7 करोड़ महिलाएं करती हैं धुंआ रहित तंबाकू का उपयोग, पड़ेगा उनकी प्रजनन क्षमता पर असर
स्वास्थ्य मंत्रालय ने तंबाकू के प्रयोग पर रिपोर्ट जारी की है।
नई दिल्ली। 15 साल से ऊपर की 7 करोड़ महिलाएं भारत में धुंआ रहित तंबाकू (SLT- Smokeless Tobacco) का प्रयोग करती हैं जो पूरी दुनिया का 63 प्रतिशत है। यह आंकड़ा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किया है।
मंत्रालय द्वारा पहली बार व्यापक रिपोर्ट जारी की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कम रुपयों में SLT का उपलब्ध हो जाना ही इसका महिलाओं द्वारा इतना अधिक प्रयोग करने का कारण है।
बताया गया कि SLT को उपयोग में लाने के कारण महिलाओं के प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

इतनी मौत सिर्फ तंबाकू के कारण
रिपोर्ट के अनुसार 3,50,000 लोगों की मौत सिर्फ तंबाकू प्रयोग करने के कारण हो रही है वहीं 1,00,000 लोग इससे जनित कैंसर के कारण मर रहे हैं।
रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि स्कूल जाने वाले 9.5 फीसदी बच्चे 10.7 फीसदी लडके और 7.5 फीसदी लड़कियां इसका रोजाना प्रयोग करती हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव अमल पुष्प के मुताबिक भारत ऐसा पहला देश है जहां गुटखा या किसी अन्य तरह के धुएं रहित तंबाकू की बिक्री, भंडारण और निर्माण पर पाबंदी लगाई गई है।
उन्होंने कहा कि इस कानून को लागू करने के लिए अभी और भी कड़े फैसले लिए जाने आवश्यक हैं।
इन पहलुओं पर की गई है रिपोर्ट में चर्चा
रिपोर्ट में धुंआ रहित तंबाकू के सभी पहलुओं जैसे निर्धारक तत्व, आर्थिक लागत और स्वास्थ्य के परिणाम, और न्यायिक उपाय की चर्चा की गई है ताकि इसका असर कम किया जा सके।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों तरह के तंबाकू पदार्थ यानी धुआं रहित धुंए वाले तंबाकू दोनों को प्रयोग में लाने वाले लोगों की संख्या कुल आबादी का 5.3 फीसदी यानी 4.23 करोड़ वयस्क हैं।
बताया गया कि उत्तर पूर्व में सबसे ज्यादा लोग दोनों तरह का तंबाकू प्रयोग में लाते हैं। इनकी संख्या 9.8 फीसदी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 85,000 पुरुष और 34,000 महिलाओं में कैंसर के नए मामले सामने आए हैं।












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