित पश्चिम रेलवे के शीर्ष अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं और राहत कार्यो का जायजा ले रहे हैं।
पिछले तीस वर्षों में ट्रेनें कब-कब बनीं बर्निंग ट्रेन
23 फरवरी 1985: मध्य प्रदेश के राजनंदगांव में ट्रेन में आग लगी, जिसमें 50 से ज्यादा लोग मारे गये।
16 अप्रैल 1990: पटना में शटल ट्रेन में आग लगी, जिसमें 70 लोग जिंदा जल गये।
6 जून 1990: आंध्र प्रदेश के गोलागुडा में ट्रेन में आग लगी, जिसमें 35 लोग मारे गये।
10 अक्टूबर 1990: चेरलापल्ली, आंध्र प्रदेश में पैसेंजर ट्रेन में आग लगी, जिसमें 40 लोग मारे गये।
26 अक्टूबर 1994: मुंबई-हावड़ा मेल के स्लीपर क्लास में आग लगी। यह आग लोटापहार और सीकेपी रेलवे स्टेशनों के बीच रात के 2:51 बजे लगी, जिसमें 27 लोग मारे गये।
ट्रेनों में आग लगने की आगे की घटनाएं व देहरादून एक्सप्रेस की भयावह तस्वीरें देखें स्लाइडर में।

14 मई 1995
मद्रास-कन्याकुमारी एक्सप्रेस में सेलम के पास आग लगी, जिसमें 52 लोग जलकर खाक हो गये।

27 फरवरी 2002
गोधरा रेलवे स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस में आग लगा दी गई, जिसमें 8 लोग जलकर मर गये। इस घटना के बाद पूरे गुजरात में दंगे की आग भड़क उठी थी।

15 मई 2003
गोल्डेन टेम्पल मेल में सुबह 3:55 बजे लुधियाना और लाधोवल स्टेशनों के बीच आग लगी, जिसमें 36 लोग मारे गये।

18 अगस्त 2006
चेन्नई-हैदराबाद एक्सप्रेस में सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन के पास आग लगी, जिसमें कोई हताहत नहीं हुआ।

13 फरवरी 2009
कोरोमंडेल एक्सप्रेस में जाजपुर रेलवे स्टेशन के पास आग लगी। यह आग ठीक उस समय लगी थी, जब रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव संसद में रेल बजट पेश कर रहे थे। इसमें कोई हताहत नहीं हुआ था।

18 अप्रैल 2011
मुंबई-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में आग लगी। इस ट्रेन में 900 यात्री सवार थे, लेकिन सौभाग्यवश कोई हताहत नहीं हुआ। कोटा के पास आग लगते ही कोच ट्रेन से अलग कर दी गई।

12 जुलाई 2011
दिल्ली-पटना राजधानी एक्सप्रेस में दिल्ली के पास आग लगी। इसमें तमाम लोगों की मौत हुई।

22 नवंबर 2011
हावड़ा देहरादून एक्सप्रेस में आग लगी, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई। यह आग रात के ढाई बजे लगी।

26 फरवरी 2012
केरल में कोजीकोड जाने वाली जन शताब्दी एक्सप्रेस में आग लगी, जिसमें 3 लोग मारे गये।

30 जुलाई 2012
चेन्नई जाने वाली नई दिल्ली-चेन्नई तमिलनाडु एक्सप्रेस में आग लगी, जिसमें 47 लोग मारे गये।

16 अक्टूबर 2012
हैदराबाद से सोलापुर जाने वाली पैफलकनुमा पैसेंजर में आग लगी, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई।

30 नवंबर 2012
मध्य प्रदेश में जीटी एक्सप्रेस में आग लगी, जिसमें कई लोग मारे गये।

28 दिसंबर 2013
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में नंदेड़-बेंगलुरु एक्सप्रेस में आग लगी, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई।

8 Jan 2014
ठाणे के पास देहरादून मुंबई एक्सप्रेस में आग लगी जिसमें 9 लोग मारे गये।












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